भारत और स्विट्जरलैंड ने सहयोग को दिया नया आयाम, प्रवासन से लेकर स्टार्टअप तक 5 अहम समझौते
भारत और स्विट्जरलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को पारंपरिक व्यापार और निवेश से आगे बढ़ाते हुए एक व्यापक साझेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन की भारत यात्रा के…
भारत और स्विट्जरलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को पारंपरिक व्यापार और निवेश से आगे बढ़ाते हुए एक व्यापक साझेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच पांच प्रमुख समझौतों पर सहमति बनी है, जो लोगों की आवाजाही, युवा पेशेवरों, परिवहन, विज्ञान और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों को कवर करते हैं।
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान का हवाला देते हुए समाचार एजेंसी IANS ने बताया कि इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग के नए रास्ते खोलना है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति परमेलिन ने 5 से 7 अक्टूबर तक की राजकीय यात्रा के दौरान नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता की।
प्रवासन और मोबिलिटी पार्टनरशिप
सबसे महत्वपूर्ण समझौतों में से एक 'माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप' (MMP) है। इसका लक्ष्य दोनों देशों के बीच लोगों की सुरक्षित और व्यवस्थित आवाजाही को बढ़ावा देना है। समझौते में अनियमित प्रवासन और मानव तस्करी को रोकने के प्रावधान शामिल हैं। इसके तहत पांच साल तक की अवधि के लिए मल्टीपल-एंट्री वीजा की सुविधा दी जाएगी, जिसमें हर यात्रा पर छह महीने तक रहने की अनुमति होगी। छात्रों के लिए एक साल के नवीकरणीय परमिट का भी प्रस्ताव है।
युवा पेशेवरों के लिए अवसर
एक अन्य समझौते के तहत 'यंग प्रोफेशनल्स स्कीम' (YPS) शुरू की गई है। इस योजना का मकसद दोनों देशों के युवा पेशेवरों को एक-दूसरे के देश में सीमित समय के लिए काम करने का अवसर देना है, ताकि वे पेशेवर अनुभव के साथ-साथ भाषाई और व्यावहारिक कौशल भी विकसित कर सकें। शुरुआत में हर साल प्रत्येक देश से 300 युवा पेशेवरों का आदान-प्रदान होगा, जिसे बाद में बढ़ाकर 500 तक किया जा सकता है।
तकनीक, विज्ञान और इनोवेशन में सहयोग
परिवहन तकनीक के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। यह समझौता भारत के सड़क परिवहन मंत्रालय और स्विट्जरलैंड के संबंधित विभाग के बीच हुआ है, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहन, रोपवे, सुरंग और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया जाएगा।
वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए, भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन ने एक 'लेटर ऑफ इंटेंट' पर सहमति जताई है। इसका उद्देश्य शोधकर्ताओं के बीच सहयोग बढ़ाना और साझा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में दीर्घकालिक परियोजनाओं के लिए एक ढांचा तैयार करना है। इसके अतिरिक्त, स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए 'इंडो-स्विस एकेडमिया-इंडस्ट्री ट्रेनिंग' (AIT India) कार्यक्रम को भी आगे बढ़ाया जाएगा।
इनपुट: IANS



