भारत-ऑस्ट्रेलिया सांस्कृतिक सहयोग: भारत सौंपेगा 'फर्स्ट नेशंस' के अवशेष, ऑस्ट्रेलिया लौटाएगा ऐतिहासिक कलाकृतियाँ
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अपने सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करते हुए एक दूसरे की विरासत को लौटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। एक तरफ जहाँ ऑस्ट्रेलिया, भारत की कई ऐतिहासिक कलाकृतियों को वापस भे
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अपने सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करते हुए एक दूसरे की विरासत को लौटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। एक तरफ जहाँ ऑस्ट्रेलिया, भारत की कई ऐतिहासिक कलाकृतियों को वापस भेजेगा, वहीं भारत सरकार ने चेन्नई के एक संग्रहालय में रखे ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी समुदाय (फर्स्ट नेशंस) के एक पूर्वज के अवशेषों को बिना किसी शर्त के लौटाने पर सहमति जताई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने इस प्रगति की घोषणा की है, जिसे दोनों देशों के बीच आपसी सम्मान और विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में इस द्विपक्षीय पहल को सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम बताया गया है। प्रधानमंत्री अल्बनीज ने कहा, "भारत और ऑस्ट्रेलिया का साझा इतिहास दोनों देशों के लोगों को जोड़ता है और सांस्कृतिक सहयोग इन संबंधों को और गहरा बना रहा है।" उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई फर्स्ट नेशंस समुदाय के पूर्वजों के अवशेष लौटाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णय की विशेष रूप से सराहना की।
सांस्कृतिक धरोहर की वापसी
इस समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया भी अपनी नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया और आर्ट गैलरी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के संग्रह से भारत की कई महत्वपूर्ण कलात्मक और ऐतिहासिक कलाकृतियाँ स्वेच्छा से लौटाएगा। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कहा कि सांस्कृतिक वस्तुओं की यह वापसी नैतिक संग्रह और संग्रहालय प्रबंधन के सर्वोत्तम मानकों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
'ऐतिहासिक न्याय और मेल-मिलाप'
ऑस्ट्रेलियाई सरकार के लिए अपने फर्स्ट नेशंस समुदायों के पूर्वजों के अवशेषों की वापसी अत्यंत भावनात्मक और सम्मान का विषय है। बयान में कहा गया, "फर्स्ट नेशंस समुदायों के पूर्वजों की उनके पारंपरिक समुदायों में वापसी उनके लिए अत्यंत सम्मानजनक और भावनात्मक महत्व रखती है। इसे ऐतिहासिक न्याय और मेल-मिलाप की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।" ऑस्ट्रेलिया की स्वदेशी मामलों की मंत्री मलांडिरी मैक्कार्थी ने भी इसे अतीत की गलतियों को सुधारने और ऐतिहासिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और भारत के सहयोग का स्वागत किया। वहीं, ऑस्ट्रेलिया के कला मंत्री टोनी बर्क ने कहा कि यह आदान-प्रदान दोनों देशों के साझा मूल्यों का प्रतीक है।
इनपुट: IANS



