जर्मनी-भारत सबमरीन डील अंतिम चरण में, अगले महीने हो सकते हैं हस्ताक्षर: जर्मन राजदूत
भारत में अपना कार्यकाल पूरा कर रहे जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन ने दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण पनडुब्बी समझौते (सबमरीन डील) को लेकर बड़ा भरोसा जताया है। उन्होंने संकेत दिया है कि इस रक्षा सौदे…
भारत में अपना कार्यकाल पूरा कर रहे जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन ने दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण पनडुब्बी समझौते (सबमरीन डील) को लेकर बड़ा भरोसा जताया है। उन्होंने संकेत दिया है कि इस रक्षा सौदे पर बहुत जल्द, संभवतः अगले महीने तक ही हस्ताक्षर हो सकते हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राजदूत एकरमैन ने भारत-जर्मनी के मज़बूत होते द्विपक्षीय संबंधों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की भी सराहना की।
कार्यकाल के अंत में उन्होंने कहा, “सबमरीन डील को लेकर मैं बहुत आशावान और आश्वस्त हूं कि यह बहुत जल्द, शायद अगले महीने तक, साइन हो जाएगी।” उन्होंने यह बातें ‘इंडो-जर्मन इंडस्ट्रीज डायलॉग’ के दौरान कहीं, जिसे उन्होंने भारतीय और जर्मन उद्योग जगत के लिए एक ज़रूरी मंच बताया।
व्यापारिक और रणनीतिक साझेदारी
राजदूत एकरमैन ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के विस्तार पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि जर्मनी यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों के बीच सालाना व्यापार 50 बिलियन डॉलर से भी ज़्यादा है। उन्होंने कहा, “मुझे पूरा भरोसा है कि आने वाले सालों में यह संबंध और बढ़ेगा। यह पहले ही बढ़ चुका है।”
कूटनीतिक संबंधों पर बात करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका की सराहना की। एकरमैन ने कहा, “प्रधानमंत्री हमारे द्विपक्षीय संबंधों में एक बहुत ही मिलनसार, बहुत ही सक्रिय साझेदार रहे हैं। हमने उन्हें ऐसे व्यक्ति के रूप में देखा है जो इस द्विपक्षीय संबंध में वास्तव में बहुत रुचि रखते हैं।”
कार्यकाल समाप्ति और विदेश मंत्री से मुलाक़ात
निवर्तमान राजदूत फिलिप एकरमैन का कार्यकाल वर्ष 2022 से जुलाई 2026 तक रहा। अपनी विदाई से पहले उन्होंने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाक़ात की। विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस मुलाक़ात की जानकारी देते हुए लिखा, “मैंने भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में उनके बहुमूल्य योगदान की सराहना की। भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।” एकरमैन ने बॉन, हीडलबर्ग और उट्रेक्ट विश्वविद्यालयों से कला इतिहास और अर्थशास्त्र में शिक्षा प्राप्त की और 1993 में जर्मन विदेश सेवा में शामिल हुए थे।
इनपुट: IANS



