भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर घमासान: किसानों का दिल्ली कूच, सरकार पर दमन का आरोप
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। इस समझौते को देश और किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए कई किसान संगठनों ने…
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। इस समझौते को देश और किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए कई किसान संगठनों ने 'देश बचाओ मोर्चा' के बैनर तले दिल्ली में प्रदर्शन का ऐलान किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, किसान नेताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार बातचीत करने के बजाय उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है।
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि सैकड़ों वाहनों के साथ किसान दिल्ली के लिए निकल चुके हैं, लेकिन उन्हें हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर रोके जाने की खबरें मिल रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी से टकराव करना नहीं, बल्कि दिल्ली के किसान घाट पर सिर्फ चार घंटे का शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर अपनी बात सरकार तक पहुंचाना है। पंधेर ने कहा, "यदि किसानों को रातभर रास्तों पर रोका गया और उन्हें परेशानी हुई तो इसकी जिम्मेदारी हरियाणा की सैनी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार की होगी।"
समझौते पर किसानों की चिंता
विरोध का मुख्य कारण प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता है। सरवन सिंह पंधेर ने दावा किया कि यह समझौता भारतीय किसानों के लिए हानिकारक साबित होगा। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, "अमेरिका के बड़े कृषि उत्पादकों के मुकाबले भारतीय छोटे और मध्यम किसान प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे, जिससे किसानों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है।" किसान नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह समझौते का पूरा मसौदा देश के सामने रखने के बजाय दमनात्मक रवैया अपना रही है।
सरकार पर दमन और गिरफ्तारी का आरोप
पंधेर के मुताबिक, सरकार ने किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी समेत कई किसानों को सुबह ही गिरफ्तार कर लिया, जो यह दिखाता है कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं देना चाहती। उन्होंने सवाल उठाया, "हरियाणा के मुख्यमंत्री लगातार पंजाब आते हैं और अपनी राजनीतिक गतिविधियां करते हैं, लेकिन जब पंजाब के किसान देश की राजधानी दिल्ली जाकर अपनी बात रखना चाहते हैं तो उन्हें रास्ते में रोक दिया जाता है। केंद्र सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या पंजाब भी देश का हिस्सा है या नहीं।"
राकेश टिकैत ने भी सरकार को घेरा
वहीं, हरिद्वार में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने भी कई मुद्दों पर सरकार की आलोचना की। दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज पर उन्होंने कहा कि अधिकारों के लिए संघर्ष करने वालों पर हमेशा लाठीचार्ज होता है, जबकि सत्ता का समर्थन करने वालों पर ऐसी कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसान संगठन छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हैं। टिकैत ने कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने और चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका पर भी अपनी बात रखी।
इनपुट: IANS



