बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर के आरोप पर पटना पुलिस की सफ़ाई, कहा — नियमों के तहत हुई कार्रवाई
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मतदान के दिन जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर और पटना पुलिस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। प्रशांत किशोर ने प्रशासन पर अपने कार्यकर्ताओं के खिलाफ एकतरफा और…
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मतदान के दिन जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर और पटना पुलिस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। प्रशांत किशोर ने प्रशासन पर अपने कार्यकर्ताओं के खिलाफ एकतरफा और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करने का आरोप लगाया, वहीं पुलिस ने इसे चुनाव आयोग के नियमों के तहत की गई एक मानक प्रक्रिया बताया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह विवाद बुधवार देर रात कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद शुरू हुआ।
गुरुवार को मतदान के दौरान प्रशांत किशोर, जो खुद इस उपचुनाव में उम्मीदवार हैं, ने मीडिया से कहा कि प्रशासन सिर्फ़ जन सुराज के कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहा है, जबकि दूसरे दलों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने इस कार्रवाई को निष्पक्ष चुनाव की भावना के खिलाफ बताया। इससे पहले, बुधवार रात को वह अपने समर्थकों के साथ जक्कनपुर थाने भी पहुँचे थे और पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया था।
प्रशासन का पक्ष और कानूनी दलील
इस पूरे मामले पर पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपना पक्ष रखा। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई चुनाव आयोग के 'साइलेंस पीरियड' के दिशा-निर्देशों के तहत की गई। नियम के मुताबिक, मतदान खत्म होने से 48 घंटे पहले प्रचार-प्रसार बंद हो जाता है और उस दौरान क्षेत्र से बाहर के सभी लोगों को, जो चुनाव प्रचार में शामिल हैं और वहाँ के मतदाता नहीं हैं, विधानसभा क्षेत्र छोड़ना होता है।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि नियमित जाँच के दौरान पाया गया कि कुछ बाहरी जिलों के लोग बांकीपुर क्षेत्र में मौजूद थे और उनके चुनाव प्रचार में शामिल होने के संकेत मिले थे। इसी के आधार पर, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और चुनाव आयोग के नियमों का पालन करने के लिए ऐसे लोगों को एहतियातन (preventive) हिरासत में लिया गया। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि वे निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के लिए प्रतिबद्ध हैं।
क्या थे प्रशांत किशोर के आरोप?
थाने पहुँचने पर प्रशांत किशोर ने कहा था कि अगर उनके किसी कार्यकर्ता ने कोई अपराध किया है, तो उसके खिलाफ कानूनी मामला दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने बिना किसी सूचना के लोगों को हिरासत में लेने को अनुचित ठहराया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हिरासत में लिए गए लोगों के परिवार वालों को भी उनकी स्थिति के बारे में जानकारी नहीं दी जा रही थी।
इनपुट: IANS



