रविवार, 11 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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बांग्लादेश में खसरे का कहर जारी, 24 घंटे में 7 और बच्चों की मौत

बांग्लादेश में खसरे और इससे मिलते-जुलते लक्षणों से बच्चों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार सुबह 8 बजे तक बीते 24 घंटों में 7 और बच्चों की जान चली गई…

बांग्लादेश में खसरे का कहर जारी, 24 घंटे में 7 और बच्चों की मौत
(फोटो: IANS)

बांग्लादेश में खसरे और इससे मिलते-जुलते लक्षणों से बच्चों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार सुबह 8 बजे तक बीते 24 घंटों में 7 और बच्चों की जान चली गई। इसके साथ ही इस साल इस बीमारी से होने वाली कुल मौतों का आंकड़ा 1,162 तक पहुंच गया है।

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स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) ने इन सभी सात नई मौतों को 'संदिग्ध खसरा' की श्रेणी में रखा है। इस अवधि में खसरे से किसी भी मौत की पुष्टि नहीं हुई है, जिससे पुष्ट मौतों की संख्या 104 पर स्थिर है, जबकि संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 1,058 हो गई है।

संक्रमण के नए मामले और अस्पताल की स्थिति

आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में खसरे के 1,180 नए संदिग्ध मामले दर्ज किए गए, जिससे देश में कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 2,05,028 हो गई है। इसी दौरान प्रयोगशाला जांच में 93 नए मामलों की पुष्टि हुई, जिसके बाद कुल पुष्ट संक्रमितों का आंकड़ा 22,421 पर पहुंच गया है। DGHS के अनुसार, इस साल 15 मार्च से अब तक खसरे के संदिग्ध लक्षणों वाले 1,82,047 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से 1,74,469 लोग ठीक हो चुके हैं।

नीतिगत फैसले और टीकाकरण में बाधा

रिपोर्टों में इस संकट के लिए सितंबर 2025 में यूनिसेफ के माध्यम से वैक्सीन खरीद रोकने के अंतरिम सरकार के फैसले को जिम्मेदार ठहराया गया है। 'द डेली स्टार' जैसे स्थानीय अखबारों ने खुली निविदा प्रक्रिया (Open Tender Process) की आलोचना की है। 'साइंस डॉट ओआरजी' की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि सरकार की नीतियों के कारण नियमित टीकाकरण कार्यक्रम बाधित हुआ, जिससे बीमारी तेजी से फैली।

यह बीमारी सबसे पहले जनवरी में म्यांमार सीमा के पास रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में शुरू हुई थी और अब देश के 64 में से 58 जिलों तक फैल चुकी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025 में केवल 59 प्रतिशत पात्र बच्चों को ही खसरे का टीका लगा था। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि 2024 से विटामिन ए वितरण अभियान के विफल होने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हुई है।

इनपुट: IANS

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