बुधवार, 2 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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बच्चों के अपहरण पर सख्त कानून की मांग, वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की जनहित याचिका

देश में बच्चों के अपहरण, अवैध गोद लेने और मानव तस्करी के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। बुधवार को दाखिल इस याचिका में बच्चों के खिलाफ ऐसे अपराधों से…

बच्चों के अपहरण पर सख्त कानून की मांग, वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की जनहित याचिका
(फोटो: IANS)

देश में बच्चों के अपहरण, अवैध गोद लेने और मानव तस्करी के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। बुधवार को दाखिल इस याचिका में बच्चों के खिलाफ ऐसे अपराधों से निपटने के लिए मौजूदा कानूनों को और सख्त बनाने की मांग की गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह याचिका वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर की गई है, जिसमें उन्होंने देश में सक्रिय संगठित रैकेटों पर लगाम कसने के लिए कड़े न्यायिक और पुलिस सुधारों का आग्रह किया है।

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याचिका में कहा गया है कि शोषण, अंगों की तस्करी और मेडिकल ट्रायल जैसे भयावह मकसदों के लिए बच्चों का अपहरण किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस अक्सर लापता या अपहृत बच्चों के मामलों में तत्काल FIR दर्ज करने और तेजी से जांच करने में विफल रहती है। इस देरी और लंबी कानूनी प्रक्रिया का फायदा संगठित अपहरण माफिया उठाते हैं, जिससे उनका अवैध कारोबार फलता-फूलता है।

याचिका में प्रमुख मांगें

इस जनहित याचिका में कई ठोस कदम उठाने की मांग की गई है। इसमें एक प्रमुख मांग यह है कि बच्चों के अपहरण जैसे गंभीर मामलों की जांच कम से कम एसीपी या एसएचओ स्तर के पुलिस अधिकारी द्वारा की जाए। इसके अलावा, मामलों का एक साल के भीतर निपटारा सुनिश्चित करने के लिए, विधायकों और सांसदों के मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालतों की तर्ज पर 'स्पेशल कोर्ट' के गठन का भी सुझाव दिया गया है। याचिका में अपहरणकर्ताओं के परिवार के सदस्यों की संपत्ति जब्त करने जैसा कड़ा प्रावधान लाने की भी मांग की गई है।

आंकड़ों से उजागर हुई समस्या

याचिका में समस्या की गंभीरता को दर्शाने के लिए चौंकाने वाले आंकड़े भी पेश किए गए हैं। 1 जून 2026 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि अकेले बिहार में 2013 से हर साल लगभग 15,000 बच्चों के लापता होने के मामले दर्ज होते हैं, जिनमें से मुश्किल से 50 प्रतिशत ही मिल पाते हैं। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, मानव तस्करी के सर्वाधिक मामले ओडिशा, बिहार, तेलंगाना और महाराष्ट्र में दर्ज हुए हैं। नाबालिग लड़कों की तस्करी में ओडिशा और बिहार शीर्ष पर हैं, जबकि नाबालिग लड़कियों की तस्करी के सबसे ज्यादा मामले राजस्थान में सामने आए हैं। इन बच्चों से भीख मंगवाने, बाल मजदूरी और वेश्यावृत्ति जैसे अवैध काम कराए जाते हैं।

हाल की एक घटना का जिक्र करते हुए याचिका में बताया गया है कि 5 जून 2026 को दिल्ली पुलिस ने 13 लोगों को गिरफ्तार किया था। यह गिरोह दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे पांच राज्यों में सक्रिय था और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के नवजात बच्चों को अगवा कर 8 से 10 लाख रुपये में बेच देता था।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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