आजम खान से जुड़े ठिकानों पर ED के छापे, सपा और कांग्रेस ने बीजेपी पर 'बदले की राजनीति' का आरोप लगाया
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़े कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। विपक्ष ने इसे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार की बदले की…
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़े कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। विपक्ष ने इसे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार की बदले की कार्रवाई बताते हुए कहा है कि सरकार लोगों को डराने का काम कर रही है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, सपा और कांग्रेस, दोनों ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा, "भारतीय जनता पार्टी प्रतिशोधात्मक राजनीति में लिप्त है। इसके पास देने के लिए अपना कुछ भी नहीं है। जब भी यह सत्ता में आती है, यह पिछली सरकारों के खिलाफ प्रतिशोधात्मक राजनीति करती है।" उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के पास जनकल्याण के लिए कोई मौलिक विचार नहीं है और वह केवल अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते शुरू की गई योजनाओं को नष्ट कर रही है।
विपक्ष का सरकार पर निशाना
सपा प्रवक्ता ने आगे कहा, "उत्तर प्रदेश को देखिए, पिछले 11 वर्षों में कोई बड़ा काम नहीं हुआ है। वे समाजवादी पार्टी की परियोजनाओं पर लगी पट्टिकाओं को हटाकर उन पर भाजपा का नाम लिख रहे हैं, रामपुर में आज़म खान को परेशान कर रहे हैं और अखिलेश यादव की योजनाओं को नष्ट कर रहे हैं।" इसी तरह, सपा के एक अन्य प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने कहा कि ईडी और सीबीआई की कार्रवाई कोई नई बात नहीं है और केंद्र व राज्य सरकारें लगातार राजनीतिक बदले की भावना से आजम खान को निशाना बना रही हैं।
उधर, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने भी इस कार्रवाई को आजम खान को कमजोर करने की कोशिश बताया। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "यह आजम खान को निशाना बनाने और कमजोर करने के लिए किया गया है।" गौरतलब है कि आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम फिलहाल रामपुर जेल में सजा काट रहे हैं।
जौहर विश्वविद्यालय विवाद की पृष्ठभूमि
आजम खान से जुड़ा यह मामला जौहर विश्वविद्यालय विवाद से भी जुड़ा है। रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने दावा किया था कि विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतें बिना जरूरी मंजूरी के बनाई गई थीं। आरडीए ने इन इमारतों को गिराने का आदेश भी जारी किया था, जिस पर बाद में जुलाई के अंत में संभागीय आयुक्त ने रोक लगा दी थी।
इनपुट: IANS



