ऑस्ट्रेलिया में बर्ड फ्लू का कहर: पहली बार H5N1 वायरस से वन्यजीवों की सामूहिक मौत की पुष्टि
ऑस्ट्रेलिया में पहली बार घातक H5N1 बर्ड फ्लू वायरस के कारण वन्यजीवों की बड़े पैमाने पर मौत की आधिकारिक पुष्टि हो गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह खुलासा तब हुआ जब देश की वैज्ञानिक संस्था CSIRO…
ऑस्ट्रेलिया में पहली बार घातक H5N1 बर्ड फ्लू वायरस के कारण वन्यजीवों की बड़े पैमाने पर मौत की आधिकारिक पुष्टि हो गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह खुलासा तब हुआ जब देश की वैज्ञानिक संस्था CSIRO ने दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में मृत पाए गए समुद्री पक्षियों (ग्रेटर क्रेस्टेड टर्न) में संक्रमण की पुष्टि की।
यह घटना ऑस्ट्रेलिया में H5N1 से जुड़ी पहली आधिकारिक मास मॉर्टेलिटी (सामूहिक मृत्यु) की घटना है। सप्ताहांत में किए गए एक हवाई सर्वेक्षण के दौरान 49 ग्रेटर क्रेस्टेड टर्न मृत और 35 बीमार पाए गए थे। इनके नमूने जांच के लिए CSIRO को भेजे गए, जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसके अलावा, दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के रोब में एक सीगल भी इस वायरस से संक्रमित मिला है।
सरकार ने जताई गंभीर चिंता
सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कृषि मंत्री जूली कॉलिन्स ने स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "दुर्भाग्य से हम जानते हैं कि एक बार एच5 बर्ड फ्लू वन्यजीवों और प्राकृतिक पर्यावरण में फैल जाए तो बड़ी संख्या में नुकसान को टालना संभव नहीं है - और अब हम वही देखना शुरू कर रहे हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलियाई लोगों को अब वायरस के और अधिक प्रसार तथा बड़ी संख्या में वन्यजीवों के प्रभावित होने की उम्मीद करनी चाहिए।
देशभर में फैल रहा संक्रमण
मंत्री कॉलिन्स ने बताया कि देश में अब तक बर्ड फ्लू के कुल 74 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। इनमें सबसे ज़्यादा 54 मामले दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में हैं, जबकि पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में 10, विक्टोरिया में 7, न्यू साउथ वेल्स में 2 और क्वींसलैंड में 1 मामला दर्ज किया गया है।
पर्यावरण मंत्री मरे वॉट ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि यह केवल शुरुआत है और भविष्य में ऐसी और घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। उन्होंने कहा, "जंगली पक्षियों और अन्य वन्य जीवों की आवाजाही को रोका नहीं जा सकता। यही वजह है कि संक्रमण नए इलाकों में फैल सकता है और भविष्य में भी बड़े पैमाने पर पक्षियों की मौत की घटनाएं सामने आ सकती हैं।" सरकार वन्यजीवों की आबादी को सुरक्षित रखने के लिए निगरानी और उनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही है।
इनपुट: IANS



