चंद्रपुर: अमृता फडणवीस के कार्यक्रम से पहले ASI का नोटिस, संरक्षित शिवलिंग पर अवैध निर्माण को लेकर विवाद
महाराष्ट्र के चंद्रपुर में एक ऐतिहासिक शिवलिंग के जीर्णोद्धार समारोह पर विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस की मौजूदगी में मंगलवार को होने वाले इस कार्यक्रम से ठीक…
महाराष्ट्र के चंद्रपुर में एक ऐतिहासिक शिवलिंग के जीर्णोद्धार समारोह पर विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस की मौजूदगी में मंगलवार को होने वाले इस कार्यक्रम से ठीक पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने मंदिर समिति को अवैध निर्माण के लिए नोटिस जारी किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, ASI ने निर्माण को तत्काल रोकने और अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है, जिससे पूरे आयोजन पर सवालिया निशान लग गया है।
यह पूरा मामला लालपेठ स्थित ‘एकाश्म, चंद्रपुर’ नामक विशाल शिवलिंग से जुड़ा है, जो ASI के तहत राष्ट्रीय महत्व का एक संरक्षित स्मारक है। पुरातत्व विभाग ने अपने नोटिस में कहा है कि स्मारक के प्रतिबंधित क्षेत्र में मंदिर समिति ने अवैध निर्माण कराया है, जो नियमों का गंभीर उल्लंघन है।
क्या हैं ASI के आरोप?
विभाग ने अपने निरीक्षण में पाया कि शिवलिंग के चारों ओर ग्रेनाइट लगाया गया है और परिसर में सीमेंट की ईंटों से दीवार और एक पक्का शेड बना दिया गया है। पुरातत्वीय स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के अनुसार, किसी भी संरक्षित स्मारक की सीमा से 100 मीटर के दायरे में किसी भी तरह का नया निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। बताया जा रहा है कि इस निर्माण के लिए स्थानीय विधायक किशोर जोरगेवार ने अपने कोष से राशि दी थी।
कार्यक्रम की तैयारी और कानूनी कार्रवाई
एक तरफ शहर में अमृता फडणवीस के आगमन को लेकर बड़े-बड़े बैनर लगाए गए हैं और प्रशासनिक स्तर पर भव्य तैयारियां चल रही हैं। वहीं दूसरी ओर, ASI के नोटिस ने इस पर ग्रहण लगा दिया है। विभाग ने "लालपेठ विशाल शिवलिंग मंदिर सेवा समिति" के अध्यक्ष को नोटिस भेजा है। IANS के अनुसार, विभाग ने नियमों के उल्लंघन के लिए समिति अध्यक्ष के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
नोटिस में पुरातत्व अधिनियम की धारा 20(ए) का हवाला देते हुए कहा गया है कि नियमों का उल्लंघन करने पर दो साल तक की कैद या एक लाख रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इस मामले में लोक आंदोलन न्यास के जिलाध्यक्ष नितिन बन्सोड ने भी पुरातत्व विभाग से शिकायत की थी।
इनपुट: IANS



