यमन: अल-जौफ प्रांत की जेल पर हवाई हमला, सऊदी समर्थित गठबंधन पर लगा आरोप
यमन के उत्तरी प्रांत अल-जौफ में एक जेल पर हुए हवाई हमले में कई लोगों के हताहत होने की खबर है। हूती-संचालित अल-मसीरा टीवी ने इस हमले के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन को ज़िम्मेदार ठहराया…
यमन के उत्तरी प्रांत अल-जौफ में एक जेल पर हुए हवाई हमले में कई लोगों के हताहत होने की खबर है। हूती-संचालित अल-मसीरा टीवी ने इस हमले के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन को ज़िम्मेदार ठहराया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह हमला सोमवार को प्रांतीय राजधानी अल-हजम में स्थित एक जेल को निशाना बनाकर किया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले में महिलाओं और बच्चों के भी हताहत होने की आशंका है। जेल निदेशक के हवाले से बताया गया है कि 35 कैदी और अपने पति से मिलने आई एक महिला अभी भी इमारत के मलबे के नीचे दबे हुए हैं। टीवी पर प्रसारित वीडियो में जेल को भारी नुकसान पहुँचा हुआ और बचाव दल को मलबे में फंसे लोगों की तलाश करते हुए दिखाया गया है।
बढ़ता तनाव और जवाबी कार्रवाई की धमकी
इस हमले के बाद हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यमन में सऊदी सैन्य कार्रवाइयों का 'जवाब दिया जाएगा'। उन्होंने सऊदी गठबंधन पर हवाई हमले करने, निगरानी उड़ानें भरने और यमनी सरकारी बलों को हथियार देने का आरोप लगाया। सऊदी अरब की ओर से इस मामले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
संयुक्त राष्ट्र ने जताई गहरी चिंता
यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हैंस ग्रंडबर्ग ने हालिया हमलों को 'बेहद चिंताजनक घटनाक्रम' बताया है जो संघर्ष को और बढ़ा सकते हैं। सोमवार को जारी एक बयान में उन्होंने कहा, "आम नागरिकों के मारे जाने और घायल होने, परिवारों के विस्थापित होने तथा नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबरें 'गहरी चिंता पैदा करने वाली' हैं।"
ग्रंडबर्ग ने चेतावनी दी कि अगर बड़े पैमाने पर लड़ाई फिर से शुरू होती है तो इसका सबसे ज़्यादा खामियाज़ा आम लोगों को भुगतना पड़ेगा और राजनीतिक समाधान का रास्ता और भी मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और हिंसा रोकने की अपील की है।
लंबे समय से जारी है संघर्ष
यमन में 2014 के अंत से गृह युद्ध जारी है, जब हूती लड़ाकों ने राजधानी सना समेत उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया था। अप्रैल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में एक युद्धविराम लागू हुआ था, जो छह महीने बाद समाप्त हो गया। हालांकि, तब से एक अनौपचारिक शांति बनी हुई थी जो अब टूटती दिख रही है।
इनपुट: IANS



