पूर्वी सीमा पर तनाव घटाने की कोशिश: भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश में पहली बार कोर कमांडर स्तर की बातचीत
लद्दाख में लंबे समय से जारी सैन्य वार्ता के बाद अब भारत और चीन ने पूर्वी सीमा पर भी उच्च-स्तरीय संवाद का एक नया अध्याय शुरू किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों की सेनाओं ने…
लद्दाख में लंबे समय से जारी सैन्य वार्ता के बाद अब भारत और चीन ने पूर्वी सीमा पर भी उच्च-स्तरीय संवाद का एक नया अध्याय शुरू किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों की सेनाओं ने रविवार, 6 सितंबर को अरुणाचल प्रदेश में पहली बार कोर कमांडर स्तर की बैठक की। यह बैठक भारतीय क्षेत्र के वाचा-दमाई सीमा बिंदु पर आयोजित हुई और इसका उद्देश्य वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े स्थानीय मुद्दों पर चर्चा कर समाधान खोजना था।
यह बैठक इस मायने में बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक इस स्तर की अधिकांश वार्ताएं लद्दाख सेक्टर के चुशुल-मोल्डो सीमा स्थल तक ही सीमित रही हैं, खासकर 2020 की गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद। अरुणाचल प्रदेश में इस तरह की सीधी बातचीत का शुरू होना यह संकेत देता है कि दोनों पक्ष पूर्वी सेक्टर में भी सैन्य स्तर पर संवाद के ज़रिए शांति और स्थिरता कायम करने के इच्छुक हैं।
बैठक का नेतृत्व और सैन्य कमान
इस महत्वपूर्ण सैन्य वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व तीसरी कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल गिरिश कालिया ने किया। अरुणाचल प्रदेश में चीन से लगी एलएसी की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी मुख्य रूप से भारतीय सेना की दो कोर संभालती हैं — तेजपुर स्थित चौथी कोर और नगालैंड के रंगापाहर में मुख्यालय वाली तीसरी कोर। भारतीय सेना ने इस क्षेत्र में चीन की किसी भी गतिविधि को लेकर अपना रुख बेहद दृढ़ और स्पष्ट रखा है, जिससे यह संदेश जाता है कि वह अपने सुरक्षा हितों से कोई समझौता नहीं करेगी।
पूर्वी सेक्टर में संवाद की अहमियत
भारत और चीन के बीच सीमा पर गश्त और सैनिकों की मौजूदगी को लेकर अक्सर विवाद की स्थिति बनती रहती है, जिसका एक बड़ा कारण एलएसी को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग धारणाएं हैं। अरुणाचल में कोर कमांडर स्तर की सीधी बातचीत शुरू होने से एक नया सैन्य माध्यम खुला है, जिससे ज़मीनी स्तर पर पैदा होने वाले ऐसे विवादों को बातचीत से सुलझाने में मदद मिल सकती है। यह पहल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की चीन यात्रा के बाद दोनों देशों द्वारा सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए घोषित उपायों का ही एक हिस्सा मानी जा रही है।
हाल ही में भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने भी तीसरी कोर के मुख्यालय का दौरा कर क्षेत्र में सैन्य तैयारियों और ऑपरेशनल स्थिति की समीक्षा की थी। 2020 के बाद भारत ने पूर्वी लद्दाख समेत पूरी एलएसी पर अपनी सैन्य तैनाती और रणनीति में व्यापक बदलाव किए हैं, ताकि चीन द्वारा यथास्थिति को एकतरफा बदलने के किसी भी प्रयास का कड़ा जवाब दिया जा सके।
इनपुट: IANS



