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अमेरिकी मिडटर्म चुनाव: जब नतीजों ने राष्ट्रपतियों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया

अमेरिका में हर चार साल में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव दुनिया भर में सुर्खियाँ बटोरते हैं, लेकिन दो साल बाद होने वाले मध्यावधि (मिडटर्म) चुनाव भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। ये चुनाव राष्ट्रपति के कामकाज…

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव: जब नतीजों ने राष्ट्रपतियों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया
(फोटो: IANS)

अमेरिका में हर चार साल में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव दुनिया भर में सुर्खियाँ बटोरते हैं, लेकिन दो साल बाद होने वाले मध्यावधि (मिडटर्म) चुनाव भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। ये चुनाव राष्ट्रपति के कामकाज पर जनता की राय का एक पैमाना माने जाते हैं और अक्सर व्हाइट हाउस की नीतियों और राजनीतिक शक्ति को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी इतिहास गवाह है कि कई बार मिडटर्म चुनावों के नतीजों ने सत्ताधारी राष्ट्रपतियों के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी की हैं और उन्हें अपनी रणनीति बदलने पर विवश कर दिया है।

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मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति का पद दाँव पर नहीं होता, लेकिन प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) और सीनेट (Senate) में सीटों का समीकरण बदल सकता है। अगर राष्ट्रपति की पार्टी कांग्रेस के दोनों या किसी एक सदन में बहुमत खो देती है, तो अगले दो वर्षों के लिए कानून बनाना और अपनी नीतियों को लागू करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इतिहास में इसके कई बड़े उदाहरण मौजूद हैं।

बिल क्लिंटन और 1994 का 'कॉन्ट्रैक्ट विद अमेरिका'

1994 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब उनकी डेमोक्रेटिक पार्टी ने मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस के दोनों सदनों में अपना नियंत्रण खो दिया। उस समय क्लिंटन प्रशासन की आर्थिक और स्वास्थ्य सुधार योजनाओं को लेकर असंतोष था। रिपब्लिकन पार्टी ने न्यूट गिंगरिच के नेतृत्व में 'कॉन्ट्रैक्ट विद अमेरिका' नाम से एक आक्रामक एजेंडा पेश किया। नतीजतन, रिपब्लिकन ने प्रतिनिधि सभा में 54 और सीनेट में 8 सीटें जीतकर लगभग चार दशकों बाद कांग्रेस पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया। इसके बाद क्लिंटन और रिपब्लिकन के बीच बजट को लेकर इतना गहरा टकराव हुआ कि नवंबर-दिसंबर 1995 में दो बार अमेरिकी सरकार का कामकाज ठप हो गया।

जॉर्ज बुश और 2006 में इराक युद्ध का असर

दूसरा अहम उदाहरण 2006 का है, जब राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश की रिपब्लिकन पार्टी को इराक युद्ध पर जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ा। युद्ध को लेकर बढ़ते सवालों के बीच हुए मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा में 30 और सीनेट में 6 सीटें जीत लीं। इस हार के साथ ही रिपब्लिकन पार्टी ने दोनों सदनों में अपना बहुमत गँवा दिया। इसका सीधा असर प्रशासन पर पड़ा और चुनाव के अगले ही दिन इराक नीति के प्रमुख चेहरों में से एक, रक्षा मंत्री डोनाल्ड रम्सफेल्ड को इस्तीफा देना पड़ा।

बराक ओबामा की 'बड़ी हार'

2010 में राष्ट्रपति बराक ओबामा की डेमोक्रेटिक पार्टी को मध्यावधि चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा, जिसे खुद ओबामा ने "शेलैकिंग" (बड़ी हार) कहा था। आर्थिक संकट, बेरोजगारी और 'अफोर्डेबल केयर एक्ट' (ओबामाकेयर) को लेकर तीखी राजनीतिक बहस के बीच हुए चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा की 63 सीटें खो दीं, जिससे सदन पर रिपब्लिकन का नियंत्रण हो गया। इस नतीजे ने ओबामा के विधायी एजेंडे को मुश्किल में डाल दिया और नए कानून पारित कराना पहले से कहीं ज्यादा कठिन हो गया।

ये ऐतिहासिक उदाहरण बताते हैं कि मिडटर्म चुनाव केवल कांग्रेस की सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि राष्ट्रपति के काम पर एक तरह का जनमत संग्रह भी हैं। नतीजों का असर राष्ट्रपति की टीम, उनकी नीतियों और अगले दो साल के पूरे राजनीतिक एजेंडे पर पड़ता है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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