क्या खत्म होगा LTCG टैक्स? SBI रिसर्च का अनुमान- सरकारी खजाने पर ज़्यादा असर नहीं पड़ेगा
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की रिसर्च विंग ने अपनी एक रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि सरकार सभी तरह के निवेशकों के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) टैक्स को पूरी तरह से खत्म कर सकती है और इसका सरकारी खजाने…
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की रिसर्च विंग ने अपनी एक रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि सरकार सभी तरह के निवेशकों के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) टैक्स को पूरी तरह से खत्म कर सकती है और इसका सरकारी खजाने पर बहुत मामूली असर पड़ेगा। मंगलवार को जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम से होने वाले राजस्व नुकसान को राजकोषीय घाटे के लक्ष्यों से ज़्यादा समझौता किए बिना आसानी से संभाला जा सकता है।
समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि एलटीसीजी टैक्स को खत्म किया जाता है, तो इससे सरकार के राजस्व में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का केवल 0.1 से 0.2 प्रतिशत की कमी आएगी। एसबीआई रिसर्च का मानना है कि सैद्धांतिक रूप से सभी पूंजीगत लाभ कर खत्म करने पर भी सरकार इस वित्तीय झटके को सहने में सक्षम होगी।
राजस्व पर कितना होगा असर?
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2027-28 तक एलटीसीजी टैक्स हटाने से सरकार को होने वाला राजस्व घाटा करीब 40,000 से 50,000 करोड़ रुपये तक सीमित रहेगा। यह अनुमान पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में हुए लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम संग्रह के बिल्कुल उलट है। रिसर्च के अनुसार, पिछला संग्रह असाधारण था क्योंकि तब भारतीय शेयर बाजारों ने करीब 30% का रिटर्न दिया था, जिससे विदेशी निवेशकों ने भारी मुनाफावसूली की थी।
इसके विपरीत, मौजूदा बाजार की स्थिति काफी अलग है। पिछले तीन वर्षों में निफ्टी का औसत रिटर्न सिर्फ 0.5% रहा है, और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने इस दौरान कुल 4.8 लाख करोड़ रुपये की निकासी की है।
निवेशकों के लिए अन्य सुझाव
एसबीआई रिसर्च ने एलटीसीजी टैक्स को खत्म करने के अलावा इसके ढांचे में कई अन्य बदलावों की भी सिफारिश की है।
निवेश की अवधि के आधार पर टैक्स: रिपोर्ट में एक स्लैब-आधारित टैक्स सिस्टम का प्रस्ताव है। इसके तहत, एक से दो साल तक रखे गए निवेश पर मौजूदा 12.5% टैक्स दर जारी रहे। दो से तीन साल के निवेश पर टैक्स घटाकर 5% कर दिया जाए और तीन साल से ज़्यादा समय तक रखे गए निवेश पर LTCG टैक्स शून्य कर दिया जाए।
खुदरा निवेशकों को राहत: छोटे निवेशकों को फायदा पहुंचाने के लिए सालाना LTCG टैक्स छूट की सीमा को मौजूदा 1.25 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही इसे महंगाई दर से जोड़ने की भी सिफारिश की गई है।
टर्म डिपॉजिट पर टैक्स: रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ऊंची ब्याज दरों के कारण टर्म डिपॉजिट (FD) में निवेश बढ़ा है। यदि इन पर सभी अवधियों के लिए एक समान 15% टैक्स दर लागू की जाती है, तो सरकार को लगभग 10,500 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है।
इनपुट: IANS



