अमेरिकी मध्यावधि चुनाव: शुरुआती नतीजों का इंतज़ार, कानूनी दाँव-पेंच से देरी की आशंका
अमेरिका में मंगलवार को मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान संपन्न होने के बाद अब सभी की निगाहें नतीजों पर टिकी हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, वोटों की गिनती शुरू होने के साथ ही बुधवार सुबह…
अमेरिका में मंगलवार को मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान संपन्न होने के बाद अब सभी की निगाहें नतीजों पर टिकी हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, वोटों की गिनती शुरू होने के साथ ही बुधवार सुबह (भारतीय समयानुसार 10:30 बजे) तक शुरुआती रुझान आने की उम्मीद है, लेकिन अंतिम तस्वीर साफ होने में कई दिन या हफ्ते भी लग सकते हैं।
शुरुआती रुझान उन सीटों के होंगे जहाँ मुकाबला एकतरफा रहने की संभावना है। वहीं, सीनेट की 11 महत्वपूर्ण सीटों में से 9 पर बुधवार दोपहर (भारत में रात 10:30 बजे) तक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। हालांकि, इसके बाद भी यह तय होना मुश्किल हो सकता है कि सीनेट में किस पार्टी को बहुमत मिलेगा।
नतीजों में देरी की वजहें
मतगणना की प्रक्रिया कुछ राज्यों में लंबी खिंच सकती है। अलास्का और मेन जैसे राज्यों में 'रैंक्ड चॉइस' यानी वरीयता-आधारित मतदान प्रणाली अपनाई जाती है। इसके तहत, यदि कोई उम्मीदवार पहली गिनती में 50% वोट हासिल नहीं कर पाता है, तो मतदाताओं की दूसरी पसंद के आधार पर दोबारा गिनती होती है, जिसमें काफी समय लगता है।
इसके अलावा, रिपब्लिकन पार्टी ने पहले ही कानूनी चुनौतियों की चेतावनी दी है, जिससे कुछ सीटों पर नतीजों की घोषणा में काफी देरी हो सकती है। अलास्का में ऐसी ही एक चुनौती की आशंका है।
पिछले चुनावों का अनुभव
अगर पिछले चुनावों को देखें तो नतीजों में देरी कोई नई बात नहीं है। 2022 और 2024, दोनों ही बार प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) पर नियंत्रण तय होने में आठ दिन लगे थे, क्योंकि कुछ अहम सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी था। इसी तरह, 2022 में सीनेट के अंतिम नतीजों के लिए चार दिनों का इंतजार करना पड़ा था। 2024 में कैलिफोर्निया की एक सीट पर तो नतीजा आने में 29 दिन लग गए थे, जहाँ हार-जीत का अंतर सिर्फ 187 वोटों का था।
ट्रंप और कानूनी चुनौतियां
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नतीजों को, खासकर सीनेट के परिणामों को, स्वीकार करेंगे। वह 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में अपनी हार को अब तक स्वीकार नहीं करते हैं और चुनाव में धांधली का दावा करते रहे हैं। खबरों के मुताबिक, उनका न्याय विभाग अन्य जगहों पर भी कानूनी चुनौतियां देने की तैयारी कर रहा है। विभाग ने अलास्का सीनेट चुनाव को लेकर पहले ही एक असफल कानूनी कोशिश की थी। कैलिफोर्निया में भी विभाग ने लगभग 20,000 वोटों को यह कहकर अलग करने की मांग की थी कि ये अमेरिकी नागरिकों के नहीं हैं, लेकिन निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में उसकी अपील खारिज हो गई।
इनपुट: IANS



