आर्थिक दबाव ईरान को झुका देगा, रियायतों के लिए होना पड़ेगा मजबूर: अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज का मानना है कि ईरान पर लगाया गया आर्थिक दबाव उसे बातचीत की मेज़ पर रियायतें देने के लिए मजबूर कर देगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार…
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज का मानना है कि ईरान पर लगाया गया आर्थिक दबाव उसे बातचीत की मेज़ पर रियायतें देने के लिए मजबूर कर देगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, वॉल्ट्ज ने कहा कि ईरान भले ही बमबारी का सामना कर ले, लेकिन आर्थिक दबाव झेलना उसके लिए कहीं ज़्यादा मुश्किल साबित हो रहा है।
फॉक्स न्यूज़ के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट की आर्थिक रणनीति को ईरान की अर्थव्यवस्था पर “विनाशकारी प्रभाव” डालने वाला बताया। उन्होंने दावा किया कि ईरानी वार्ताकार लगातार नकदी और आर्थिक संसाधनों तक पहुंच की मांग कर रहे हैं, जो उनकी कमज़ोर होती आर्थिक स्थिति को दर्शाता है। वॉल्ट्ज के मुताबिक, ईरानी नेतृत्व इस समय जमी हुई संपत्तियों तक पहुंच और नकदी हासिल करने पर सबसे ज़्यादा ज़ोर दे रहा है।
आर्थिक चिंताएं सैन्य चिंताओं पर भारी
माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि ईरान की सबसे बड़ी चिंता उसकी मुद्रा का लगातार कमज़ोर होना और बढ़ती महंगाई है। उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का उल्लेख करते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में ईरानी नेतृत्व रक्षा मंत्री की तुलना में ट्रेजरी सचिव बेसेंट से ज़्यादा चिंतित है। वॉल्ट्ज के अनुसार, ईरानी नेतृत्व को देश की सेना या आम लोगों की स्थिति से ज़्यादा अर्थव्यवस्था के बिगड़ने की फिक्र है।
सीनेटर मर्फी ने जताई अलग राय
इस बीच, डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने इस मुद्दे पर एक अलग और चिंताजनक दृष्टिकोण पेश किया है। एनबीसी न्यूज़ से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति 'यह युद्ध हार चुके हैं' और यह संघर्ष जितना लंबा खिंचेगा, अमेरिका को उतना ही ज़्यादा नुकसान होगा। मर्फी के अनुसार, इस संघर्ष से अमेरिका हर दिन कमजोर हो रहा है और ईरान उतना ही ताकतवर हो रहा है। उन्होंने कहा कि वह होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए किसी 'खराब समझौते' का भी समर्थन करेंगे, क्योंकि बातचीत में कोई प्रगति नहीं हो रही है और इसकी कीमत लगातार बढ़ रही है।
इनपुट: IANS



