इजरायल का बेन गुरियन एयरपोर्ट अमेरिकी सैन्य विमानों से भरा, यात्री उड़ानों पर संकट
इजरायल के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, बेन गुरियन एयरपोर्ट पर अमेरिकी सैन्य विमानों की बढ़ती संख्या के कारण यात्री उड़ानों पर संकट गहरा गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, एयरपोर्ट…
इजरायल के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, बेन गुरियन एयरपोर्ट पर अमेरिकी सैन्य विमानों की बढ़ती संख्या के कारण यात्री उड़ानों पर संकट गहरा गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, एयरपोर्ट अथॉरिटी ने चेतावनी दी है कि वह अब और अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमानों को संभालने की स्थिति में नहीं है और अगर ऐसा होता है तो सैकड़ों उड़ानें रद्द करनी पड़ सकती हैं।
यह स्थिति ईरान के साथ अमेरिका के जारी सैन्य संघर्ष के कारण उत्पन्न हुई है। बड़ी संख्या में अमेरिकी सैन्य विमान ईंधन भरने के लिए बेन गुरियन एयरपोर्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे हवाई अड्डे पर उसकी क्षमता से कहीं ज़्यादा बोझ पड़ गया है।
एयरपोर्ट क्षमता पूरी, और जगह नहीं
इजरायल एयरपोर्ट्स अथॉरिटी के महानिदेशक शेरोन केडमी ने स्पष्ट किया है कि बेन गुरियन एयरपोर्ट अपनी अधिकतम क्षमता पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “हम उड़ानें रद्द होने से बचाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं... हम वायुसेना के संपर्क में हैं और हर कोई जिम्मेदारी निभा रहा है।” हालांकि, उन्होंने यह भी साफ़ कर दिया कि अगर एयरपोर्ट को और अमेरिकी विमानों को जगह देनी पड़ी, तो वह सभी निर्धारित उड़ानों को संभाल नहीं पाएगा।
एक इजरायली अधिकारी ने भी बयान जारी कर और अधिक विमानों की रिफ्यूलिंग पर असहमति जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर और अमेरिकी विमान आते हैं तो उड़ानों में देरी हो सकती है और उन्हें रद्द भी करना पड़ सकता है।
हजारों यात्री हो सकते हैं प्रभावित
इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) के अनुसार, सोमवार तक बेन गुरियन एयरपोर्ट पर अमेरिका के 33 रिफ्यूलिंग विमान पहले से ही तैनात थे। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि वाशिंगटन यहां और भी विमान भेज सकता है। अनुमानों के मुताबिक, अगर सात और विमान आते हैं, जिससे कुल संख्या 40 हो जाएगी, तो अगस्त की शुरुआत से रोजाना लगभग 30 उड़ानें रद्द हो सकती हैं। इससे करीब 5,000 यात्रियों के टिकट प्रभावित होने की आशंका है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिकी सेना ने मंगलवार शाम ईरान पर लगातार 11वीं रात सैन्य हमले किए। सेंटकॉम के अनुसार, इन हमलों में ईरान के सैन्य ठिकानों, ड्रोन स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इनपुट: IANS



