गुरूवार, 24 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर (IMEC) अमेरिकी वैश्विक रणनीति का अहम हिस्सा, विदेश विभाग ने समर्थन दोहराया

अमेरिकी विदेश विभाग ने अपनी वैश्विक कनेक्टिविटी रणनीति में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) को एक बार फिर प्रमुखता से शामिल किया है। यह कदम पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस गलियारे…

भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर (IMEC) अमेरिकी वैश्विक रणनीति का अहम हिस्सा, विदेश विभाग ने समर्थन दोहराया
(फोटो: IANS)

अमेरिकी विदेश विभाग ने अपनी वैश्विक कनेक्टिविटी रणनीति में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) को एक बार फिर प्रमुखता से शामिल किया है। यह कदम पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस गलियारे का समर्थन किए जाने के ठीक एक दिन बाद आया है, जो दर्शाता है कि यह परियोजना वाशिंगटन के रणनीतिक एजेंडे में मजबूती से बनी हुई है।

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समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका अब IMEC को केवल एक व्यापार मार्ग के रूप में नहीं, बल्कि अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने और अमेरिकी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा करने वाली एक व्यापक पहल के तौर पर देख रहा है। इसे दुनिया भर के उन चुनिंदा रणनीतिक आर्थिक गलियारों की सूची में रखा गया है, जिन्हें वाशिंगटन सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है।

IMEC और अमेरिका का रणनीतिक दृष्टिकोण

भारत के लिए यह प्रस्तावित गलियारा विशेष महत्व रखता है, जिसका उद्देश्य अरब प्रायद्वीप के रास्ते भारत को यूरोप से जोड़ना है। इसमें समुद्री और रेल संपर्क के अलावा ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी भी शामिल है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौके पर खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और अरब देशों के नेताओं के साथ एक बैठक में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, "मिडिल ईस्ट के ऊर्जा ढांचे को ऐसे रास्तों से दूर करने की जरूरत है, जहां ईरान से जुड़े सुरक्षा जोखिम मौजूद हैं।"

ट्रंप ने कमर्शियल शिपिंग पर हुए हालिया हमलों का जिक्र करते हुए ऊर्जा आपूर्ति के लिए वैकल्पिक रास्तों की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका प्रशासन IMEC के साथ-साथ पाइपलाइन और तेल निर्यात के अन्य विकल्पों का भी समर्थन करता है।

दुनिया भर में अमेरिकी कनेक्टिविटी पहल

अमेरिकी विदेश विभाग ने IMEC के साथ कई अन्य महत्वपूर्ण गलियारों का भी उल्लेख किया है, जो G7 की 'पार्टनरशिप फॉर ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट' (PGII) का हिस्सा हैं। अमेरिका और अर्जेंटीना द्वारा जारी एक संयुक्त तथ्य-पत्र में भी इसका जिक्र किया गया है।

इन वैश्विक परियोजनाओं में शामिल हैं:

  • लोबिटो कॉरिडोर: यह उप-सहारा अफ्रीका में अंगोला के अटलांटिक तट को कांगो और जाम्बिया से जोड़ेगा।
  • लूजोन इकोनॉमिक कॉरिडोर: फिलीपींस में बंदरगाह, रेल और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला पर केंद्रित है।
  • ट्रांस-कैस्पियन ट्रेड रूट: मध्य एशिया और काकेशस को वैकल्पिक व्यापार मार्गों से जोड़ने की एक महत्वपूर्ण पहल।
  • एंडीज-अटलांटिक कॉरिडोर: अमेरिका इस परियोजना के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता के विकल्प भी तलाश रहा है।

वाशिंगटन का उद्देश्य इन गलियारों के माध्यम से निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा देना और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक सुरक्षित और विविध बनाना है। IMEC का इस सूची में शामिल होना भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

इनपुट: IANS

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