मंगलवार, 22 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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अल्जाइमर: क्या खून की एक साधारण जांच से दशकों पहले मिल सकता है बीमारी का संकेत?

अल्जाइमर को अक्सर बुढ़ापे की बीमारी माना जाता है, लेकिन इसके लक्षण दिखने से कई साल पहले ही दिमाग में बदलाव शुरू हो जाते हैं। अब एक नई स्टडी ने इस दिशा में एक बड़ी उम्मीद जगाई है। द लैंसेट में…

अल्जाइमर: क्या खून की एक साधारण जांच से दशकों पहले मिल सकता है बीमारी का संकेत?
(फोटो: IANS)

अल्जाइमर को अक्सर बुढ़ापे की बीमारी माना जाता है, लेकिन इसके लक्षण दिखने से कई साल पहले ही दिमाग में बदलाव शुरू हो जाते हैं। अब एक नई स्टडी ने इस दिशा में एक बड़ी उम्मीद जगाई है। द लैंसेट में प्रकाशित इस शोध के मुताबिक, खून की एक साधारण जांच (ब्लड टेस्ट) के जरिए अधेड़ उम्र में ही अल्जाइमर से जुड़े शुरुआती संकेतों का पता लगाया जा सकता है।

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समाचार एजेंसी IANS की इस रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों ने अध्ययन में अधेड़ उम्र के लोगों के खून में कुछ विशेष बायोमार्कर्स की जांच की। इन बायोमार्कर्स में फॉस्फोराइलेटेड टाऊ और अमाइलॉइड-बीटा जैसे प्रोटीन शामिल थे। ये वही प्रोटीन हैं, जिनमें होने वाले बदलाव अल्जाइमर से जुड़ी दिमागी प्रक्रियाओं की ओर इशारा करते हैं।

अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष

शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन प्रतिभागियों के खून में ये बायोमार्कर्स अल्जाइमर से जुड़े पाए गए, उनका प्रदर्शन सोचने-समझने और याददाश्त से जुड़े परीक्षणों में तुलनात्मक रूप से खराब था। यह संबंध तब भी बना रहा जब उम्र, बॉडी मास इंडेक्स (BMI), किडनी की कार्यक्षमता और APOE जीन जैसे अन्य कारकों को समायोजित किया गया। हालांकि, अध्ययन में शामिल अधेड़ उम्र के लोगों में अल्जाइमर के स्पष्ट लक्षण होना जरूरी नहीं था और ऐसे मामले आम नहीं थे।

लिंग और जीन की भूमिका

इस शोध में यह भी सामने आया कि इन बायोमार्कर्स का संबंध लिंग, नस्लीय समूह और APOE जीन के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। कुछ विश्लेषणों में यह संबंध अश्वेत प्रतिभागियों, APOE4 जीन वाले लोगों और महिलाओं में ज्यादा मजबूत पाया गया, हालांकि यह हर तुलना में एक जैसा नहीं था।

भविष्य की संभावनाएं और सीमाएं

यह अध्ययन इस विचार को बल देता है कि अल्जाइमर अचानक शुरू होने वाली बीमारी नहीं, बल्कि एक लंबी प्रक्रिया है जिसके जैविक संकेत सालों पहले मिल सकते हैं। अगर सस्ते और आसान ब्लड टेस्ट से इन बदलावों का पता चल जाए, तो भविष्य में डॉक्टरों को जोखिम वाले लोगों की पहचान करने में बड़ी मदद मिल सकती है। हालांकि, शोधकर्ता स्पष्ट करते हैं कि यह रिसर्च अभी शुरुआती चरण में है। इस टेस्ट की सटीकता, इसके क्लिनिकल उपयोग और यह कब तक आम लोगों के लिए उपलब्ध होगा, इस पर अभी और अध्ययन की जरूरत है।

इनपुट: IANS

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