सपा-बसपा का गठबंधन टूटा, अब उपचुनाव में एक-दूसरे को देंगे टक्कर

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akhilesh yadav and mayawati

लोकसभा चुनाव के नतीजों में सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीद के मुताबिक़ प्रदर्शन न किए जाने पर सपा-बसपा का गठबंधन टूटने की डगर पर है। दरअसल, बसपा सुप्रीमो मायावती ने कुछ दिन पहले पार्टी नेताओं के साथ चुनाव में मिली हार पर मंथन करने कर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। आज उन्होंने कहा ”समाजवादी पार्टी से अलग होना कोई स्थायी विराम नहीं है। भविष्य में सपा के सफल होने पर हम एक बार फिर काम करेंगे”।

बता दें लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 11 सीटों पर विधायकों ने चुनाव लड़ा और जीतकर सांसद भी बने। अब सांसद बनने पर विधानसभा की ख़ाली हुई 11 सीटों पर उपचुनाव होंगे। आम चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा के ख़िलाफ़ एक-साथ मिलकर लड़े अखिलेश-मायावती अब उपचुनाव में एक-दूसरे को टक्कर देंगे। मायावती ने साफ़ कह दिया है ”अगर अखिलेश यादव भविष्य में राजनीतिक तौर पर अगर सफल होते हैं तो वह उनके साथ फिर से काम करेंगी, लेकिन अगर वह सफल नहीं नहीं हुए तो हमारे लिए अलग से काम करना अच्छा रहेगा। इसलिए हमने अकेले उपचुनाव लड़ने का फैसला किया है”।

चुनाव में उत्तर प्रदेश में बसपा उम्मीदवारों को मिली क़रारी शिकस्त का ठीकरा समाजवादी पार्टी पर फ़ोड़ते हुए मायावती ने कहा कि ”यूपी में लोकसभा चुनाव के नतीजों में  समाजवादी पार्टी, का ‘यादव’ समुदाय का जो वोट था, वह पार्टी का समर्थन में नहीं गया। यहां तक ​​कि सपा के मज़बूत दावेदार भी हार गए”।

मायावती  के सपा-बसपा गठबंधन से दूर होने पर अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ”अगर गठबंधन टूट गया है, तो मैं इस पर गहराई से विचार करूंगा। बसपा प्रमुख मायावती के उपचुनाव अकेले लड़ने के फ़ैसले पर अखिलेश ने कहा कि अगर उप-चुनाव में सपा-बसपा का गठबंधन नहीं होता है, तो समाजवादी पार्टी चुनाव की तैयारी करेगी। सपा भी अकेले सभी 11 सीटों पर लड़ेगी”।