मौलाना शहाबुद्दीन का अखिलेश पर तंज: रामपुर दौरा मुस्लिम वोट लुभाने की कोशिश, पर अब देर हो चुकी
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की रामपुर में आज़म खान से प्रस्तावित मुलाकात पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने तीखी टिप्पणी की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक…
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की रामपुर में आज़म खान से प्रस्तावित मुलाकात पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने तीखी टिप्पणी की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मौलाना ने इस कदम को विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने की एक 'राजनीतिक कवायद' बताया है। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम समाज समाजवादी पार्टी से नाराज़ है और इस मुलाकात से पार्टी को कोई खास फायदा नहीं होगा।
मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि जब आज़म खान मुश्किल दौर से गुज़र रहे थे, तब अखिलेश यादव ने मजबूती से उनका साथ नहीं दिया, और अब चुनाव नज़दीक आने पर वह राजनीतिक संदेश देने के लिए उनसे मिल रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि रामपुर के लोग और आज़म खान के समर्थक इस दौरे पर कह रहे हैं, 'बहुत देर कर दी मेहरबां आते-आते।'
दिल्ली में मस्जिदों को नोटिस पर चिंता
अखिलेश यादव पर टिप्पणी के अलावा, मौलाना ने दिल्ली में दो मस्जिदों और एक दरगाह को जारी किए गए नोटिस पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित रेस कोर्स मस्जिद, चाणक्यपुरी की एक मस्जिद और दरगाह शाह जिलानी मियां को सात दिनों के भीतर जगह खाली करने का नोटिस दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इस नोटिस के बाद स्थानीय लोगों समेत देशभर में बेचैनी का माहौल है और लोग इसे संभावित बुलडोजर कार्रवाई से जोड़कर देख रहे हैं। मौलाना ने अधिकारियों से इन धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और पुराना कानून
मौलाना ने 1991 के पूजा स्थल अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि कानून के अनुसार, 15 अगस्त 1947 को धार्मिक स्थलों की जो स्थिति थी, उसे बनाए रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “कुछ मस्जिदें 200, 300, 500 और 700 साल पुरानी हैं,” इसके बावजूद उन्हें निशाना बनाए जाने की आशंका बढ़ रही है। उन्होंने उज्जैन और सहारनपुर की मस्जिदों से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया और संघ प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान को भी याद दिलाया जिसमें उन्होंने मस्जिदों के नीचे मंदिर तलाशने से बचने की बात कही थी।
'बदल चुका है मुस्लिम मतदाता'
मौलाना शहाबुद्दीन ने यह भी दावा किया कि आज़म खान का प्रभाव अब पहले जैसा नहीं रहा और मुस्लिम मतदाता अपने विवेक से निर्णय लेते हैं। उन्होंने रामपुर के हालिया चुनावी नतीजों का उदाहरण देते हुए कहा कि आज़म खान के प्रभाव में कमी आई है। उनके अनुसार, मुस्लिम समाज की सपा से नाराज़गी के चलते अखिलेश यादव की यह कोशिश सफल नहीं होगी और विधानसभा चुनाव में पार्टी को इसका अपेक्षित लाभ मिलने की संभावना कम है।
इनपुट: IANS



