सैन्य विमानन सुरक्षा को लेकर तीनों सेनाओं का बड़ा कदम, पूर्वी तट पर हुआ पहला संयुक्त अभ्यास
भारत की तीनों सेनाओं ने एयरोस्पेस सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार पूर्वी समुद्री तट पर स्थित प्रमुख नौसैनिक हवाई स्टेशन…
भारत की तीनों सेनाओं ने एयरोस्पेस सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार पूर्वी समुद्री तट पर स्थित प्रमुख नौसैनिक हवाई स्टेशन आईएनएस डेगा में एक संयुक्त एयरोस्पेस सुरक्षा निरीक्षण अभ्यास का आयोजन किया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न सेवाओं और संगठनों के बीच सुरक्षा प्रक्रियाओं और मानकों को लेकर एक साझा समझ विकसित करना था।
यह अभ्यास भारतीय वायुसेना के एयरोस्पेस सुरक्षा संस्थान और आईएनएस डेगा द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। यह सिर्फ एक नियमित सुरक्षा निरीक्षण नहीं था, बल्कि एक एकीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रम था जिसमें कई महत्वपूर्ण संगठनों के सुरक्षा ऑडिटरों ने एक साथ हिस्सा लिया।
साझा सुरक्षा, साझा अनुभव
इस अनूठे अभ्यास में भारतीय नौसेना और वायुसेना के साथ-साथ भारतीय थलसेना, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) से जुड़े एयरोस्पेस सुरक्षा ऑडिटरों ने भी भाग लिया। इसका मुख्य लक्ष्य प्रतिभागियों को किताबी ज्ञान से आगे ले जाकर वास्तविक हवाई स्टेशन के माहौल में विमानन सुरक्षा ऑडिट की बारीकियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना था।
अभ्यास के दौरान विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए संभावित जोखिमों की पहचान करने, सुरक्षा से जुड़ी सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को अपनाने और छोटी-से-छोटी कमी को समय पर दूर करने के महत्व पर जोर दिया। इसका उद्देश्य केवल कमियां ढूंढना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी था कि विमानन संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों का लगातार पालन हो ताकि संभावित दुर्घटनाओं को पहले ही रोका जा सके।
बढ़ती संयुक्तता का प्रतीक
यह पहल सशस्त्र सेनाओं के बीच बढ़ते समन्वय और संयुक्तता का भी एक बेहतरीन उदाहरण है। वायुसेना के पास बड़े पैमाने पर विमान संचालन, नौसेना के पास समुद्री वातावरण में विमानन अभियानों और थलसेना के पास हेलीकॉप्टर संचालन का व्यापक अनुभव है। इन सभी के अनुभवों को एक मंच पर लाना सुरक्षा संस्कृति को और मजबूत करेगा। इस अभ्यास ने यह संदेश दिया है कि आधुनिक सैन्य शक्ति केवल अत्याधुनिक हथियारों से नहीं, बल्कि सुरक्षित और कुशल संचालन से भी परिभाषित होती है।
इनपुट: IANS



