Advertising
Home देश ईरान ने भारत को चाबहार पोर्ट प्राजेकट से क्यों निकाला?
Advertising
<

ईरान ने भारत को चाबहार पोर्ट प्राजेकट से क्यों निकाला?

474
news
ईरान ने भारत को चाबहार पोर्ट प्राजेकट से क्यों निकाला?

अमेरिकी दबाव में जब से भारत ने ईरान से तेल खरीदना बंद किया है उसी समय से दोनो देशों के रिश्तों में तनाव घुलने लगा था। अब ईरान ने इसका जवाब चाबहार से जाहेदान तक की महत्वपूर्ण रेल परियोजना से भारत को बाहर करके दिया है। इससे भारत की परेशानी की दो वजहें हैं। एक तो अफगानिस्तान के रास्ते मध्य एशियाई देशों तक कारोबार करने की भारत की रणनीति को गहरा धक्का लगा है।

दूसरा, ईरान ने संकेत दिए है कि समूचे चाबहार सेक्टर में चीन की कंपनियों को बड़ी भागीदारी निभाने का रास्ता साफ किया जा सकता है। ईरान ने कुछ दिन पहले ही चीन के साथ एक समझौता किया है जिसके तहत वहां चीनी कंपनियां अगले 25 वर्षो में 400 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश करेंगी। ईरान के इस फैसले पर भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया है। लेकिन जानकार मान रहे हैं कि ईरान का फैसला चाबहार पोर्ट के जरिए रणनीतिक हित साधने की कोशिशों को धक्का लगा है।

चाबहार पोर्ट सिर्फ भारत की अफगानिस्तान नीति और अफगान में पाकिस्तान की घुसपैठ को कम करने के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि जिस रेल प्रोजेक्ट से भारत को अलग किया गया है वह भविष्य में भारतीय उत्पादों को रेल मार्ग से यूरोप तक बहुत ही कम समय में और कम लागत पर भेजने का काम करने वाला था। यह रेल प्रोजेक्ट चाबहार पोर्ट से जाहेदान के बीच की है। भारत की तैयारी इसे जाहेदान से आगे तुर्केमिनिस्तान के बोर्डर साराख तक ले जाने की थी।

इसकी संभावनाओं को देखते हुए भारत चाबहार पोर्ट पर एक बड़ा आर्थिक जोन भी बनाने की योजना बना रहा था। इसकी जानकारी जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में भी दी थी। चाबहार पोर्ट के लिए समझौता पीएम नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2016 की अपनी ईरान यात्रा के दौरान किया था।ईरान सरकार ने बताया कि, ”हमें उम्मीद थी कि चाबहार पोर्ट में निवेश कर भारत रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण इस सेक्टर के डेवलपमेंट में अहम भूमिका निभाएगा और चाबहार-जाहेदान रेल परियोजना में भी निवेश करेगा।

यह भी पढ़ें : चीन में पाया गया नया G4 वायरस एक नए pandemic की शुरुआत तो नहीं है ?

लेकिन भारत की तरफ से लगातार साझेदारी नहीं होने की वजह से अब इस प्रोजेक्‍ट का काम ईरानी कंपनियां कर रही हैं। भारत के साथ हमारी दोस्ती बेहद महत्वपूर्ण है। ईरान हमेशा समझता है कि भारत के साथ उसके रिश्ते की कोई सीमा नहीं है। भारत का हमेशा स्वागत होगा। लेकिन कोई भी तीसरा पक्ष या अपनी तरफ से थोपे गये प्रतिबंध को इस ऐतिहासिक सौहार्दपूर्ण समझौते को नुकसान पहुंचाने की इजाजत नहीं होनी चाहिए।”

Today latest news in hindi के लिए लिए हमे फेसबुक , ट्विटर और इंस्टाग्राम में फॉलो करे | Get all Breaking News in Hindi related to live update of politics News in hindi , sports hindi news , Bollywood Hindi News , technology and education etc.

Advertising