मृत्यु एक ऐसा सच है जिसे चाहकर भी कोई नहीं बदल सकता है। जो आया है उसे अपना कर्म पूर्ण करके निश्चित समय के बाद ईश्वर के पास लौटना ही होगा। जितना बड़ा सत्य जन्म है उतना ही बड़ा सत्य मृत्यु भी है लेकिन आप जानकर हैरान हो जाएंगे की एक ऐसी भी जगह है जहां मृत्य नहीं होती है। ख़बरों और कई पवित्र ग्रंथों में इस सन्दर्भ में जिक्र किया गया है और ग्रंथो के कथा अनुसार हिमालय में लगभग 2400 किलोमीटर की लम्बाई में यह विशेष जगह फैली है। वेदो, पुराणों और कई उपन्यासों के मुताबिक इस विशेष स्थान में रहने वाले लोगों की उम्र थम गई है, मतलब की उनकी उम्र नहीं बढ़ती है और नाही घटती है।
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ऐसे भी मान्यता है की वक़्त -वक़्त पर इस दुनिया से लोग इंसानी दुनिया में आते हैं और इससे मानव दुनिया में उथल-पुथल मच जाती है। और विनाश का काल शुरू हो जाता है और इसके कारण सृष्टि में कई बड़े बदलाव का कारण बनता है। कलियुग के अवतार भगवान कल्कि देव के भविष्यवाणी में भी इस शहर का जिक्र है। ऐसा माना जाता है कि कल्कि देव के गुरु इसी शहर में हैं। यही रहकर वह उनके जन्म की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
हर धर्म कथा में इस विशेष स्थान का जिक्र ,सांभल, सिद्धाश्रम या फिर शांगरी-ला के तोर पर हुआ है। ऐसा कहा जाता है कि युधिष्ठिर अपने जीवन के अंतिम क्षणों में अपने परिवार संग इसी जगह आये थे ताकि उन्हें मुक्ति प्राप्त हो सके। आपको साथ ही यह भी बताना चाहेंगे की यह पवित्र स्थान आम मनुष्य की पहुंच से काफी पारे है।

