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पुरुषोत्तम माह में वृंदावन आए अवधूत दादा गुरु: निराहार रहकर कर रहे साधना,कहा ब्रज मंडल देता है जल जंगल जमीन से जुड़े रहने का संदेश – Mathura News

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पुरुषोत्तम माह में वृंदावन आए अवधूत दादा गुरु:  निराहार रहकर कर रहे साधना,कहा ब्रज मंडल देता है जल जंगल जमीन से जुड़े रहने का संदेश – Mathura News

पुरुषोत्तम माह में वृंदावन आए अवधूत दादा गुरु: निराहार रहकर कर रहे साधना,कहा ब्रज मंडल देता है जल जंगल जमीन से जुड़े रहने का संदेश – Mathura News


प्रकृति पर्यावरण,जल संरक्षण का संकल्प लेकर निराहार नर्मदा की परिक्रमा करने वाले अवधूत सिद्धयोगी दादा गुरु 3 दिन की ब्रज यात्रा पर वृंदावन पहुंचे। उन्होंने चार संप्रदाय आश्रम में महामंडलेश्वर साध्वी सत्यप्रिया द्वारा व्यास पीठ पर विराजमान होकर भक्तों को सुनाई जा रही श्री मद्भागवत कथा का श्रवण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि ब्रज का कण कण पवित्र है ,देश दुनिया के लोग बृज की रज को मस्तक पर लगाने को आतुर रहते हैं। वृंदावन के प्राचीन चार संप्रदाय आश्रम की गौशाला में महामंडलेश्वर साध्वी सत्यप्रिया की चल रही श्रीमद् भागवत कथा के षष्टम् दिवस निराहार नर्मदा परिक्रमार्थी अवधूत दादा गुरु ने आकर अपना आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने कहा कि- ब्रज का एक-एक कण पवित्र है देश दुनिया के लोग बृज की रज को मस्तक पर लगाने को आतुर रहते हैं। आज भी ब्रज मण्डल कहीं ना कहीं हमें सन्देश देता है कि हमें जल जंगल जमीन से जुड़े रहना चाहिए। वृंदावन,गोवर्धन की देंगे परिक्रमा अवधूत सिद्धयोगी दादा गुरु में कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने भी यही सन्देश दिया है हमें माटी से जुड़े रहना चाहिए। परिक्रमा का महत्व समझाते हुए उन्होंने कहा कि मैं वृन्दावन और गिरिराज जी की परिक्रमा करने आया हूँ। यह परिक्रमा हमें धरा से जोड़ती है, धर्म से जोड़ती है और धेनु से जोड़ती है। यह परिक्रमा हमारे मूल आधारों से परिचय ही नहीं कराती वल्कि उनके साक्षात दर्शन भी कराती है। उन्होंने कहा कि हमारी बेटी साध्वी सत्य प्रिया श्रीमद भागवत कथा अब प्रत्येक पुरुषोतम मास में यमुना के तट पर वृन्दावन में किया करेगी। 3 वर्ष में काशी में नंदी का महादेव से होगा मिलन कथा प्रवक्ता साध्वी सत्य प्रिया ने कहा कि दादा गुरु के आशीर्वाद से गौमाताओं के मध्य यमुना तट पर यह भागवत कथा हो रही है। कथा का मुख्य उद्देश्य काशी विश्वगाथ में नन्दी का महादेव से मिलन हो ऐसा संकल्प हैं और दादा गुरु ने ऐसा संकेत दिया है कि आने वाले तीन सालों में ऐसा वातावरण बनेगा कि नन्दी से महादेव का मिलन होगा ही। हमें प्रकृति से जुड़कर प्राकृतिक सम्पदाओं का संरक्षण करना चाहिए। तभी यह धरा सुरक्षित रह पायेगी।

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