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अतिथि शिक्षकों ने फिर उठाई नियमितीकरण की मांग: विदिशा में हर साल कार्यमुक्त करने की व्यवस्था पर सवाल, 12 माह का कार्यकाल की मांग – Vidisha News

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अतिथि शिक्षकों ने फिर उठाई नियमितीकरण की मांग:  विदिशा में हर साल कार्यमुक्त करने की व्यवस्था पर सवाल, 12 माह का कार्यकाल की मांग – Vidisha News

अतिथि शिक्षकों ने फिर उठाई नियमितीकरण की मांग: विदिशा में हर साल कार्यमुक्त करने की व्यवस्था पर सवाल, 12 माह का कार्यकाल की मांग – Vidisha News


विदिशा में अतिथि शिक्षकों ने सोमवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। अतिथि शिक्षक संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में शिक्षक कलेक्ट्रेट पहुंचे और नियमितीकरण, 12 माह का कार्यकाल तथा नियमित शिक्षकों की भांति सुविधाएं प्रदान किए जाने की मांग उठाई। शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से शासकीय स्कूलों में शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसके बावजूद, उन्हें हर साल अप्रैल के अंत में कार्यमुक्त कर दिया जाता है और नए सत्र में फिर से नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होती है। इस स्थिति से उनके सामने आर्थिक और मानसिक संकट पैदा हो जाता है। जिले में 3400 शिक्षक अतिथि
जिले में लगभग 3400 अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि पूरे प्रदेश में इनकी संख्या करीब 70 हजार है। वर्तमान में, 29 अप्रैल के बाद से अधिकांश अतिथि शिक्षक स्कूलों से बाहर हैं, जबकि नया शिक्षण सत्र शुरू हो चुका है। संभाग अध्यक्ष कीर्ति राजपूत ने बताया कि अतिथि शिक्षक वर्षों से मानसिक प्रताड़ना झेल रहे हैं। उनसे नियमित शिक्षकों की तरह कार्य लिया जाता है, लेकिन उन्हें न तो स्थायित्व मिलता है और न ही अन्य सुविधाएं। 12 माह का कार्यकाल करने की मांग
उन्होंने मांग की कि अतिथि शिक्षकों का 12 माह का कार्यकाल सुनिश्चित किया जाए, अवकाश सहित अन्य सुविधाएं नियमित शिक्षकों के समान दी जाएं और बार-बार हटाने की प्रक्रिया समाप्त की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कई अतिथि शिक्षक लंबे समय से सेवा दे रहे हैं और उनकी आयु बढ़ती जा रही है, ऐसे में नियमितीकरण नहीं होने पर उनका भविष्य संकट में पड़ सकता है। जिला अध्यक्ष राकेश कुशवाह ने जानकारी दी कि अतिथि शिक्षक अपनी मांगों को लेकर कई बार शासन-प्रशासन को ज्ञापन सौंप चुके हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अतिथि शिक्षकों को स्कूलों में बनाए रखने और नियमितीकरण को लेकर घोषणा की थी, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई ठोस आदेश जारी नहीं हुआ है। उन्होंने मांग की कि नए शैक्षणिक सत्र के साथ ही अतिथि शिक्षकों को पुनः विद्यालयों में पदस्थ किया जाए और उनकी प्रमुख मांगों पर शीघ्र निर्णय लिया जाए।

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