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Bihar News: कटाव की मार और जलसमाधि का वार! लोगों ने अनोखे अंदाज में दर्ज कराया विरोध

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Bihar News: कटाव की मार और जलसमाधि का वार! लोगों ने अनोखे अंदाज में दर्ज कराया विरोध

Bihar News: कटाव की मार और जलसमाधि का वार! लोगों ने अनोखे अंदाज में दर्ज कराया विरोध

सोनपुर के सबलपुर दियारा क्षेत्र में एक बार फिर गंगा नदी के कटाव का खतरा बढ़ने लगा है। पिछले वर्ष कटाव से भारी तबाही झेल चुके इलाके के लोगों में इस बार भी भय का माहौल है। कटाव रोधी कार्यों में अनियमितता का आरोप लगाते हुए रविवार को रिंग बांध बनाओ संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीणों ने सबलपुर नया बाजार घाट पर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान लोगों ने मानव श्रृंखला बनाई और सांकेतिक जल समाधि लेकर प्रशासन और सरकार का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया।

सुबह से जुटने लगे ग्रामीण, मानव श्रृंखला बनाकर किया विरोध

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रविवार सुबह करीब 7 बजे से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण सबलपुर नया बाजार घाट पर जुटने लगे। लोगों ने कटाव रोधी कार्यों के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए मानव श्रृंखला बनाई और गंगा नदी में उतरकर सांकेतिक जल समाधि ली। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पिछले साल कटाव से हुए नुकसान के बाद लोगों को उम्मीद थी कि इस बार मजबूत और गुणवत्तापूर्ण कटाव रोधी कार्य कराए जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

कटाव रोधी कार्य में अनियमितता का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जल संसाधन विभाग की ओर से कराए जा रहे कटाव रोधी कार्यों में भारी अनियमितता बरती जा रही है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है, जिससे गंगा नदी का कटाव लगातार बढ़ने का खतरा बना हुआ है।

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मजबूत रिंग बांध और प्रभावी कटाव रोधी उपाय नहीं किए गए तो इस वर्ष भी कई गांव गंगा में समा सकते हैं।

स्थायी समाधान और जांच की मांग

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने सारण जिला प्रशासन से कटाव रोधी कार्यों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बाढ़ और कटाव की समस्या से जूझना पड़ता है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।

पिछले साल गंगा में समा गया था पश्चिमी टोला

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष सोनपुर के सबलपुर गांव का पश्चिमी टोला पूरी तरह गंगा नदी में विलीन हो गया था। कटाव के कारण कई घर नदी में समा गए थे और दर्जनों परिवारों को अपना गांव छोड़कर दूसरे स्थानों पर पलायन करना पड़ा था। इसी वजह से इस बार भी लोगों में डर और चिंता का माहौल बना हुआ है। कई गांवों पर फिर से गंगा कटाव का खतरा मंडरा रहा है।



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कटाव और बाढ़ में गई थीं कई लोगों की जान

स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले साल बाढ़ और कटाव के दौरान कई लोगों की जान चली गई थी। कई मकान कटाव की चपेट में आकर ढह गए थे, जिससे लोगों की मौत भी हुई थी। उस समय कई जनप्रतिनिधि और नेता प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने पहुंचे थे। उन्होंने बाढ़ और कटाव से बचाव के लिए कई घोषणाएं भी की थीं, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि वे घोषणाएं आज तक धरातल पर नहीं उतर सकीं।

अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहे ग्रामीण

कटाव के लगातार बढ़ते खतरे के बीच दियारा क्षेत्र के लोग अपने गांव और अस्तित्व को बचाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में कई गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।


ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर मजबूत रिंग बांध निर्माण तथा गुणवत्तापूर्ण कटाव रोधी कार्य सुनिश्चित करने की मांग की है।

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