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52 दिन में गोंडा-लखनऊ संजय सेतु का मरम्मत कार्य पूरा: ढाई करोड़ की लागत से हुई मरम्मत, 10 जून से छोटे वाहनों का ट्रायल होगा – Gonda News

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52 दिन में गोंडा-लखनऊ संजय सेतु का मरम्मत कार्य पूरा:  ढाई करोड़ की लागत से हुई मरम्मत, 10 जून से छोटे वाहनों का ट्रायल होगा – Gonda News

52 दिन में गोंडा-लखनऊ संजय सेतु का मरम्मत कार्य पूरा: ढाई करोड़ की लागत से हुई मरम्मत, 10 जून से छोटे वाहनों का ट्रायल होगा – Gonda News


गोंडा-लखनऊ को जोड़ने वाले एक मात्र घाघरा संजय सेतु पुल का मरम्मत कार्य 52 दिनों में आज रविवार 7 जून को पूरा हो गया है राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने ढाई करोड़ रुपये की लागत से इस पुल की मरम्मत की है। मरम्मत के बाद पुल पर 3 दिन बाद यानी कि 10 जून से छोटे वाहनों का आवागमन ट्रायल बेस पर शुरू होगा। इस दौरान पुल की स्थिति का आकलन किया जाएगा लगभग 10 दिनों के अंदर ही बड़े वाहनों को भी पुल से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। यह निर्णय पुल पर अचानक अधिक भार पड़ने से रोकने के लिए लिया गया है, क्योंकि इसमें नई वायरिंग और अन्य संरचनात्मक बदलाव किए गए हैं। पुल के खुलने से गोंडा और लखनऊ के बीच यात्रा करने वाले लाखों लोगों को राहत मिलेगी। वर्तमान में, यात्रियों को अयोध्या होते हुए अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही थी और रोडवेज बसों का किराया भी बढ़ गया था। मरम्मत कार्य के दौरान पुल पर नई डामरीकरण सड़क बनाई गई है, पेंटिंग का काम किया गया है, लोहे की बाउंड्री वॉल की मरम्मत की गई है और साफ-सफाई व्यवस्था को भी दुरुस्त किया गया है। मरम्मत कार्य के दौरान आम जनता और यात्रियों को परेशानी न हो, इसके लिए शासन के निर्देश पर 6.18 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से एक वैकल्पिक पीपा पुल (पंटून ब्रिज) तैयार किया गया था। इस अस्थाई व्यवस्था से छोटे वाहनों और स्थानीय राहगीरों को तो बड़ी राहत मिली और उनका आवागमन जारी है। अब जल्द ही बड़े वाहनों को भी इस चक्कर से मुक्ति मिल जाएगी। इस संजय सेतु घाघरा पुल का इतिहास बेहद खास है 9 अप्रैल 1981 को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने इस पुल का लोकार्पण किया था। अब वर्ष 2026 में इस पुल के सफल संचालन के 45 वर्ष पूरे हो चुके हैं यह सेतु केवल गोंडा ही नहीं बल्कि पड़ोसी देश नेपाल जाने वाले यात्रियों के लिए भी सबसे महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इस संजय सेतु घाघरा पुल का इतिहास बेहद खास है 9 अप्रैल 1981 को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने इस पुल का लोकार्पण किया था। अब वर्ष 2026 में इस पुल के सफल संचालन के 45 वर्ष पूरे हो चुके हैं यह सेतु केवल गोंडा ही नहीं बल्कि लखनऊ,बाराबंकी, बहराइच,श्रावस्ती, अयोध्या, अंबेडकर नगर और भिनगा सहित पड़ोसी देश नेपाल जाने वाले यात्रियों के लिए भी सबसे महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। मरम्मत कार्य के दौरान आम जनता और यात्रियों को परेशानी न हो, इसके लिए शासन के निर्देश पर 6.18 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से एक वैकल्पिक पीपा पुल (पंटून ब्रिज) तैयार किया गया था। इस अस्थाई व्यवस्था से छोटे वाहनों और स्थानीय राहगीरों को तो बड़ी राहत मिली और उनका आवागमन जारी है। लेकिन भारी वाहनों को इस दौरान लंबा रूट डायवर्जन झेलना पड़ा और अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ी है अब जल्द ही बड़े वाहनों को भी इस चक्कर से मुक्ति मिल जाएगी।

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