सेना के जवान का पार्थिव शरीर पहुंचा कहलगांव: ऑक्सीजन की कमी के कारण बिगड़ी थी तबीयत, बहन रोते हुई बोली; लौट आओ भाई – Bhagalpur News h3>
भागलपुर के कहलगांव में सेना के जवान शिव शंकर का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा पैतृक गांव बरैनी पहुंचा। सेना की गाड़ी के आगे-पीछे हजारों लोगों की भीड़ थी, जो ‘भारत माता की जय’ और ‘शिव शंकर अमर रहे’ के नारे लगा रहे थे। पार्थिव शरीर जैसे ही अंतिम दर्शन के लिए गाड़ी से उतारा गया, मां रंजना देवी और पिता विनय कुमार रोने लगे। रोते-रोते मां बेहोश होकर गिर गईं। बहन कोलम रानी भी भाई के पार्थिव शरीर से लिपटकर रोने लगी। बार-बार कह रही थी शिव शंकर लौट जाओ। शिव शंकर की 3 साल पहले असम राइफल्स के नर्सिंग विभाग में जॉइनिंग हुई थी। जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात थे। ड्यूटी के दौरान ऑक्सीजन की कमी होने लगी, तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया, पर इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ कहलगांव गंगा घाट पर किया जाएगा। चचेरा भाई भी सेना में है शिव शंकर के चचेरे भाई सन्नी शंकर भी सेना में असम राइफल के नर्सिंग विभाग में कार्यरत हैं। वे त्रिपुरा के अगरतला में पोस्टेड हैं। सन्नी शंकर के पिता व्यास मुनि सिन्हा किसान हैं। वहीं सन्नी शंकर का भाई शिवम भी सेना में भर्ती के लिए तैयारी कर रहा है। शिवम ने अग्निवीर की परीक्षा पास किया था, लेकिन शारीरिक जांच में सेलेक्ट नहीं हुआ। शिवशंकर तीन साल पहले जब वर्दी पहनकर पहली बार गांव आए थे, तो पूरे बरैनी ने जश्न मनाया था। आज उसी वर्दी में वह तिरंगे में लिपटकर लौटे हैं। बचपन से ही मेधावी था शिव शंकर के बड़े पापा सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि शिव शंकर बचपन से ही मेधावी और मिलनसार था। देश सेवा का जज्बा लेकर वो सेना में भर्ती हुआ था। मेरा भाई विनय कुमार विकलांग है, जिस कारण शिव शंकर और उसकी बहन कोमल रानी दोनों को हम अपने पास कहलगांव रखते थे। मैं सरकारी शिक्षक था। जिस वजह से दोनों को पढ़ाया। शिव शंकर को भारतीय सेना में भेजना था, इसलिए सुबह-सुबह दौड़ने के लिए भेजते थे, जब वह नहीं जागता था तो मुंह पर पानी मार देते थे। जिससे शिव शंकर को गुस्सा आ जाता था, फिर समझाने पर मान जाता था। बायोलॉजी से पढ़ाई की थी हम चार भाई हैं, विनय कुमार दूसरे नंबर पर है। शिव शंकर उन्हीं का बेटा है। नौकरी के बाद शिव शंकर को हम लोगों ने शादी के लिए कहा था, लेकिन वह मना कर देता था। कहता था कि घर में अभी जो बड़े भाई हैं उनका पहले शादी हो जाने दें। बताया कि घर का अकेला कमाने वाला सदस्य था। पिता की उम्र लगभग 60 साल थी। मां हाउसवाइफ है, थोड़ी खेती की जमीन है। शिव शंकर ने आईएससी में बायोलॉजी लिया था। जिस वजह सेना में मेडिकल में नर्सिंग विभाग चुना गया।
बिहार की और खबर देखने के लिए यहाँ क्लिक करे – BiharNews