कौन हैं देवजी, गणपति और बेसरा, शाह के लिए चैलेंज: 76 जवानों का कत्ल, 7 करोड़ इनाम; हिड़मा सिपाही था, मास्टरमाइंड नक्सली अभी जिंदा h3>
‘हिड़मा एग्जीक्यूटर था, डिसीजन मेकर नहीं। वो नक्सलियों का एक बेहतरीन लड़ाका था। उसका एनकाउंटर एंटी-नक्सल ऑपरेशन की बड़ी कामयाबी है, लेकिन हम इस मूवमेंट के पीछे लग रहे दिमाग को खत्म करना चाहते हैं। अभी ऐसे 3 नाम हैं, जिनके सरेंडर या एनकाउंटर के बाद हम
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नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन खत्म होने के सवाल पर एंटी नक्सल ऑपरेशन की कोर टीम के एक अधिकारी ने ये जवाब दिया। दरअसल 18 नवंबर को 1 करोड़ के इनामी नक्सली लीडर माड़वी हिड़मा के एनकाउंटर को अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का ऑपरेशन पूरा हो गया।
इस पर बस्तर के IG पी सुंदरराज का कहना है कि अभी टारगेट और भी हैं। वे बताते हैं कि हिड़मा के बाद ऐसे ही 11-12 नाम और हैं। इनमें 3 बड़े नक्सली हैं। जिनके सरेंडर या एनकाउंटर के बाद ही नक्सलियों के मुख्य रणनीतिकार और डिसीजन मेकिंग बॉडी खत्म होगी।
इनमें थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी, मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति और मिशिर बेसरा उर्फ NEWS4SOCIALशामिल हैं। CM पर हमला, सांसद की हत्या और सैकड़ों जवानों की हत्या समेत ये कई बड़े हमलों के मास्टरमाइंड हैं। इन पर मिलाकर 7 करोड़ का इनाम है।
दैनिक NEWS4SOCIALने एंटी नक्सल ऑपरेशन की टीम में शामिल अफसर और बस्तर IG से बात करके समझने की कोशिश की कि आखिर अब सुरक्षाबलों का ऑपरेशन टारगेट से कितनी दूर है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
सबसे पहले उन 3 नक्सलियों के बारे में जानिए… जिनके सरेंडर या एनकाउंटर के बाद खत्म होगा एंटी नक्सल ऑपरेशन क्या 1 करोड़ के इनामी हिड़मा के एनकाउंटर के बाद नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन खत्म हो गया? इस पर ऑपरेशन की कोर टीम में शामिल एक अधिकारी ने बताया, ‘आंदोलन की रीढ़ तो टूट ही चुकी है। ये भी सच है कि हिड़मा इस रीढ़ का मजबूत हिस्सा था।‘
‘सैकड़ों की संख्या में नक्सलियों ने सरेंडर भी किया। इनमें कई ऐसे लड़ाके थे, जो राष्ट्रीय स्तर पर भले इतना बड़ा नाम न रहे हों, लेकिन अपने-अपने इलाके के बेहद खतरनाक नक्सली थे। इन सबका सरेंडर और हिड़मा, बसवाराजू जैसे लीडर्स के एनकाउंटर को मिलाकर ये बड़ी उपलब्धि हो जाती है।’
हिड़मा के बाद नक्सलियों में अब कौन से ऐसे चेहरे बचे हैं, जो बड़ा खतरा हों? इस पर जवाब मिला, ‘इंटेलिजेंस से मिली जानकारी के मुताबिक, नक्सलियों की टॉप ऑर्गनाइजेशन यानी पोलित ब्यूरो के 3 बड़े नाम अभी बाकी हैं।’
1. थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी उर्फ संजीव उर्फ देवन्ना, 2 करोड़ का इनाम
2. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति उर्फ रमन्ना उर्फ राजन्ना, 3.5 करोड़ का इनाम
3. मिशिर बेसरा उर्फ NEWS4SOCIALउर्फ सर्निमल उर्फ सुनील, 1.30 करोड़ का इनाम
इन तीनों ने कौन से बड़े हमले करवाए हैं। इस पर अधिकारी बताते हैं, ‘ये पोलित ब्यूरो के अधिकारी हैं। इनकी मंजूरी के बिना कोई हमला हो ही नहीं सकता। हमला कब और कहां होगा, रणनीति क्या होगी, हर स्तर पर इनकी मंजूरी ली जाती है। ये अलग-अलग हमलों में टारगेट तय करने से लेकर प्लानिंग तक मास्टरमाइंड रहे हैं।‘
अब तीनों इनामी नक्सली लीडर्स के काम के बारे में बात…
1. थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी, 2 करोड़ का इनाम देवजी, तेलंगाना के करीमनगर जिले में अंबेडकर नगर के दलित परिवार से है। आंध्र प्रदेश के नक्सली लीडर बसवाराजू के मई 2025 में हुए एनकाउंटर के बाद ये पोलित ब्यूरो का महासचिव बना। देवजी संगठन में लंबे समय तक पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी का मेंबर रहा। इसलिए अब तक हुए हर बड़े नक्सली हमले की स्ट्रैटजी में संगठन के जो 5 से 6 अधिकारी शामिल होते थे, उसमें देव जी का भी नाम शामिल है।
दंतेवाड़ा के ताड़मेटला और बीजापुर के रानीबोदली में हुए नक्सली हमलों की सलाह देने से लेकर रणनीति बनाने तक मास्टरमाइंड देवजी ही था। उस पर छत्तीसगढ़ सरकार और NIA ने 1-1 करोड़ का इनाम रखा है।
नींद में सो रहे जवानों को घेरकर मारा, देवजी ने बनाई स्ट्रैटजी घटना 15 मार्च 2007 की है। बीजापुर के रानीबोदली गांव में होली के तीन दिन बाद नक्सलियों ने CRPF कैंप पर हमला किया। रात करीब 12 से 12.30 बजे के बीच की बात है। कैंप में 55 जवान गहरी नींद में सोए हुए थे। तभी नक्सलियों की 3 टोलियों ने कैंप को घेर लिया।
करीब 4 घंटे तक ताबड़तोड़ गोलियां और बम चलाए। सुबह 4 बजे के करीब जब गांव के लोग कैंप पहुंचे तो सभी 55 जवानों के शव जले हुए मिले। इससे पहले कभी इतना बड़ा नक्सली हमला नहीं हुआ था। इसे एग्जीक्यूट एक महिला कमांडर ने किया था, लेकिन इसका मास्टरमाइंड तिरुपति उर्फ देवजी था।
ऑफिशियल सोर्स के मुताबिक, सरकार और प्रशासन को दहलाने के लिए इस हमले के आइडिया से लेकर स्ट्रैटजी तक सबके पीछे देवजी का दिमाग था। ये घटना सलवा जुडूम का भी जवाब थी। वही सलवा जुडूम, जिसमें प्रशासन ने आदिवासियों को नक्सलियों के खिलाफ खड़ा कर दिया था। स्पेशल पुलिस अफसर (SPO) के रूप में आदिवासी नियुक्त किए गए थे, ताकि वो फोर्स के लिए खबरी भी बनें और नक्सलियों को जवाब भी दें।
बीजापुर के रानीबोदली गांव में ही 2007 में नक्सली हमले में शहीद हुए 55 जवानों की याद में स्मारक बनाया गया है।
ताड़मेटला में गश्त से लौट रहे जवानों पर हमले की प्लानिंग की 6 अप्रैल 2010 की घटना है। दंतेवाड़ा के ताड़मेटला में 150 जवान रूटीन गश्त से लौट रहे थे। वहीं जंगलों में घात लगाए एक हजार नक्सली हमले के लिए तैयार थे। नक्सलियों ने घातक एंबुश लगाए थे। जवानों के वहां पहुंचते ही जोरदार धमाका हुआ। कई जवान तो एंबुश में फंसकर शहीद हो गए। जवानों और नक्सलियों के बीच कई घंटे मुठभेड़ चली।
जब बैकअप टीम घटनास्थल पहुंची, तब पता चला कि 76 जवान हमले में शहीद हो चुके हैं। इस हमले की सलाह से लेकर रणनीति बनाने तक का काम देवजी ने ही किया था। इस प्लान को एग्जीक्यूट हिड़मा ने किया था।
2. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति, 3.6 करोड़ का इनाम गणपति भाकपा (माओवादी) का पूर्व महासचिव था। 1992 में वो पीपुल्स वॉर ग्रुप (PWG) का महासचिव बना और 2004 में CPI (माओवादी) बनने के बाद 2018 तक इसकी कमान संभाली। पोलित ब्यूरो मेंबर और सेंट्रल कमेटी में एडवाइजर है। 1992 से लेकर 2018 तक जितने नक्सली हमले हुए, सब इसी के नेतृत्व में हुए।
गणपति पर छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सरकार ने 1-1 करोड़ का इनाम रखा है। जबकि आंध्र ने 25 लाख, झारखंड ने 12 लाख और NIA ने 15 लाख का इनाम रखा है। ओडिशा, प. बंगाल और तेलंगाना ने भी गणपति पर इनाम की घोषणा कर रखी है।
2003 में आंध्र प्रदेश के CM रहे चंद्रबाबू नायडू पर हमले का आइडिया और स्ट्रैटजी दोनों गणपति की थी। नक्सलियों के संगठन में मौजूद हमारे सोर्स के मुताबिक, नायडू पर हमले का आइडिया पोलित ब्यूरो के कई मेंबर्स को जोखिम भरा लगा था। कई लोग इसके सपोर्ट में भी नहीं थे। हालांकि गणपति इससे पीछे हटने को राजी नहीं हुआ। नायडू पर हमले ने केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक को बड़ा झटका दिया था।
ये सिर्फ अकेली घटना नहीं है, जो गणपति के नेतृत्व में अंजाम दी गई हो। ऐसी 10 बड़ी घटनाएं हैं, गणपति जिनका मास्टरमाइंड रहा।
3. मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर, 1.30 करोड़ का इनाम बेसरा झारखंड के गिरिडीह जिले के मदनडीह गांव का रहने वाला है। वो पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी का मेंबर है। इसके अलावा ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो मिलिट्री का इंचार्ज और प्रवक्ता है। मिशिर बेसरा ने कई बड़े हमलों के आइडिया से लेकर प्लानिंग और एग्जीक्यूशन में मुख्य भूमिका निभाई।
एंबुश लगाने में माहिर: पहले एंटी नक्सल टीम का हिस्सा रहे एक अधिकारी ने बताया, ‘बेसरा का सबसे बड़ा काम लेवी वसूलना है। इसके पकड़े गए साथियों ने बताया कि संगठन के लिए बेसरा सबसे ज्यादा पैसा इकट्ठा करता है। टीम को बढ़ाने के लिए वो अपने इलाके के सबसे अच्छे लड़ाकों को रिक्रूट करता है। एक लीडर की तरह हमले की रणनीति बनाता है और खुद भी लड़ता है।
अधिकारी आगे बताते हैं, ‘वो लड़ाकों को ट्रेंड करने के लिए पूरे देश में जाता है। बेसरा के जैसा एंबुश संगठन में कुछ ही लोग लगा पाते हैं। यही वजह है कि उसे पकड़ने के लिए मेरे वक्त तक (2023 तक) करीब 8 टीमें तैनात की गई थीं। अब तो और भी टीमें बन गई हैं।’
‘बेसरा लड़ाकों का घेरा बनाने, एंबुश लगाने और बंकर बनाने में माहिर है। उसका काम हमले की रणनीति बनाना और एग्जीक्यूट होने तक उसकी निगरानी करना है। वो अपने इलाके में नई भर्तियां भी करता है। 1990 से नक्सली गतिविधियों में एक्टिव है। उसे कोल्हान-सारंडा जंगलों में किए गए कई हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है।’
बेसरा की टीम में 1 करोड़ के इनामी: अधिकारी के मुताबिक, उसकी टीम में अनिल दा (पतिराम मांझी), असीम मंडल और अजय महतो जैसे 1-1 करोड़ के इनामी नक्सली हैं। बेसरा पर NIA और केंद्र ने 50 लाख का इनाम रखा है। वहीं झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल ने 20-20 लाख का इनाम रखा है। कुल मिलाकर अभी उस पर 1.30 करोड़ का इनाम है।
बेसरा पर कई हमले करने और कराने के आरोप हैं। ये हमले झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में किए गए। बेसरा की गतिविधियां इन राज्यों में ही थीं। वह अपने इलाके के सभी हमलों में रणनीतिकार के तौर पर शामिल रहता है।
अक्टूबर 2002 में चाईबासा के बिटिकल सोय गांव में बेसरा ने एंबुश लगाकर पुलिस टीम पर हमला किया था, जिसमें 55 पुलिसकर्मी मारे गए थे। नक्सलियों ने इन सबके हथियार लूट लिए थे। इसके बाद मार्च 2004 में झारखंड के बालिबा में एंबुश लगाकर फिर सुरक्षाबलों को निशाना बनाया था। इसमें 25 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।
बेसरा को पकड़ने के लिए ऑपरेशन प्रहार बेसरा को पकड़ने के लिए सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन प्रहार चला रखा है। इसी के तहत एक साल में अब तक उसकी टीम के 12 लोगों का सरेंडर कराया गया है।
अब जानिए… थ्री-लेयर सिक्योरिटी में रहने वाले नक्सली हिड़मा के एनकाउंटर के बारे में हिड़मा पिछले 2 दशक में हुए 26 से ज्यादा बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड रहा है। इनमें 2010 का दंतेवाड़ा हमला भी शामिल है, जिसमें 76 CRPF जवान शहीद हुए थे। इसके अलावा 2013 में झीरम घाटी हमला और 2021 सुकमा-बीजापुर हमले में भी हिड़मा की भूमिका रही है।
नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में शामिल एक सोर्स ने उसके एनकाउंटर के पीछे की कहानी बताई थी। सोर्स ने बताया, ‘नक्सली माड़वी हिड़मा और उसके बॉडीगार्ड बारसे देवा के आत्मसमर्पण के लिए 10 नवंबर को छत्तीसगढ़ के डिप्टी CM और गृह मंत्री विजय शर्मा ने आखिरी कोशिश की थी। डिप्टी CM रायपुर से करीब 550 किलोमीटर का सफर तय कर सुकमा जिले के उस गांव पहुंचे थे, जहां हिड़मा और देवा की मां रहती हैं।’
‘विजय शर्मा की सलाह पर दोनों की मांओं ने एक वीडियो के जरिए आत्मसमर्पण की अपील भी की, लेकिन 3-4 दिन बाद छत्तीसगढ़ नक्सल ऑपरेशन की टीम को मुखबिरों से पता चला कि हिड़मा ने मां की गुहार नकार दी है। जाहिर था अगर हिड़मा सरेंडर नहीं करेगा तो उसका सबसे करीबी और बॉडीगार्ड देवा भी नहीं करेगा।’
इन सबके बाद ये तय हो गया कि हिड़मा के आतंक को खत्म करने का एनकाउंटर ही एक रास्ता है। इन सबके 8 दिन बाद 18 नवंबर की सुबह माड़वी हिड़मा को छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश बॉर्डर पर मारेडुमिल्ली जंगल में एनकाउंटर के दौरान मार गिराया गया। उसकी पत्नी मडकम राजे उर्फ रजक्का और 4 अन्य नक्सलियों को भी ढेर कर दिया गया। …………………..
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थ्री-लेयर सिक्योरिटी में रहने वाला नक्सली हिड़मा कैसे फंसा
नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में शामिल एक सोर्स ने बताया- उसके बाद ये तय हो गया कि हिड़मा के आतंक को खत्म करने का एनकाउंटर ही एक रास्ता है। इन सबके 8 दिन बाद 18 नवंबर की सुबह माड़वी हिड़मा को छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश बॉर्डर पर मारेडुमिल्ली जंगल में एनकाउंटर के दौरान मार गिराया गया। उसकी पत्नी मडकम राजे उर्फ रजक्का और 4 अन्य नक्सलियों को भी ढेर कर दिया गया। पढ़िए पूरी खबर,,,



