Bihar: मोम फैक्ट्री में पुलिस पर हुए मामले में 33 साल बाद आया फैसला, पूर्व सांसद और भाजपा नेता को सजा h3>
बेगूसराय जिले की अदालत ने 33 साल पुराने पुलिस टीम पर हमला और गोलीबारी के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने भाजपा नेता रामलखन सिंह, पूर्व सांसद सूरजभान सिंह उर्फ सूरज सिंह और एक अन्य आरोपी को दोषी करार दिया। मंगलवार को स्पेशल न्यायाधीश (एमपी/एमएलए) संजय कुमार ने इस मामले में सजा सुनाई। लोक अभियोजक संतोष कुमार ने बताया कि न्यायाधीश ने रामलखन सिंह और वीरेंद्र ईश्वर को 4-4 साल और सूरज सिंह उर्फ सूरजभान सिंह को एक साल की सजा और एक हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। रामलखन सिंह और वीरेंद्र ईश्वर को आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-बी) ए में 4 साल और 5 हजार रुपए का जुर्माना, धारा 26 में 3 साल और 3 हजार रुपए का जुर्माना, धारा 27 में 3 साल और 3 हजार रुपए का जुर्माना, आईपीसी की धारा 307 में 4 साल और 5 हजार रुपए का जुर्माना, और धारा 353 में एक साल और एक हजार रुपए का अर्थदंड सुनाया गया।
पूर्व सांसद सूरजभान सिंह को केवल आईपीसी की धारा 353 में दोषी पाया गया और उन्हें एक साल की सजा और एक हजार रुपए का अर्थदंड दिया गया। सूरजभान सिंह के अधिवक्ता की ओर से जमानत आवेदन दाखिल किए जाने के बाद न्यायाधीश ने 25 हजार रुपए के दो मुचलकों पर उन्हें जमानत दे दी। वहीं, रामलखन सिंह और वीरेंद्र ईश्वर को न्यायिक कस्टडी में लेते हुए जेल भेज दिया गया।
जानकारी के अनुसार, इस मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी समेत 12 गवाहों ने अदालत में गवाही दी थी। 9 अक्टूबर 1992 को एएसआई उमाशंकर सिंह ने एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर में बताया गया कि बरौनी थाना क्षेत्र की मोम फैक्ट्री में रामलखन सिंह समेत कई हथियारबंद अपराधी जुटे हुए थे। पुलिस को गुप्त सूचना मिलने पर छापेमारी की गई, तो बदमाशों ने पुलिस टीम पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस ने मौके पर ही रामलखन सिंह और वीरेंद्र ईश्वर को गिरफ्तार कर लिया और रेगुलर रायफल, लोडेड पिस्टल और अन्य हथियार बरामद किए।
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फैसला आने के बाद जिले में इस केस की चर्चा जोर पकड़ गई है। सोशल मीडिया पर भी लोग अदालत के फैसले पर अपनी राय और टिप्पणी कर रहे हैं। चर्चा में यह बात सामने आई कि भाजपा के स्वर्ण काल में भी पार्टी के नेता को अदालत द्वारा सजा सुनाई गई है। अलग-अलग पक्षों से विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोग इसे अदालत की निष्पक्ष कार्रवाई मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे दुर्भाग्यपूर्ण बता रहे हैं। उनका तर्क है कि भाजपा के शुरुआती दौर में रामलखन सिंह ने पार्टी को बेगूसराय में खड़ा करने के लिए मेहनत की थी और अब पार्टी के स्वर्ण काल में उन्हें जेल मिली है।




