सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से एक दिन पहले मचा बवाल: 95 हजार वर्ग फीट जमीन का है विवाद; उद्यमी के पक्ष में हुआ है फ्री होल्ड – Gorakhpur News h3>
पूर्व विधायक स्व. केदार सिंह का आवास खाली कराने और प्रतिमा हटाने का आरोप लगाते हुए सैंथवार समाज के लोगों ने सोमवार को प्रदर्शन किया। फाइल फोटो
गोरखपुर में सोमवार को सैंथवार मल्ल सभा ने जोरदार प्रदर्शन किया। वे पूर्व विधायक स्व. केदार सिंह के आवास को खाली कराने का विरोध कर रहे थे। उनका आरोप है कि स्व. केदार सिंह की प्रतिमा भी हटाने की तैयारी चल रही है। विरोध करने वालों में सपा के कई नेता भी
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सभा के पदाधिकारियों ने कहा कि पुलिस-प्रशासन की मदद से यह भूमि रजिस्ट्री करा ली गई और अब स्व. केदार सिंह के परिवार से इसे खाली कराया जा रहा है। यह प्रदर्शन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अवमानना पर सुनवाई से ठीक एक दिन पहले हुआ है। इस विरोध के बाद दैनिक NEWS4SOCIALने इस पूरे मामले की पड़ताल की। पड़ताल में यह तथ्य निकलकर आया कि पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। कोर्ट ने फरवरी 2024 में आदेश दिया था कि स्व. केदार सिंह का परिवार आवास व जमीन खाली कर दे। लेकिन उनकी मांग पर जगह खाली करने के लिए 1 साल का समय दिया गया। यह समय सीमा फरवरी 2025 में पूरी हो चुकी है। अब कोर्ट के आदेश के मुताबिक उद्यमी ने आवास खाली करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्व. केदार सिंह के परिवार को आवास खाली करने का आदेश दिया गया है। फाइल फोटो
पहले जानिए क्या है मामला व्यावसायिक दृष्टि से शहर के महत्वपूर्ण स्थान यानी सिविल लाइन में सिटी माल के पास यह नजूल की जमीन है। शहर के उद्यमी ओमप्रकाश जालान ने 2002 में इसे फ्री होल्ड कराया था। 95 हजार वर्ग फीट इस जमीन की रजिस्ट्री भी करा ली गई। उसी के एक हिस्से में पूर्व विधायक केदारनाथ सिंह भी रहते थे। शुरू में बातचीत से जमीन खाली कराने की कोशिशें हुईं लेकिन कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद सिविल कोर्ट से होता हुआ यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। वहां से स्व. केदार सिंह के परिवार को जमीन खाली कराने को कहा गया। स्व. केदार सिंह सैँथवार समाज के बड़े नेता थे इसलिए इस मामले में सैंथवार मल्ल सभा शामिल हो गई है। आज सुप्रीम कोर्ट में अवमानना पर सुनवाई होगी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अवमानना की सुनवाई होगी। कोर्ट ने फरवरी 2024 में स्व. केदार सिंह के परिवार को जगह खाली करने का आदेश दिया था। इसके लिए एक साल का समय दिया गया था। साथ ही स्व. केदार सिंह के पक्ष के लोगों से खाली करने का शपथ पत्र मांगा गया था। उद्यमी की ओर से जमीन खाली न करने को लेकर कोर्ट में अवमानना दाखिल की गई है। उसी मामले में मंगलवार को सुनवाई है। कुछ महत्वपूर्ण फैसला आ सकता है।
सैंथवार-मल्ल सभा के पदाधिकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन जारी रहेगा। फाइल फोटो
अब जानिए प्रशासन पर लग रहे आरोप कितने सही हैं सैंथवार मल्ल सभा के पदाधिकारियों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन की मदद से स्व. केदार सिंह का घर खाली कराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने उनकी प्रतिमा हटवाने के प्रयास का आरोप भी लगाया। मौके पर मजिस्ट्रेट व पुलिस की मौजूदगी थी और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारे भी खूब लगाए गए। लेकिन पड़ताल में यह बात सामतने आयी है कि प्रशासन या पुलिस की ओर से कोई अधिकारी जमीन खाली कराने नहीं गया था। प्रशासन का कहना है कि लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति थी, इसलिए वहां सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया था। अब जानिए पूर्व विधायक का परिवार क्या कहता है पूर्व विधायक स्व. केदारनाथ सिंह के पुत्र राकेश का कहना है कि पार्क रोड स्थित इस जमीन पर उनका परिवार रहता है। यह नजूल की भूमि है। वर्ष 1986-87 में 99 साल की लीज पर उनके पिता को आवंटित की गई थी। तभी से उनका परिवार यहां रहता है। उनका आरोप है कि उद्यमी गलत प्रपत्रों के सहारे जमीन लेना चाहते हैं। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फरवरी 2025 में उन लोगों ने मकान खाली कर दिया। उनका कहना है कि उनका मकान 15 हजार वर्ग फीट में है। 80 हजार वर्ग फीट में आधा दर्जन से अधिक अन्य परिवार रहते हैं। वहीं स्व. केदारनाथ सिंह की प्रतिमा भी है। अब जानिए उद्यमी की बात उद्यमी ओम प्रकाश जालान का कहना है कि प्रक्रिया पूरी करने के बाद 2002 में उन्होंने नजूल की 95 हजार वर्ग फीट जमीन फ्री होल्ड कराई थी। उस जमीन की रजिस्ट्री भी हो गई। वहां आधे पर पूर्व विधायक का परिवार रहता था शेष पर प्रोफेसर सहाय का परिवार रहता था। रजिस्ट्री के बाद ही सहाय के परिवार ने जगह खाली कर दी। लेकिन पूर्व विधायक का परिवार वहीं रहा। उन्होंने भी आश्वासन दिया था लेकिन 6 साल तक भ्रमित करते रहे। इसके बाद कोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
सुप्रीम कोर्ट से फरवरी 2024 में पक्ष में फैसला आया। उनकी ओर से अपील की गई तो सुप्रीम कोर्ट ने जमीन खाली करने के लिए एक साल का समय दे दिया। साथ ही जमीन खाली करने के बाद पूर्व विधायक के चारो पुत्रों को शपथ पत्र देने को कहा गया। लेकिन एक बेटे ने ही ऐसा किया है। इसी के बाद अवमानना का वाद दाखिल किया गया है। यह रही प्रशासन की बात डीएम दीपक मीणा का कहना है कि यह दो पक्षों के बीच का मामला है। इसमें प्रशासन का कोई लेना देना नहीं है। वहां प्रदर्शन की सूचना पर मजिस्ट्रेट व पुलिस के जवान पहुंचे थे। आवास या जमीन खाली कराने से प्रशासन का कोई मतलब नहीं है। लेकिन किसी भी दशा में किसी को कानून व्यवस्था से खिलवाड़ की इजाजत नहीं दी जाएगी। अब जानिए कौन हैं स्व. केदारनाथ सिंह स्व. केदारनाथ सिंह दो बार विधायक रहे हैं। सैंथवार समाज को ओबीसी का आरक्षण दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका भी। सैंथवार समाज में उनकी अच्छी पकड़ थी। 13 दिसंबर 2012 को उनका निधन हो गया। उनकी स्मृति में एक साल बाद ही इसी जमीन पर उनकी प्रतिमा स्थापित की गई।



