ट्रांसफर के नाम पर 10 हजार रिश्वत लेने का आरोप: सफाईकर्मी अध्यक्ष दिनेश गौतम फिर विवादों में, पहले हुए थे निलंबित – Balrampur News h3>
पवन तिवारी | बलरामपुर22 मिनट पहले
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बलरामपुर के गैसड़ी ब्लॉक के सफाई कर्मी ब्लॉक अध्यक्ष दिनेश गौतम एक बार फिर गंभीर आरोपों में घिर गए हैं। महाराजगंज तराई में तैनात सफाई कर्मी बाल गोविंद ने उन पर ट्रांसफर के नाम पर 10 हजार रिश्वत लेने का आरोप लगाया है।
बाल गोविंद का कहना है कि यह रकम करीब छह महीने पहले ली गई थी। लेकिन अब तक न तो ट्रांसफर हुआ और न ही पूरी रकम वापस मिली। आरोप है कि दिनेश गौतम ने केवल 2,500 लौटाए, जबकि 7,500 अब भी अपने पास रखे हुए हैं। इस संबंध में एक वीडियो भी सामने आया है। जिससे मामला और तूल पकड़ गया है।
रिश्वतखोरी के आरोप में हुए थे निलंबित
यह वही दिनेश गौतम हैं, जो बीते दिनों एक ऑडियो वायरल होने के बाद निलंबित किए गए थे। उस ऑडियो में वह वेतन निकलवाने के नाम पर 2,000 रिश्वत मांगते सुने गए थे। विभाग ने 19 जुलाई को कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर जांच शुरू की थी। हालांकि, अभी तक बहाली नहीं हुई थी, और अब ताजा मामले ने उनके विवादित छवि को और मजबूत कर दिया है।
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कई सफाई कर्मियों ने लगाए आरोप
सफाई कर्मियों ने बताया कि दिनेश गौतम लंबे समय से काम कराने, ट्रांसफर कराने और अन्य लाभ दिलाने के नाम पर रिश्वत लेते रहे हैं। आरोप है कि वह ब्लॉक अध्यक्ष के पद का दुरुपयोग करते हुए अपने प्रभाव से अधिकारियों तक पहुंच बनाते हैं। इस प्रक्रिया में कर्मचारियों से मोटी रकम वसूलते हैं।
बाल गोविंद के अनुसार, जब उनकी तैनाती गैसड़ी में थी, उसी समय दिनेश गौतम ने उनसे 10 हजार लिए थे। इसके बाद उन्हें महाराजगंज तराई भेज दिया गया, लेकिन पैसे वापस नहीं किए गए। अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो इसी आरोप की पुष्टि करता है।
क्या मिलीभगत से हो रहा खेल
इस घटना ने विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। निलंबित होने के बावजूद अगर कोई कर्मचारी रिश्वत का खेल जारी रखता है, तो यह संकेत है कि कहीं न कहीं अधिकारियों की मिलीभगत है। यह भी जांच का विषय है कि दिनेश गौतम के साथ किन-किन लोगों का हाथ है, जो इस तरह के भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहे हैं।
पूरा मामला सामने आने के बाद डीपीआरओ श्रेया उपाध्याय से संपर्क करने का प्रयास किया। दो बार फोन करने के बावजूद उनका जवाब नहीं मिला। वहीं, एडीओ पंचायत हरैया सतघरवा ने बताया कि पहले मामले की जांच अभी जारी है। नए मामले में वायरल वीडियो उन्होंने भी देखा है, जो किसी वॉट्सऐप ग्रुप में साझा किया गया था।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और सफाई कर्मियों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। बार-बार विवादों में घिरने वाले कर्मचारियों को केवल निलंबित कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी संलिप्तता की पूरी जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर सेवा से बर्खास्त किया जाना चाहिए। दिनेश गौतम का नाम पिछले कुछ समय से लगातार विवादों में बना हुआ है।
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पवन तिवारी | बलरामपुर22 मिनट पहले
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बलरामपुर के गैसड़ी ब्लॉक के सफाई कर्मी ब्लॉक अध्यक्ष दिनेश गौतम एक बार फिर गंभीर आरोपों में घिर गए हैं। महाराजगंज तराई में तैनात सफाई कर्मी बाल गोविंद ने उन पर ट्रांसफर के नाम पर 10 हजार रिश्वत लेने का आरोप लगाया है।
बाल गोविंद का कहना है कि यह रकम करीब छह महीने पहले ली गई थी। लेकिन अब तक न तो ट्रांसफर हुआ और न ही पूरी रकम वापस मिली। आरोप है कि दिनेश गौतम ने केवल 2,500 लौटाए, जबकि 7,500 अब भी अपने पास रखे हुए हैं। इस संबंध में एक वीडियो भी सामने आया है। जिससे मामला और तूल पकड़ गया है।
रिश्वतखोरी के आरोप में हुए थे निलंबित
यह वही दिनेश गौतम हैं, जो बीते दिनों एक ऑडियो वायरल होने के बाद निलंबित किए गए थे। उस ऑडियो में वह वेतन निकलवाने के नाम पर 2,000 रिश्वत मांगते सुने गए थे। विभाग ने 19 जुलाई को कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर जांच शुरू की थी। हालांकि, अभी तक बहाली नहीं हुई थी, और अब ताजा मामले ने उनके विवादित छवि को और मजबूत कर दिया है।
कई सफाई कर्मियों ने लगाए आरोप
सफाई कर्मियों ने बताया कि दिनेश गौतम लंबे समय से काम कराने, ट्रांसफर कराने और अन्य लाभ दिलाने के नाम पर रिश्वत लेते रहे हैं। आरोप है कि वह ब्लॉक अध्यक्ष के पद का दुरुपयोग करते हुए अपने प्रभाव से अधिकारियों तक पहुंच बनाते हैं। इस प्रक्रिया में कर्मचारियों से मोटी रकम वसूलते हैं।
बाल गोविंद के अनुसार, जब उनकी तैनाती गैसड़ी में थी, उसी समय दिनेश गौतम ने उनसे 10 हजार लिए थे। इसके बाद उन्हें महाराजगंज तराई भेज दिया गया, लेकिन पैसे वापस नहीं किए गए। अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो इसी आरोप की पुष्टि करता है।
क्या मिलीभगत से हो रहा खेल
इस घटना ने विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। निलंबित होने के बावजूद अगर कोई कर्मचारी रिश्वत का खेल जारी रखता है, तो यह संकेत है कि कहीं न कहीं अधिकारियों की मिलीभगत है। यह भी जांच का विषय है कि दिनेश गौतम के साथ किन-किन लोगों का हाथ है, जो इस तरह के भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहे हैं।
पूरा मामला सामने आने के बाद डीपीआरओ श्रेया उपाध्याय से संपर्क करने का प्रयास किया। दो बार फोन करने के बावजूद उनका जवाब नहीं मिला। वहीं, एडीओ पंचायत हरैया सतघरवा ने बताया कि पहले मामले की जांच अभी जारी है। नए मामले में वायरल वीडियो उन्होंने भी देखा है, जो किसी वॉट्सऐप ग्रुप में साझा किया गया था।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और सफाई कर्मियों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। बार-बार विवादों में घिरने वाले कर्मचारियों को केवल निलंबित कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी संलिप्तता की पूरी जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर सेवा से बर्खास्त किया जाना चाहिए। दिनेश गौतम का नाम पिछले कुछ समय से लगातार विवादों में बना हुआ है।



