सहकारी बैंकों की सेवाओं का होगा विस्तार: राजस्थान में 12 हजार नए खाते खुले, 305 करोड़ जमा; 1872 डेयरी समितियों को मिले बैंक मित्र – Jaipur News h3>
नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित हुई।
राजस्थान में सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। गुरुवार को सहकारिता राज्य मंत्री गौतम कुमार दक ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में यह जानकारी
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राज्य में ‘म्हारो बैंक, म्हारो खातो’ कार्यक्रम के तहत सहकारी बैंकों में डेयरी समितियों के खाते खोले जा रहे हैं। शीर्ष बैंक और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में 12,241 नए खाते खुल चुके हैं। इन खातों में 305 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। साथ ही 1,872 डेयरी समितियों को बैंक मित्र नियुक्त किया गया है। इन्हें निःशुल्क माइक्रो एटीएम दिए जाएंगे।
प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में बहुउद्देशीय ग्राम सेवा सहकारी समिति का गठन किया जा रहा है। गुजरात में खुलने वाले सहकारिता क्षेत्र के पहले त्रिभुवन विश्वविद्यालय का लाभ राजस्थान को भी मिलेगा। राजस्थान सहकारी शिक्षा एवं प्रबंध संस्थान (राइसेम) इससे जुड़ेगा। इससे राज्य में सहकारिता क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा मिल सकेगी।
राज्य में अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष-2025 के तहत विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। उदयपुर से सहकारी क्षेत्र की पहली ‘को-ऑप राइड बाइक ऑन रेंट सेवा’ की शुरुआत की गई है। सहकार से समृद्धि की पहलों को लागू करने में राजस्थान अग्रणी राज्य बन कर उभरा है।
सहकारिता राज्य मंत्री गौतम कुमार दक ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में यह जानकारी दी।
पहली बार जोधपुर, कोटा एवं उदयपुर में संभाग स्तर पर सहकार मेलों का आयोजन किया जाएगा
इस साल पहली बार जोधपुर, कोटा एवं उदयपुर में संभाग स्तर पर सहकार मेलों का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य में पैक्स कम्प्यूटराइजेशन का कार्य तीव्र गति से चल रहा है। अब तक 5,335 से अधिक पैक्स को गो-लाइव किया जा चुका है। प्रत्येक पंचायत में बहुउद्देशीय पैक्स/ डेयरी/ मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना की दिशा में कार्य करते हुए अब तक लगभग 2,700 नई सहकारी समितियां गठित की जा चुकी हैं। साथ ही, निष्क्रिय सहकारी समितियों के अवसायन की दिशा में भी तीव्र गति से कार्य किया जा रहा है।



