National Girl Child Day : बिहार में बच्ची का जन्म इतना फायदेमंद! जानें, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना का लाभ h3>
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इस सदी की शुरुआत में ऐसी तस्वीरें शायद ही दिखती थीं, आज बिहार में लड़कियां पढ़ने के लिए निकल रहीं। – फोटो : NEWS4SOCIALडिजिटल
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विस्तार
बालिकाओं को महत्व देने वाले सकारात्मक वातावरण के निर्माण को लक्ष्य करते हुए वर्ष 2008 से हर साल 24 जनवरी को भारत में राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। इस समय ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ का नारा खूब गूंजता है। आज वही दिन है। इस दिन अगर बिहार की बात करें तो उत्तरोत्तर बदलाव दिखाने में यह राज्य किसी से पीछे नहीं है। कभी यहां लड़कियों को पढ़ाना बड़ी बात होती थी, आज जरूरी बात है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की लड़कियों के लिए बिहार में ‘मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना’ वास्तविक रूप से किस हद तक काम कर रही है, यह किसी भी कार्यदिवस की सुबह सड़क से विद्यालय तक दिख जाता है। स्कूल ड्रेस में साइकिल से विद्यालय जाती लड़कियां इस योजना की सफलता का प्रमाण लिए नजर आती हैं, क्योंकि इस सदी की शुरुआत में भी बिहार के अंदर ऐसी तस्वीर नजर नहीं आती थी।
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जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक मदद
‘मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना’ ने बिहार में महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा काम किया है। इस योजना के बारे में जितनी जानकारी गांव-गांव तक है, उसकी बड़ी वजह इसका सीधा लाभ मिलना है। कन्या भ्रूण हत्या को रोकने, बालिकाओं के जन्म एवं निबंधन को प्रोत्साहित करने, बच्चियों के संपूर्ण टीकाकरण, लिंग अनुपात में वृद्धि, बालिका शिशु मृत्यु दर में कमी लाने, बालिका शिक्षा को बढ़ाने, बाल विवाह पर अंकुश लगाने, प्रजनन दर को घटाने तथा लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से ‘मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना’ शुरू की गई थी। बिहार में बालिकाओं को सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए जिन योजनाओं पर राज्य की नीतीश कुमार सरकार का सबसे ज्यादा फोकस है, उसमें ‘मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना’ सबसे आगे है। बच्ची के जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक में आर्थिक मदद देने के कारण यह योजना आज घर-घर तक पहुंच रही है। लोग मानते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में महिलाओं के उत्थान एवं सशक्तीकरण की दिशा में किए गए कार्यों का ही परिणाम है कि बिहार की बेटियां हर स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं से लेकर खेल एवं अन्य सभी क्षेत्रों में अपना परचम लहरा रही हैं। महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति में काफी सुधार आया है।
जन्म से कैसे मिलने लगता है योजना का लाभ?
‘मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना’ बिहार सरकार की एक अनूठी पहल है। इसके जरिए आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की लड़कियों को उनकी शिक्षा में सहायता की जाती है, ताकि वह अपने पैरों पर खड़ी हो सकें, आत्मनिर्भर बन सकें। यह योजना लड़कियों को जन्म से लेकर स्नातक की पढ़ाई पूरी करने तक वित्तीय सहायता प्रदान करती है। योजना का लाभ बच्ची को उसके जन्म के साथ मिलना शुरू हो जाता है। बच्ची के जन्म लेने की जानकारी पर राज्य सरकार दो हजार रुपये परिजन के बैंक खाता में तत्काल भुगतान करती है, ताकि उसकी प्राथमिक जरूरतें पूरी हो सकें। जन्म के एक साल बाद आधार से लिंक करने पर एक हजार रुपये एवं दो साल के अंदर संपूर्ण टीकाकरण हो जाने पर राज्य सरकार की ओर से दो हजार रुपये की आर्थिक मदद पुनः बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। इस प्रकार बेटी के जन्म से दो वर्ष पूरा करने तक सरकार 5 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान करती है। यह उसकी परवरिश के मद में है, लेकिन इससे बच्ची के जन्म को लेकर सोच में भी बदलाव दिखा है।
पोशाक के साथ स्त्री जरूरतों के लिए भुगतान
‘मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना’ अंतर्गत संचालित मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना के माध्यम से पहली और दूसरी कक्षा की छात्राओं को पोशाक के लिए 600 रुपये, तीसरी से पांचवीं कक्षा की छात्राओं को 700 रुपये, छठी से आठवीं कक्षा की छात्राओं को 1000 रुपये और नौवीं से बारहवीं कक्षा की छात्राओं को 1500 रुपये प्रतिवर्ष दिया जाता है। हर साल नई ड्रेस लेने के लिए यह राशि बैंक में जाती है। इसके अलावा ‘किशोरी स्वास्थ्य योजना’ के तहत आठवीं कक्षा से छात्राओं को सेनेट्री पैड के लिए प्रतिवर्ष 300 रुपये का भुगतान किया जाता है।
पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहन के लिए बहुत कुछ है
बिहार की बेटियां आर्थिक संकट के कारण पिछड़ें नहीं, इसे ध्यान में रखते हुए विभिन्न चरणों में उन्हें सशक्त बनाने, उनकी भलाई और भविष्य के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन राशि दी जाती है। मुख्यमंत्री बालिका (माध्यमिक+2) प्रोत्साहन योजना के माध्यम से बिहार बोर्ड से उत्तीर्ण सभी अविवाहित छात्राओं को राज्य सरकार आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मुहैया कराती है। मेधासॉफ्ट पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन लेकर छात्रवृत्ति की यह राशि लाभुक छात्राओं के बैंक खाते में भेज दी जाती है। इससे आगे, मुख्यमंत्री बालिका (स्नातक) प्रोत्साहन योजना की बारी आती है। अप्रैल 2021 के बाद स्नातक उत्तीर्ण (विवाहित या अविवाहित) सभी छात्राओं को आगे की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहन स्वरूप 50 हजार रुपये की छात्रवृत्ति दी जाती है। यह धनराशि प्रतिवर्ष स्नातक परीक्षा में सफल छात्राओं के बैंक खाते में सीधे राज्य सरकार की ओर से भेजी जाती है।
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