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Delhi Police Bravery Story: एक फोन कॉल और दो मिनट का वक्त, इन दो जवानों को शबाशी दीजिए

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Delhi Police Bravery Story: एक फोन कॉल और दो मिनट का वक्त, इन दो जवानों को शबाशी दीजिए

Delhi Police Bravery Story: एक फोन कॉल और दो मिनट का वक्त, इन दो जवानों को शबाशी दीजिए

नई दिल्लीः ‘हेलो…. मेरे पति ने फांसी लगा ली है, तुरंत मदद की जरूरत है।’ रात के 2.30 बजे पीसीआर पट्रोलिंग कर रहे दिल्ली पुलिस के जवान को जब यह कॉल मिली तो दोनों तुरंत मौके के लिए रवाना हो गए। कॉल मिलते ही हेड कॉन्स्टेबल विजय सिंह चौहान और एएसआई दिनेश महज 2 मिनट के अंदर घटनास्थल पर पहुंच गए। घर के अंदर से रोने-चिल्लाने की आवाजें बाहर तक सुनाई आ रही थीं। अंदर पहुंचकर देखा तो कारोबारी सुबोध बंसल फांसी के फंटे पर लटके थे।

हेड कॉन्स्टेबल विजय ने सबसे पहले फंदा काटकर सुबोध को नीचे उतारा और जमीन पर लिटाया। सुबोध बेसुध थे और शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही थी। हेड कॉन्स्टेबल विजय ने उन्हें सीपीआर देना शुरू किया और मुंह से ऑक्सीजन दी। उधर, एएसआई दिनेश ने हाथ-पैर रगड़े। लगातार सीपीआर देने के लगभग 3 मिनट के बाद सुबोध के शरीर में हरकत हुई और उनकी धड़कन लौट आई। दोनों पुलिसकर्मी उन्हें सीपीआर देते हुए बिना देर किए पास के अस्पताल की इमरजेंसी में ले गए। जहां डॉक्टरों ने सुबोध का शुरुआती ट्रीटमेंट शुरू किया। हॉस्पिटल डॉक्टर ने बताया कि समय पर सीपीआर देने से सुबोध की जान बच गई अगर एक मिनट की देरी होती तो शायद उन्हें बचा पाना मुश्किल होता। बता दें कि फंदे पर लटकने की वजह से सुबोध सिंह की गर्दन की हड्डी और नसों में चोट वजह से फिलहाल उनका इलाज एलएनजेपी में चल रहा है।

फांसी के फंदे पर लटके कारोबारी की दिल्ली पुलिस के दो जवानों ने बचाई जान, 2 मिनट में पहुंचे मौके पर
बात दें कि 40 साल के सुबोध बंसल जनरल स्टोर चलाते हैं और अपने परिवार के साथ जहांगीरपुरी के डी ब्लॉक में रहते हैं। उनके परिवार में पत्नी अंजू बंसल के अलावा दो बच्चे 13 साल की बेटी और 10 साल का बेटा है। परिवार ने बताया कि सुबोध पिछले कुछ समय से डिप्रेशन के शिकार हैं। दरअसल, उन पर काफी कर्ज है और घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। उनके दोनों बच्चों नाम स्कूल से कट गए है। घर की आर्थिक हालत और देनदारों के दबाव के चलते वह मानसिक तनाव से गुजर रहे थे।

SUBODHBANSAL

कारोबारी सुबोध बंसल का इलाज चल रहा है

बुधवार की रात घटना के दिन, सुबोध दुकान से लौटने के बाद डिनर करके अपने कमरे में चले गए थे। अचानक आधी रात को उनकी पत्नी अंजू ने उन्हें फंदे से लटका देखा। अंजू की चीखने की आवाज सुनकर दूसरे फ्लोर पर रहने वाले सुबोध के भाई नीरज बंसल वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा उनके भाई पंखे से लटके हुए हैं और अंजू उनके पैरों को सपोर्ट देने की कोशिश कर रही हैं। उसी समय करीब 2:30 बजे पीसीआर कॉल की गई और हेड कॉन्स्टेबल विजय सिंह और एएसआई दिनेश सिंह मौके पर पहुंचे और उनकी जान बचाई। परिजनों ने पुलिसकर्मियों का आभार जताया है। डीसीपी ने भी जवानों को सम्मानित करने की घोषणा की है। डीसीपी उषा रंगनानी ने एएसआई दिनेश और हेड कॉन्स्टेबल विजय सिंह चौहान को हौसलाअफजाई देते हुए इनाम देने की घोषणा की है। डीसीपी ने कहा कि हेड कॉन्स्टेबल विजय सिंह चौहान सीपीआर और मेडिकल इमरजेंसी के लिए पहले से ट्रेंड हैं और इसी वजह से सुबोध की जान बच सकी। वह पहले एक अनजान मरीज को ब्लड देकर जान बचा चुके हैं।

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