फांसी के फंदे पर लटके कारोबारी की दिल्ली पुलिस के दो जवानों ने बचाई जान, 2 मिनट में पहुंचे मौके पर

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फांसी के फंदे पर लटके कारोबारी की दिल्ली पुलिस के दो जवानों ने बचाई जान, 2 मिनट में पहुंचे मौके पर

फांसी के फंदे पर लटके कारोबारी की दिल्ली पुलिस के दो जवानों ने बचाई जान, 2 मिनट में पहुंचे मौके पर

नई दिल्लीः जहांगीरपुरी थाने के दो पुलिसकर्मियों एएसआई दिनेश और हेड कॉन्स्टेबल विजय सिंह चौहान ने फंदा लगाकर झूल चुके एक कारोबारी को जिंदा बचा लिया। 40 साल के कारोबारी सुबोध बंसल को दोनों पुलिसकर्मी ना सिर्फ मौत के जबड़े से खींच लाए, बल्कि लगभग थम चुकीं सांसें भी लौटा दीं। डॉक्टर ने बताया, अगर एक मिनट की देरी हो जाती तो उनकी जान जा सकती थी। हालांकि गर्दन की हड्डी और नसों में चोट की वजह से उन्हें एलएनजेपी रेफर किया गया है। परिजनों ने पुलिसकर्मियों का आभार जताया है। डीसीपी ने भी जवानों को सम्मानित करने की घोषणा की है।

पुलिस और परिवार के मुताबिक, सुबोध बंसल परिवार के साथ जहांगीरपुरी के डी ब्लॉक में रहते हैं। उनकी जनरल स्टोर की शॉप है। परिवार में पत्नी अंजू बंसल और एक 13 साल की बेटी और 10 साल का बेटा है। परिवार के मुताबिक, सुबोध बंसल कर्ज के मकड़जाल में ऐसे फंसे कि सूदखोरों को पैसा चुकाते-चुकाते डिप्रेशन में आ गए। एक साल से बच्चों की स्कूल फीस भी जमा नहीं कर पाए। इसकी वजह से दोनों बच्चों के नाम स्कूल से कट गए।

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सुबोध बुधवार रात को रोज की तरह शॉप से घर लौटे। खाना खाकर अपने कमरे में चले गए। आधी रात को उनकी पत्नी अंजू के चीखने की आवाजें सुनकर दूसरे फ्लोर पर रहने वाले सुबोध के भाई नीरज बंसल वहां पहुंचे। देखा तो सुबोध पंखे से लटके हुए थे। जबकि पत्नी उनके पैरों को सपोर्ट देने की कोशिश कर रही थीं। मगर तब तक सुबोध की गर्दन एक तरफ लटक चुकी थी। परिवार के हाथ पांव फूल गए। इस दौरान रात 2:30 बजे पत्नी ने पीसीआर कॉल की। हेड कॉन्स्टेबल विजय सिंह चौहान जहांगीरपुरी थाने में बीट 2 के इंचार्ज हैं। रात पीसीआर पर पट्रोलिंग पर थे। अंजू की कॉल मिली कि, ‘मेरे पति ने फांसी लगा ली है, तुरंत मदद की जरूरत है…’।

कॉल मिलते ही एएसआई दिनेश और हेड कॉन्स्टेबल विजय सिंह चौहान महज 2 मिनट में वहां पहुंच गए। अंदर सुबोध का परिवार रोता बिलखता मिला। हेड कॉन्स्टेबल विजय ने फंदा काटकर सुबोध को जमीन पर लेटाया, फिर सीपीआर देना शुरू किया। मुंह से ऑक्सीजन दी। एएसआई दिनेश ने हाथ पैर मसले। करीब 3 मिनट के बाद सुबोध की धड़कन लौट आई। आंखों में मूवमेंट नजर आने लगी। दोनों पुलिसकर्मी उन्हें सीपीआर देते हुए तुरंत बीजेआरएम अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर गए। डॉक्टर ने बताया कि आप सही समय पर लेकर आए हो। एक मिनट की देरी होती तो इनकी सांसे थम चुकी थीं।

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डीसीपी उषा रंगनानी ने एएसआई दिनेश और हेड कॉन्स्टेबल विजय सिंह चौहान को हौसलाअफजाई देते हुए इनाम देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि हेड कॉन्स्टेबल विजय सिंह चौहान सीपीआर और मेडिकल इमरजेंसी के लिए पहले से ट्रेंड हैं। जिसकी वजह से सुबोध की जान बच सकी। इससे पहले एक अनजान मरीज को ब्लड देकर जान बचा चुके हैं।

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