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जहांगीरपुरी हिंसा: किसी की स्‍कूटी तोड़ी, किसी का गल्ला लूटा… जो नहीं लड़ रहे थे, दंगाई उन पर भी टूट पड़े

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जहांगीरपुरी हिंसा: किसी की स्‍कूटी तोड़ी, किसी का गल्ला लूटा… जो नहीं लड़ रहे थे, दंगाई उन पर भी टूट पड़े

जहांगीरपुरी हिंसा: किसी की स्‍कूटी तोड़ी, किसी का गल्ला लूटा… जो नहीं लड़ रहे थे, दंगाई उन पर भी टूट पड़े

नई दिल्‍ली: संदीप गर्ग (38) की कुशल चौक पर दुकान है। शनिवार को जब झड़पें शुरू हुईं तो उपद्रपियों का एक समूह उनकी दुकान के कैश काउंटर से 25,000 रुपये लेकर भाग गया। उन्‍होंने कहा, ‘मेरी दुकान के पास रहने वाले एक शख्‍स को मैंने भागते देखा। उसने बताया कि दंगे हो गए हैं। मैंने उसकी बात को हल्‍के में लिया लेकिन कुछ ही देर में भीड़ आती दिखी। मैंने दुकान के एक किनारे सामान लगाना शुरू किया लेकिन पैसा बाहर कैश काउंटर में रखा था।’ दंगाई उनकी दुकान के पास आए तो बचने के लिए गर्ग शटर गिराकर भाग गए। उन्‍होंने बताया, ‘भीड़ शटर पर पत्‍थर बरसाने लगी और जाने से पहले सारा कैश ले गई।’ करीब डेढ़ घंटे बाद जब संदीप वापस पहुंचे तो पता चला कि दुकान लूट ली गई है। सी ब्‍लॉक में ही केमिस्‍ट शॉप चलाने वाले राजेश गुप्‍ता का दावा है कि दंगों में उनका 15,000-20,000 रुपये का नुकसान हो गया। उन्‍होंने बताया, ‘दंगे शुरू हुए तो मैं दुकान खुली छोड़कर भाग गया। वापस आया तो देखा कि भीतर घुसकर पैसे लूटे गए हैं।’

गर्ग और गुप्‍ता की दुकान से कैश लूटा गया पर अशोक जिंदल की दुकान से राशन चोरी हुआ। डिलिवरी ट्रक से चावल अनलोड नहीं किए गए थे। दंगाइयो ने 10 बोरियां लूट लीं। जिंदल ने कहा, ‘चावल गरीब परिवारों के लिए था। ट्रक के साथ भी तोड़फोड़ की।’ हमारे सहयोगी टाइम्‍स ऑफ इंडिया ने जब जहांगीरपुरी के हिंसाग्रस्‍त इलाके के लोगों से बात की तो कई लोगों ने आपबीती सुनाई।

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किसी की कमाई बंद, किसी की स्‍कूटी-कार तोड़ दी गई
गाजीपुर से मीट सप्‍लाई करने वाले 32 साल के मोहम्‍मद अफजल का चार सदस्‍यीय परिवार उनपर निर्भर है। उन्‍होंने बताया, ‘मैं वैन चलाता हूं और जहांगीरपुरी और आसपास के दुकानदारों को मीट और बाकी सामान सप्‍लाई करता हूं। शनिवार की हिंसा के बाद से काम पर नहीं जा पाया हूं।’ 25 साल के नौशाद भी दो दिन से उस बिरयानी होटल नहीं जा पाए हैं जहां वो काम करते हैं। 50 साल के संजय कुमार अपनी पत्‍नी को डॉक्‍टर को दिखाने निकले थे पर उग्र भीड़ ने उनकी कार पलट दी। उन्‍होंने बताया, ‘बेटे ने कार घर के बाहर खड़ी की थी। मैं बीवी को लेकर डॉक्‍टर के पास जाने ही वाला था जब भीड़ ब्‍लॉक में घुसी और गाड़ी पर टूट पड़ी।’

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दंगाइयों ने कुलदीप की स्‍कूटी भी तोड़ दी। उन्‍होंने बताया, ‘मैंने पिछले साल ही स्‍कूटी खरीदी थी। रिश्‍तेदारों से मिलने आया था और गेट के बाहर स्‍कूटी खड़ी कर रखी थी। अनवर अली कहते हैं कि ऐसे हालात में गरीब ही सबसे ज्‍यादा परेशान होता है। उन्‍होंने कहा, ‘हम हिंसा में शामिल नहीं थे लेकिन झेल रहे हैं। मेरे दो बच्‍चे हैं और मुझे नहीं पता कि इन हालात में क्‍या करूं।’

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