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अन्‍ना हजारे ने 7वें दिन खत्‍म किया अनशन

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समाजसेवी अन्ना हजारे ने गुरुवार (29 मार्च) शाम अपना अनशन तोड़ा। दिल्ली के रामलीला मैदान में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनसे मुलाकात की और जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया। किसानों के मसले पर अन्ना बीते छह दिनों से अनशन पर बैठे थे। अनशन तोड़े जाने के दौरान केंद्रीय कृषि राज्य गजेंद्र सिंह शेखावत भी मौजूद थे। अन्ना के साथियों ने दावा किया कि उनकी मांगें कबूल कर ली गई हैं। आपको बता दें कि अन्ना 23 मार्च से अनशन पर थे। आज (29 मार्च) उनका सातवां दिन था। अन्ना के सहयोगी दत्ता अवारी ने इस बारे में कहा कि अनशन के वक्त अन्ना का वजन पांच किलो घट गया। उनके रक्तचाप में भी गिरावट देखने को मिली थी।

अन्ना ने इससे पहले ट्वीट किया था। लिखा था, “मैं देख रहा हूं कि लोग मेरी आलोचना कर रहे है। मुझ पर झूठे आरोप लगा रहे हैं। मुझे बदनाम करने के प्रयास कर रहे हैं। मैंने जिंदगी में बहुत आलोचना झेली है। मैं इससे कभी भी डरा नहीं। न ही दुखी हुआ। मुझे देश के अच्छे के अलावा कुछ भी नहीं चाहिए। न किसी से वोट और न ही कुछ और। दुख सिर्फ इतना है कि आलोचक झूठ बोलते हैं। फिर भी भगवान उनका भला करे।”

सरकार ने डेढ़ गुना न्यूनत समर्थन मूल्य की बात पर हामी भरी है। अन्ना के अनुसार, सरकार ने उनकी फसल पर डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की मांग मान ली है। जो किसान कर्ज लेकर खेती करता है, उसका नुकसान होने पर सरकार उस पर 50 फीसदी अधिक भुगतान करेगी।

अन्ना की ओर से मांग की गई थी कि कृषि उपज की लागत के आधार पर डेढ़ गुना दाम किसानों को मिले। खेती पर निर्भर 60 साल से उम्र वाले किसानों को पांच हजार रुपए के रूप में हर महीने पेंशन दी जानी चाहिए। कृषि मूल्य आयोग को संवैधानिक दर्जा और पूरी स्वायत्ता मिलनी चाहिए। लोकपाल विधेयक पारित होना चाहिए और लोकपाल कानून तुरंत लागू होना चाहिए। इस कानून को कमजोर बनाने वाली धारा 44 और धारा 63 का संशोधन भी फौरन रद्द किया जाना चाहिए। प्रत्येक राज्य में सक्षम लोकायुक्त की नियुक्ति की जानी चाहिए और चुनाव सुधार के लिए सही फैसले लिए जाने चाहिए।

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