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Explained: हैपेटाइटिस के इलाज में इस्तेमाल होने वाली Virafin क्यों कोरोना के खिलाफ है उम्मीद की किरण, समझें

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Explained: हैपेटाइटिस के इलाज में इस्तेमाल होने वाली Virafin क्यों कोरोना के खिलाफ है उम्मीद की किरण, समझें


हाइलाइट्स:

  • ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने जाइडस कैडिला की विराफिन को कोरोना में इलाज के लिए दी मंजूरी
  • विराफिन का इस्तेमाल मूल तौर पर हैपेटाइटिस सी और बी के इलाज में किया जाता है
  • इसके फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल के दौरान ज्यादातर मरीज सातवें दिन ही कोरोना नेगेटिव हो गए
  • भारत में कुल 20-25 केंद्रों पर 250 मरीजों पर विराफिन यानी PegIFN का फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल हुआ है

नई दिल्ली
देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर से हाहाकार जैसी स्थिति है। रेमडेसिविर, फैबी फ्लू जैसी दवाईयों की किल्लत है तो मेडिकल ऑक्सिजन की मांग भी कई गुना बढ़ चुकी है। समय से जरूरतमंदों को दवाइयां और ऑक्सिजन नहीं मिलने से कई मरीज मौत की मुंह में चले जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में शुक्रवार को एक बहुत राहत वाली खबर आई। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने कोरोना के इलाज के लिए जायडस कैडिला की दवा विराफिन के इमर्जेंसी यूज की इजाजत दे दी। कोरोना महामारी की दिन ब दिन गंभीर होती जा रही स्थिति के बीच विराफिन उम्मीद की एक नई किरण साबित हो सकती है। आइए समझते हैं कि क्या है विराफिन और क्यों यह भारत के लिए उम्मीद जगाने वाली है।

क्या है विराफिन?
जाइडस कैडिला की एंटी-वायरल दवा विराफिन का इस्तेमाल हैपेटाइटिस सी और बी के इलाज में किया जाता है। इस दवा का मेडिकल नाम ‘पेजिलेटेड इंटरफेरन अल्फा-2बी’ यानी PegIFN है। हैपेटाइटिस के इलाज में इसके कई डोज दिए जाते हैं। डीसीजीआई ने इसे वयस्कों में कोरोना वायरस के मध्यम संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है। ऐसा इसके क्लीनिकल ट्रायल के नतीजों के आधार पर किया गया है। कोरोना के इलाज में इसके सिंगल डोज का इस्तेमाल होगा। स्पष्ट है कि इस दवा का मूल तौर पर इस्तेमाल हैपेटाइटिस के इलाज में होता है। अब इसे कोरोना के इलाज के लिए रीपर्पज्ड किया गया है।

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इस महीने की शुरुआत में कैडिला ने DCGI की मांगी थी मंजूरी
जायडस कैडिला ने अप्रैल की शुरुआत में डीसीजीआई से PegIFN को कोरोना के इलाज में इस्तेमाल की मंजूरी मांगी थी। फेज-3 के क्लीनिकल ट्रायल में इस दवा का कोरोना मरीजों पर बहुत ही शानदार रिजल्ट मिला था। आखिरकार, DCGI ने इसके इमर्जेंसी यूज की इजाजत दे दी है। बिना डॉक्टर की सलाह के विराफिन को नहीं लिया जा सकता है और ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। यह दवा बिना प्रिस्क्रिप्शन के नहीं मिलेगी।

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क्यों है उम्मीद की किरण?
रेमडेसिविर, फैबी फ्लू जैसी दवाइयों की किल्लत के बीच कैडिला की विराफिन कोरोना के खिलाफ उम्मीद की किरण साबित हो सकती है। इसके फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल के नतीजें बहुत ही उत्साह बढ़ाने वाले हैं। जिन मरीजों को PegIFN की डोज दी गई, उनमें से 95.77 प्रतिशत मरीज सातवें दिन ही नेगेटिव हो गए। उनकी आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आई। इसके अलावा अगर समय से इसका इस्तेमाल हुआ तो ऑक्सिजन सपोर्ट की नौबत भी नहीं आएगी।

250 मरीजों पर हुआ ट्रायल, 237 सातवें दिन ही नेगेटिव
भारत में विराफिन यानी PegIFN के फेज-3 का ट्रायल देशभर के 20-25 सेंटरों पर कुल 250 मरीजों पर किया गया। इनमें से 95 प्रतिशत मरीज सातवें दिन ही नेगेटिव हो गए। क्लीनिकल ट्रायल के नतीजों के मुताबिक, PegIFN से रिकवरी की प्रक्रिया काफी तेज हुई। जिन मरीजों को शुरुआती स्टेज में ही PegIFN दी गई, वे अन्य मरीजों के मुकाबले तेजी से ठीक हुए और उनमें अडवांस्ड स्टेज में दिखने वाली जटिलताएं नहीं पैदा हुईं।

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विराफिन के फेज-2 के ट्रायल मेक्सिको में हुए थे। कैडिला अब अमेरिका में भी इसके ट्रायल की मंजूरी की कोशिश में है।

नेचर में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक ही रिजल्ट
विराफिन के क्लीनिकल ट्रायल के नतीजे ‘नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित उस रिसर्च के मुताबिक ही हैं जिसमें कहा गया है कि इंटरफेरोन (IFN) यानी एंटी-वायरल ड्रग्स और स्टेरॉयड्स का कॉकटेल कोरोना के इलाज में कारगर है।

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