श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) की ठंड आबोहवा में उगाए जाने वाली केसर (Saffron) ने पिछले 10 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. केसर की वार्षिक पैदावार ने पहली बार 13 मीट्रिक टन का आंकड़ा पार किया है. केंद्र सरकार द्वारा केसर क्रांति लाने के आह्वान के बाद ये मुमकिन हो सका है.
2011-12 में 1.5 Mts की कम पैदावार से लेकर 13.2 Mts तक की यह यात्रा J&K क्षेत्र के लिए असाधारण रही है. एक दशक पहले कश्मीरी केसर की कम पैदावार ने घाटी से इस फसल के खत्म होने की चेतावनी दी थी. मगर आज स्थिति विपरीत है, फसल दौगुनी हुई है. वहीं कश्मीर में उगाए गए केसर को जीआई टैग (geographical indication tag) मिलने के बाद इसमें मिलावट करना भी नामुमकिन हो गया है.
इन 4 जिलों में होती है केसर की खेती
जम्मू-कश्मीर के चार जिलों- पुलवामा, बडगाम, श्रीनगर और किश्तवाड़ में केसर की होती है. दुनिया में जम्मू-कश्मीर का केसर क्वालिटी के मामले में सर्वोत्तम माना जाता है और उत्पादन के लिहाज से भी ईरान के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर है. ऐसे में केंद्र सरकार जिस तरह से केसर की खेती को बढ़ावा दे रही है, उससे आने वाले कुछ साल में भारत में केसर का उत्पादन 18 टन से बढ़कर 34 टन हो सकता है और वह दिन दूर नहीं कि भारत ईरान को पीछे छोड़ दुनिया में केसर का सबसे बड़ा उत्पादक बन जाएगा.
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32 हजार किसान परिवार खेती से जुडे़
जम्मू में कृषि विभाग के डायरेक्टर चौधरी मोहम्मद इकबाल बताते हैं कि भारत में केसर की खेती सिर्फ जम्मू-कश्मीर में होती है, जिसको लेकर प्रदेश की दुनिया में खास पहचान है. यहां करीब 32,000 किसान परिवार केसर की खेती से जुड़े हैं और 3700 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में इसकी खेती हो रही है. इंग्लैंड, अमेरिका, मध्य-पूर्व के देशों सहित पूरी दुनिया में भारत केसर का निर्यात करता है और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत देसी करेंसी के रूप में देखें तो करीब 5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि देसी बाजार में 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम है.
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2019 के मुकाबले 2020 में बढ़ी पैदावार
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019-20 में 12.49 मेट्रीक टन केसर का उत्पादन जम्मू-कश्मीर में किया गया था. जबकि साल 2020-21 में 13.2 मेट्रीक टन केसर का उत्पादन किया गया है. आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल की पैदावार के मुकाबले इस बार केसर की पैदावार में बढ़ोतरी हुई है. हालांकि किसानों का कहना है कि सरकार को खेती के दौरान पानी की आपूर्ति पर खास ध्यान देने की जरूरत है. ताकि फसल ज्यादा और अच्छी हो सके.
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