नई दिल्ली: देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन 67वें दिन भी लगातार जारी है. किसान केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं. दिल्ली के बॉर्डर पर किसान भारी संख्या में फिर से इकट्ठा हो गए हैं. किसान आंदोलन (Farmers Protest) का Live Update यहां जानें:
– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने मन की बात कार्यक्रम में कहा कि दिल्ली में 26 जनवरी को तिरंगे का अपमान देखकर देश बहुत दुखी हुआ. हमें आने वाले समय को नई आशा और नवीनता से भरना है. हमने पिछले साल असाधारण संयम और साहस का परिचय दिया. इस साल भी हमें कड़ी मेहनत करके अपने संकल्पों को सिद्ध करना है.
– एनसीपी चीफ शरद पवार ने कहा कि कृषि कानून (Farm Laws) किसानों के हित में नहीं हैं. पीएम उद्योगपतियों के दबाव में किसानों पर कानून थोप रहे हैं.
– उत्तर प्रदेश के बागपत में कृषि कानून के मुद्दे पर आज रविवार को सर्वखाप की महापंचायत बुलाई गई है. इसमें सभी खापों के चौधरी दल-बल के साथ पहुंचेंगे. मौके पर भारी पुलिसबल तैनात किया गया है.
– गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस की जांच में कई खुलासे हुए हैं. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, उपद्रवी अलग-अलग वाहनों में सवार होकर लाल किला पहुंचे थे. इनमें से ज्यादातर दंगाई उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड से आए थे और कुछ पंजाब से भी थे.
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– दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि ट्रैक्टर परेड में शामिल बहुत से ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों पर नंबर नहीं था. कुछ का नंबर छुपा हुआ था और कुछ के नंबर फेक भी थे.
– दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर बैरिकेड लगा दिए गए हैं, जिससे एनएच- 24 पूरी तरह से बंद हो गया है.
– किसान आंदोलन (Farmers Protest) की वजह से नोएडा से अक्षरधाम जाने वाले रास्ते के अलावा, दिल्ली से इंदिरापुरम और नोएडा जाने वाले रास्ते को भी बंद कर दिया गया है. इससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
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– दिल्ली पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए नुकीले तारों वाली बैरिकेडिंग भी लगाई है. दिल्ली पुलिस की पूरी कोशिश है कि किसी भी हालत में किसान दिल्ली में ना घुस पाएं.
– दिल्ली बार्डर के पास काम करने वाले लोगों का कहना है कि हमारे पास भीख मांगने के अलावा कुछ नहीं बचा है. हमारे पास सिर्फ मरने का रास्ता बचा है. हमें काम पर जाने नहीं दिया जा रहा है. हम गरीब आदमी हैं, कैसे गुजारा करें.
– भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार खुद किसानों को बताए कि कृषि कानूनों को वापस क्यों नहीं लिया जा रहा है. हम वादा करते हैं कि सरकार का सिर दुनिया के सामने झुकने नहीं देंगे.
– ट्रैक्टर परेड में हुई हिंसा की वजह से कमजोर पड़ने के बाद किसान आंदोलन के एक बार फिर से मजबूत होने पर राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार की ऐसी क्या मजबूरी है कि वह कृषि कानूनों को रद्द नहीं करने पर अड़ी है.
– वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गुर्जर नेता मदन भैया ने भारतीय किसान यूनियन (BKU) के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जारी आंदोलन को अपना समर्थन दिया. मदन भैया ने कहा कि किसान अपनी मांगों को लेकर ठंड के बावजूद दिल्ली के बॉर्डर पर पिछले दो महीने से डटे हुए हैं. उनका आंदोलन गैर राजनीतिक और शांतिपूर्ण है.
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