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4 दिन की खुदाई… सूखी पहाड़ी पर फिर फूटा पानी: भोपाल के पास बेतवा उद्गम क्षेत्र में मिला ‘पार्वती कुंड’; सफाई करते ही भरने लगा जल – Bhopal News

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4 दिन की खुदाई… सूखी पहाड़ी पर फिर फूटा पानी:  भोपाल के पास बेतवा उद्गम क्षेत्र में मिला ‘पार्वती कुंड’; सफाई करते ही भरने लगा जल – Bhopal News

4 दिन की खुदाई… सूखी पहाड़ी पर फिर फूटा पानी: भोपाल के पास बेतवा उद्गम क्षेत्र में मिला ‘पार्वती कुंड’; सफाई करते ही भरने लगा जल – Bhopal News


भोपाल के पास ग्राम झिरी स्थित बेतवा नदी के सूखे उद्गम स्थल को पुनर्जीवित करने के लिए 10 मई से शुरू हुए श्रमदान अभियान के चौथे दिन बुधवार को श्रमदानियों को पहाड़ी पर एक प्राचीन प्राकृतिक जलस्रोत मिला। इसे ‘पार्वती कुंड’ नाम दिया गया है। जैसे ही श्रमदानियों ने मिट्टी और पत्थर हटाकर कुंड की सफाई शुरू की, अंदर से पानी की झिर फूट पड़ी। देखते ही देखते वर्षों से सूखा पड़ा कुंड पानी से भरने लगा। वहां मौजूद लोगों ने इसे किसी चमत्कार जैसा बताया। करीब 3 घंटे तक लगातार हाथों से खुदाई कर छह फीट गहरे और सात फीट चौड़े कुंड को फिर जीवित किया गया। बाद में तीन किलोमीटर दूर से फावड़ा और तगाड़ी मंगवाई गई। इसके बाद पास का दूसरा छोटा कुंड भी पानी छोड़ने लगा। सूखी पहाड़ी पर ऐसे फूटा पानी
अभियान से जुड़े लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो भी रिकॉर्ड किए हैं। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि जैसे-जैसे मिट्टी हटती है, कुंड के भीतर से पानी रिसना शुरू हो जाता है। कुछ ही देर में कुंड का तल पानी से भर जाता है और वहां मौजूद श्रमदानी खुशी से झूम उठते हैं। जैसे वर्षों से पानी बाहर आने का इंतजार कर रहा था
मप्रविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद से जुड़े विशेषज्ञों ने मौके पर जलधारा की संरचना का अध्ययन भी किया। उनका कहना है कि यह प्राकृतिक जलस्रोत लंबे समय से मिट्टी और पत्थरों के नीचे दब गया था। सफाई और जलनिकासी मार्ग खुलते ही पानी फिर सतह पर आ गया। श्रमदानियों का कहना है कि कुंड के आसपास जैव विविधता के संकेत भी मिले हैं। उनका मानना है कि बारिश के मौसम में यह जलस्रोत आसपास के वन्यजीवों के लिए भी सहारा बन सकता है। 4 दिन से लगातार चल रहा श्रमदान
बेतवा उद्गम क्षेत्र के झिरी इलाके में 10 मई से श्रमदान सप्ताह चल रहा है। हर दिन सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक लोग पहाड़ी क्षेत्र में चेक डैम बना रहे हैं और पुराने जलस्रोतों की सफाई कर रहे हैं। अब तक पांच नए चेक डैम बनाए जा चुके हैं, जबकि पिछले साल बने कई चेक डैम की मरम्मत भी की गई है। इस अभियान में भोपाल, विदिशा और इंदौर से आए पर्यावरण प्रेमी, वैज्ञानिक, पूर्व अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण शामिल हो रहे हैं। उद्गम क्षेत्र के पुजारी गोपाल दास ने भावुक होकर श्रमदानियों की तुलना भगीरथ से की। उनका कहना था कि जो कुंड कई वर्षों से पूरी तरह सूख चुका था, उसमें फिर पानी देखना किसी तपस्या के फल जैसा है। श्रमदान अभियान 16 मई तक जारी रहेगा। आयोजकों का कहना है कि उनका लक्ष्य सिर्फ एक कुंड भरना नहीं, बल्कि बेतवा नदी के उद्गम क्षेत्र को फिर से जीवित करना है।

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