झारखंड: 34 साल बाद भी बंधुआ मज़दूरी से छुड़ाए गए 300 लोग सरकारी लाभ से वंचित, हाईकोर्ट ने दिया निर्देश
झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में लगभग साढ़े तीन दशक पहले बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए करीब 300 लोगों को उनका कानूनी हक़ दिलाने का आदेश दिया है। अदालत ने गढ़वा जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित क
झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में लगभग साढ़े तीन दशक पहले बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए करीब 300 लोगों को उनका कानूनी हक़ दिलाने का आदेश दिया है। अदालत ने गढ़वा जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि इन सभी पीड़ितों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ तत्काल उपलब्ध कराया जाए।
यह मामला 1992 का है, जब उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से झारखंड के लगभग 300 बंधुआ मजदूरों को छुड़ाया गया था। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इनमें से कई लोग अब गढ़वा जिले में रहते हैं, लेकिन उन्हें बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के तहत मिलने वाली पुनर्वास सुविधाओं से आज तक वंचित रखा गया है।
अदालत की सख्त टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश एस.एम. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस मामले में अधिकारियों के रवैये पर नाराज़गी जताई। अदालत ने कहा कि पात्र लोगों को उनका अधिकार मिलने में इतनी देरी उचित नहीं है और सिर्फ कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून के तहत जिन्हें सहायता मिलनी चाहिए, उन्हें उसका वास्तविक लाभ मिलना ही चाहिए।
यह आदेश 'जनहित सेवा प्रतिष्ठान' के घनश्याम पाठक द्वारा 2023 में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि पिछले तीन वर्षों में अधिकारियों ने केवल पत्राचार किया, लेकिन मजदूरों को राहत देने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
अधिकारों से वंचित पीड़ित
याचिका में बताया गया था कि इन मुक्त कराए गए मजदूरों को आवास, स्वास्थ्य, रोजगार और पेंशन जैसी बुनियादी सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाया है। हाईकोर्ट ने अब गढ़वा के उपायुक्त को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि सभी पात्र मजदूरों की पहचान कर उन्हें बंधुआ मजदूर अधिनियम के तहत मिलने वाले लाभ और अन्य सभी सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाए।
इनपुट: IANS



