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सदर अस्पताल में भर्ती मरीज को निजी अस्पताल ले जाने के प्रयास में दो दलाल धराए

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सदर अस्पताल में भर्ती मरीज को निजी अस्पताल ले जाने के प्रयास में दो दलाल धराए

सदर अस्पताल में भर्ती मरीज को निजी अस्पताल ले जाने के प्रयास में दो दलाल धराए


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बेगूसराय, निज प्रतिनिधि। सदर अस्पताल के आईसीयू में भर्ती मरीज को शहर में एक निजी अस्पताल में बेहतर इलाज कराने का विश्वास दिलाने के नाम पर दो दलालों को अस्पताल प्रबंधन ने दबोच लिया। उसके बाद दोनों ठगों को सीएस डॉ. प्रमोद सिंह के समक्ष हाजिर किया। दोनों पर आरोप है कि आईसीयू में भर्ती मरीज से बिना सहमति के ही बीएसटी पर हस्ताक्षर कर स्वेच्छा से मरीज को इलाज के लिए निजी अस्पताल ले जाने असफल प्रयास का है। दोनों दलालों ने सीएस को सिंघौल थाना के राजापुर निवासी लक्ष्मण ठाकुर का पुत्र प्रियांशी कुमार व राजनीति यादव का पुत्र मुकुंद कुमार के रूप में अपना परिचय दिया। साथ ही एक शहर के एक निजी क्लीनिक का स्टाफ बताया। सीएस के आदेश पर दोनों दलालों को नगर थाने के हवाले कर दिया।

आईसीयू इंचार्ज पंकज कुमार ने बताया कि साहेबपुरकमाल का एक मरीज बजरंगी साह आईसीयू में भर्ती है। वह हाई बीपी का मरीज है। दो दलाल आईसीयू के अंदर प्रवेश कर गया। उसके बाद भर्ती मरीज के परिजनों को विश्वास दिलाया कि यहां बेहतर इलाज नहीं होता है। निजी क्लीनिक में चलिए हम वहां 15 हजार रुपये में इलाज करा देंगे। उसके बाद दोनों दलाल मरीज के परिजन के बिना सहमति के ही इलाज वाली पर्ची पर खुद लिख दिया कि हम स्वेच्छा से मरीज को बाहर ले जा रहे हैं। उसके बाद दलाल ने एबुंलेंस वाला को कॉल किया तो वह भी आ गया। मरीज के परिजन साधना कुमारी ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली कि डॉक्टर ने मरीज को रेफर कर दिया। जब वह यहां आयी तो परिवार से बात की तो बोला गया कि हम दोनों युवक को नहीं पहचानते हैं। हम यहीं पर इलाज कराना चाहते हैं। तबतक एंबुलेंस वाला मरीज को बाहर ले जा रहा है। वह पांच सौ रुपये की मांग भी किया। जब वह आसीयू इंचार्ज से शिकायत की तो पूरा मामले का खुलासा हो गया कि मरीज को अभिभावक की सहमति के बिना दलाल निजी क्लीनिक ले जा रहा है। उसके बाद आईसीयू इंचार्ज ने अस्पताल प्रबंधक पंकज कुमार को सूचना दी। उसके बाद सुरक्षा गार्ड के सहयोग से दोनों दलालों को पकड़ा गया व पुलिस के हवाले कर दिया गया।

कहते हैं सीएस

आईसीयू में प्रवेश कर मरीज को दोनों दलाल विश्वास दिला रहा था कि निजी अस्पताल में बेहतर इलाज होता है। यह सदर अस्पताल को बदनाम करने की साजिश है। इसे प्रबंधन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। दोनों दलालों को नगर थाने के हवाले कर दिया गया है। मरीज को निजी अस्पताल ले जाने का शायद यह पहला मामला है। सारी बिंदुओं पर मामले की जांच करायी जा रही है कि क्या इससे पहले भी इस तरह के मामले सामने आये हैं या नहीं। सीएस का दावा है कि सदर अस्पताल में बेहतर इलाज होता है। सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

डॉ. प्रमोद सिंह, सिविल सर्जन

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