विदेशों में पढ़ाई को आसान बनाएगा 4 साल का डिग्री कोर्स, जल्द ही जारी होंगे फाइनल रेगुलेशंस h3>
चार वर्ष का कोर्स स्टूडेंट्स के लिए कई मायनों में फायदेमंद है और ये कोर्स विदेशों में पढ़ाई के रास्ते भी आसान बनाएगा। अब देश में ही विदेशी यूनिवर्सिटी के कैंपस खुलेंगे, भारतीय और विदेशी यूनिवर्सिटी के बीच टाइअप होगा। जिन भारतीय यूनिवर्सिटी में चार साल का कोर्स होगा, वही विदेशी यूनिवर्सिटी के साथ आसानी से टाई-अप कर सकेंगी और स्टूडेंट्स की राह आसान होगी। जो छात्र विदेश में जाकर पोस्ट ग्रैजुएशन या और पढ़ाई करना चाहते हैं, उनको भी चार साल के कोर्स से फायदा होगा क्योंकि दाखिले की राह तो आसान होगी ही, साथ ही दोनों जगह की पढ़ाई में ज्यादा अंतर नहीं होगा। ग्लोबल स्टैंडर्ड को फॉलो किया जा सकेगा।
UGC के चेयरमैन प्रो. एम. जगदीश कुमार का कहना है कि अगले वर्ष फोर ईयर कोर्स लागू करने वाली यूनिवर्सिटी की संख्या दो से तीन गुना हो जाएगी। UGC की कई राज्य सरकारों के साथ चर्चा हुई है, जो चार साल का कोर्स लागू करना चाहते हैं। साथ ही UGC भी सभी राज्यों को इस बारे में लिखेगा।
चेयरमैन का कहना है कि चार वर्ष का कोर्स छात्रों के लिए बहुत फायदेमंद है। यूजीसी को उम्मीद है कि यूनिवर्सिटी अपने आप ही इस कोर्स को लागू करेंगी क्योंकि जिन यूनिवर्सिटी में यह कोर्स लागू नहीं होगा, वहां पर छात्रों को नए सिस्टम का फायदा नहीं मिल सकेगा। फोर ईयर कोर्स लागू करने के लिए यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के पास पीजी प्रोग्राम होना चाहिए। शिक्षकों के पास रिसर्च अनुभव होना चाहिए। रिसर्च कल्चर को महत्व दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि राज्य सरकारें भी अपने विश्वविद्यालयों को कह रही है कि चार वर्ष का कोर्स लागू किया जाए।
कोर्स को मिलेगा नया नाम
UGC के पैनल ने सुझाव दिया है कि आर्ट्स, मैनेजमेंट और कॉमर्स जैसे स्ट्रीम से भी बैचलर्स ऑफ साइंस की डिग्री दी जाए। चार साल के स्नातक डिग्री प्रोग्राम को बैचलर ऑफ साइंस (बीएस) डिग्री के रूप में पेश किया जाएगा। पैनल के सुझावों पर जल्द ही फाइनल रेगुलेशंस जारी किए जाएंगे। प्रो. कुमार का कहना है कि अगर वैश्विक स्तर पर देखें तो यह बदलाव जरूरी है। आर्ट्स, कॉमर्स में भी बीएस की डिग्री मिल सकती है। ग्लोबल स्टैंडर्ड को देखते हुए डिग्री का नाम होना चाहिए। इस बारे में फाइनल रेगुलेशंस एक-दो महीने में आ जाएंगे। हालांकि, यूनिवर्सिटी के पास यह विकल्प होगा कि वे चाहें तो बीए इकनॉमिक्स की डिग्री भी दे सकते हैं और ग्लोबल स्टैंडर्ड पर आने के लिए बीएस इकनॉमिक्स का विकल्प भी अपना सकते हैं। यह केवल डिग्री का नाम बदलना नहीं होगा बल्कि छात्रों को कई फायदें मिलेंगे। अगर किसी छात्र ने जरूरी क्रेडिट हासिल कर लिए हैं तो वह तय समय सीमा से पहले भी डिग्री लेकर जा सकता है। इस बार डीयू, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, जम्मू यूनिवर्सिटी समेत देश के 105 उच्च शिक्षा संस्थानों ने नए सेशन से चार वर्ष का अंडरग्रैजुएट कोर्स शुरू होगा। चार साल का कोर्स शुरू करने वाले संस्थानों में देश के 19 केंद्रीय विश्वविद्यालय भी हैं। 40 डीम्ड यूनिवर्सिटी, 18 प्राइवेट यूनिवर्सिटी और 22 राज्य यूनिवर्सिटी ने इस कोर्स को अपनाने पर सहमति दी है।
एनबीटी लेंस : यूनिवर्सिटी को फोर ईयर कोर्स अपनाना ही होगा
UGC ने बेशक फोर ईयर कोर्स को कंपलसरी नहीं किया है लेकिन यह तय है कि आज नहीं तो कल विश्वविद्यालयों को चार वर्ष का कोर्स अपनाना ही होगा। इसके पीछे कई कारण है। नई शिक्षा नीति में भारतीय और विदेशी विश्वविद्यालयों के बीच टाईअप बढ़ रहा है और इसका फायदा उन्हीं छात्रों को मिल सकता है, जो फोर ईयर स्कीम के दायरे में होंगे। साथ ही ग्लोबल स्टैंडर्ड को देखते हुए अब स्नातक स्तर पर डिग्री का नाम भी बदला जा रहा है। ऐसे में जो छात्र विदेश जाकर पोस्ट ग्रैजुएशन करना चाहते हैं, उनके लिए यह कोर्स राह को आसान बनाएगा। वहीं जिन विश्वविद्यालयों में फोर ईयर कोर्स होगा, वहां पर छात्रों को एडवांस्ड कोर्स भी पढ़ने को मिलेगा।




