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लड़की हिंदू-लड़का मुस्लिम तो शादी नामुमकिन, कोर्ट में सरेआम पिटाई: वकील और कोर्ट स्टाफ लीक करते हैं जानकारी; धार्मिक संगठन रोकते हैं शादियां

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लड़की हिंदू-लड़का मुस्लिम तो शादी नामुमकिन, कोर्ट में सरेआम पिटाई:  वकील और कोर्ट स्टाफ लीक करते हैं जानकारी; धार्मिक संगठन रोकते हैं शादियां

लड़की हिंदू-लड़का मुस्लिम तो शादी नामुमकिन, कोर्ट में सरेआम पिटाई: वकील और कोर्ट स्टाफ लीक करते हैं जानकारी; धार्मिक संगठन रोकते हैं शादियां

21 फरवरी 2025 मध्यप्रदेश के रीवा में एक कपल कोर्ट मैरिज करने पहुंचा। लड़के की उम्र 27 साल और लड़की 21 साल की। वकील ने उनके डॉक्यूमेंट देखे, तो पता चला लड़का मुस्लिम है और लड़की हिंदू।

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बात तुरंत फैल गई। वकील जुट गए और लव जिहाद का आरोप लगाकर लड़के को पीटने लगे। पुलिस ने कपल को बचाया और थाने ले गई। हंगामे की वजह से दोनों की शादी नहीं हो पाई। पुलिस ने केस तो दर्ज किया, लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।

7 फरवरी 2025 मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल। वही कहानी, मुस्लिम लड़का और हिंदू लड़की। स्पेशल मैरिज एक्ट में शादी रजिस्टर करने आए थे। ये बात हिंदूवादी संगठनों को पता चल गई।

विश्व हिंदू परिषद और संस्कृति बचाओ मंच के कार्यकर्ता कोर्ट पहुंच गए। लव जिहाद का आरोप लगाया और लड़के को लात-घूंसों से पीटा। कान पकड़कर माफी मंगवाई। शाम को पुलिस ने लड़के पर लव जिहाद का केस दर्ज कर लिया।

ये सिर्फ दो घटनाएं हैं। बीते कुछ महीनों से एक ट्रेंड चल पड़ा है। मुस्लिम लड़का और हिंदू लड़की सहमति से शादी करने कोर्ट पहुंचे, तभी वहां हिंदूवादी संगठनों के सदस्य पहुंच गए। लव जिहाद का आरोप लगाकर हंगामा और मारपीट की।

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कुछ मामले तो ऐसे भी हैं, जिसमें पीटने वाले वकील थे। दैनिक NEWS4SOCIALने पड़ताल की, तो पता चला कि ऐसे मामले बिहार के मुजफ्फरपुर और यूपी के फर्रुखाबाद-जौनपुर में भी सामने आए हैं।

16 अप्रैल को यूपी के फर्रुखाबाद में कोर्ट मैरिज करने पहुंचे कपल से हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मारपीट की थी।

हमारे सामने कुछ सवाल थे-

1. कोर्ट में घुसकर शादियां रुकवाने वाले कौन हैं?

2. उन्हें कैसे पता चलता है कि हिंदू-मुस्लिम जोड़ा शादी करने आया है?

3. क्या वकील या कोर्ट का स्टाफ कपल्स की जानकारियां लीक करते हैं?

4. क्या इसमें लड़के-लड़की के परिवार की भी कोई भूमिका होती है?

जवाब तलाशने के लिए हमने विक्टिम कपल, वकील, एक्टिविस्ट और हिंदूवादी संगठनों के पदाधिकारियों से बात की।

इस पूरे मामले को मीना और जुनैद की कहानी से समझिए मीना दिल्ली में रहती हैं। वैसे गुवाहाटी की रहने वाली हैं। मीना जुनैद से शादी करना चाहती थीं। दोनों के धर्म अलग थे। कानून इसकी मान्यता देता है, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उनके रिश्ते को ‘लव जिहाद’ बना दिया जाएगा। बचने के लिए दोनों दिल्ली आ गए। जुनैद ने धर्म बदला और विजय बन गए। आर्य समाज में शादी कर ली। एक साल हो गया, लेकिन अब भी दोनों डरे-सहमे रहते हैं।

मीना कहती हैं, ‘मैं हिंदू हूं। जिस लड़के से प्यार हुआ वो मुस्लिम था। हम बिना धर्म बदले शादी करना चाहते थे। परिवार राजी नहीं थे, इसलिए हमने कोर्ट मैरिज करने का फैसला लिया। कोर्ट में शादी करने पर नोटिस बोर्ड में शादी करने वालों की फोटो लगती है।’

‘हमारी यही फोटो किसी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी। मेरे परिवार से कहा गया कि मेरे साथ लव जिहाद हुआ है। हमें परेशान किया गया। समाज से कितना लड़ते। मेरे पति ने हिंदू धर्म अपना लिया ताकि हमारी शादी हो जाए।’

हमने मीना और जुनैद से मिलकर बात करनी चाही, तो बोले घर मत आइए। डर लगा रहता है कि पड़ोसियों को हमारे बारे में पता न चल जाए। कभी भी पुलिस आ सकती है या किसी संगठन के लोग हंगामा कर सकते हैं।

मीना और जुनैद दिल्ली में किराए के घर में रह रहे हैं। दोनों जनवरी, 2024 में दिल्ली आए थे।

हम उनसे एक मॉल में मिले। बातचीत की शुरुआत वे अपनी कहानी से करते हैं। 28 साल के जुनैद और 26 साल की मीना पहली बार गुवाहाटी में मिले। साल 2021 था। मीना बीकॉम कर रही थीं। जुनैद ग्रेजुएशन के बाद नौकरी की तलाश में थे। दोनों में प्यार हुआ। 2022 में उन्होंने सोचा कि अब शादी कर लेते हैं। परिवार से बात की, लेकिन धर्म अलग होने की वजह से वे राजी नहीं हुए।

मीना कहती हैं, ‘जुनैद की मां मान भी गईं, लेकिन मेरे मम्मी-पापा और भाई को हमारा रिश्ता मंजूर नहीं था। मैंने पहली बार मां को बताया, तो उन्होंने मुझे कमरे में बंद कर दिया। पापा ने कहा कि शादी हमारी जाति और धर्म में ही हो सकती है।’

‘मैंने कोर्ट मैरिज के बारे में पता किया। फिर जुनैद को बताया। फरवरी, 2023 में हम गुवाहाटी हाईकोर्ट गए। वकील से बात की। उसने कहा 20 हजार रुपए दे दो, एक हफ्ते बाद शादी करवा दूंगा। हमारा नाम नोटिस पर डिस्प्ले भी नहीं होगा।’

आगे की कहानी जुनैद बताते हैं, ‘एक हफ्ते बाद हम वकील के चेंबर में थे। वकील हिंदू थे। वे अचानक आए और बोले कि तुम्हारी शादी नहीं हो सकती। तुम लव जिहाद कर रहे हो। जाओ यहां से।’

हम बेबस थे। दोनों अपने घर चले गए। हमें अंदाजा भी नहीं था, हमारे साथ क्या होने वाला है। हमारे घर पहुंचने से पहले ही किसी ने हमारी फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी।

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तभी मीना बोलने लगती हैं। कहती हैं, ‘मैं घर पहुंची, तो बाहर भीड़ जमा थी। मां बहुत रो रही थी। मैंने मां से पूछा-क्या हुआ। उन्होंने मुझे फेसबुक पोस्ट दिखाई। उसमे लिखा था कि एक लड़का लव जिहाद कर रहा है। पोस्ट में मेरी और जुनैद की फोटो थी। मैं हैरान थी।’

‘पड़ोसी मां से कह रहे थे कि बेटी को घर पर बांधकर रखो, वरना तुम्हें समाज से बाहर कर देंगे। कुछ देर बाद सभी लोग चले गए। मैं घर पर ही रहने लगी। हम दो बार कोशिश कर चुके थे, लेकिन शादी नहीं हो पाई। मुझे लगा दिल्ली जाकर शादी के लिए अप्लाई करना चाहिए। वहां हम सेफ रहेंगे। हमने सोचा था कि सब ठीक हो जाएगा, लेकिन दिल्ली पहुंचने के बाद असली परेशानी शुरू हुई।’

मीना और जुनैद की भले अब शादी हो गई है, लेकिन हर फोन उन्हें डराता है। हमेशा डर रहता है कि कोई लव जिहाद की बात करके उनके घर न आ जाए।

वकील ने कहा- दोनों में से कोई एक धर्म बदल लो, शादी हो जाएगी मार्च में मीना और जुनैद ने दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में वकीलों से बात की। जुनैद बताते हैं, ‘हम जिस वकील से मिलते, वो यही सलाह देता कि दोनों में से कोई एक धर्म बदल लो। इसके लिए 10 रुपए का एफिडेविट लगेगा। एक गवाह के 500 रुपए लगेंगे। चेंबर में ही शादी या निकाह हो जाएगा।’

‘मुझे सलाह दी कि आप मुस्लिम हो, इसलिए आप धर्म बदल लो। इससे कोई संगठन विरोध नहीं कर पाएगा। हम स्पेशल मैरिज एक्ट में ही शादी करना चाहते थे। हमने 8 मार्च को शादी के लिए आवेदन दे दिया।’

आगे की कहानी मीना बताती हैं, ‘20 मार्च को मेरे परिवार को एक लेटर मिला। इसमें शादी के हमारे आवेदन की जानकारी थी। उन्होंने मुझे कॉल कर घर लौटने के लिए कहा। धमकी दी कि अगर जुनैद को नहीं छोड़ा तो मुझे मार डालेंगे। मेरी और जुनैद की फोटो सोशल मीडिया पर डाल दी।’

‘उसमें लिखा कि जुनैद मुझे भगाकर लव जिहाद के लिए दिल्ली ले गया है। जुनैद का परिवार भी हमारे सपोर्ट में नहीं था। आज भी हमारी एप्लिकेशन अटकी हुई है। कोई नोटिस या जानकारी हमें नहीं मिली। हमारे पास वापस जाने का ऑप्शन नहीं था। हमने हिंदू रीति-रिवाज से शादी कर ली। ’

मीना के पति जुनैद ने दिल्ली आकर धर्म बदल लिया। उन्होंने विजय नाम रखा। 25 अप्रैल को कृष्णा नगर के आर्य समाज मंदिर में दोनों ने शादी कर ली।

‘शादी हो गई, लेकिन लड़ाई अब भी खत्म नहीं हुई’ मीना और जुनैद शादी से पहले तक हॉस्टल में रह रहे थे। उन्हें घर की तलाश थी। मीना बताती हैं, ‘हम बहुत दिनों से दिल्ली में घर ढूंढ रहे थे। यहां हमारा कोई दोस्त नहीं है। जुनैद ने धर्म बदल लिया, लेकिन आधार कार्ड पर उनका नाम नहीं बदला है। मकान मालिक को पता चलता है कि हमारा धर्म अलग है, तो वे घर देने से इनकार देते थे।’

‘मुश्किल से इस महीने जनकपुरी में घर मिला है। बस एक कमरा है। हमारा डर अब भी खत्म नहीं हुआ है। 3 मई को जनकपुरी थाने से मकान मालिक को कॉल आया था। पुलिसवाले पूछ रहे थे कि हम कहां से आए हैं। हमारी शादी कैसे हुई। उन्होंने आर्य समाज मंदिर में भी कॉल किया था। हमें डर रहता है कि किसी संगठन के लोग घर आकर हंगामा न कर दें। इसलिए हम छिपकर ही रहते हैं।’

दूसरी कहानी हामिद और पूजा की

शादी करना चाहते थे, हिंदूवादी संगठन उनके ऑफिस पहुंच गए मीना और जुनैद जैसी कहानी हामिद और पूजा की भी है। 36 साल के हामिद और 32 साल की पूजा 2023 में मिले थे। हामिद यूपी के अलीगढ़ से हैं, पूजा पश्चिम बंगाल के नदिया की रहने वाली हैं।

पूजा बताती हैं, ‘मैं और हामिद गाजियाबाद में एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं। हमने शादी का फैसला लिया तो हमें रोका गया, डराया गया। हमने कोर्ट मैरिज के लिए ऑनलाइन अप्लाई कर दिया। मैंने लव जिहाद के बारे में सुना था, लेकिन नहीं पता था कि मेरा नाम भी इससे जुड़ जाएगा।’

पूजा आगे बताती हैं, ‘हमने नवंबर, 2024 में शादी के लिए एप्लिकेशन डाली। अगले ही महीने हिंदूवादी संगठन के लोग मेरे ऑफिस के बाहर प्रदर्शन करने आ गए। पहले मुझे समझ नहीं आया कि ये लोग कौन हैं। फिर हामिद ने बताया कि वे हम दोनों का नाम ले रहे हैं।’

‘मैं उन लोगों के पास गई। उनसे कहा कि मेरी रजामंदी से शादी कर रहे हैं। ये लव जिहाद नहीं है। उनके पास मेरे घर का पता और पापा का नंबर था। उनमें से एक शख्स ने मेरे पापा को कॉल कर दिया। बहुत हंगामा हुआ। सिक्योरिटी गार्ड ने उन लोगों को जैसे-तैसे हटाया।’

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दिसंबर में मजिस्ट्रेट ने हमारी एप्लिकेशन रिजेक्ट कर दी। हम अपनी मर्जी से कोर्ट मैरिज कर रहे थे। हमारे लिए कोई गवाह सामने नहीं आया। दोस्त पीछे हट गए।

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‘देश में ऐसा माहौल है कि दोस्त भी हमारे पचड़े में नहीं पड़ना चाहते थे। हमें जिसका डर था, वहीं हुआ। अब तक हमारी शादी नहीं हो पाई है।’

पुलिस या नोटिस बोर्ड से लीक होती है जानकारी कोर्ट से शादी की बात लीक कैसे होती है, ये सवाल हमने लखनऊ फैमिली कोर्ट के सीनियर एडवोकेट ब्रिजेश सिंह चौहान से पूछा। वे बताते हैं, ‘कोर्ट परिसर में नोटिस बोर्ड लगा रहता है। लोगों की नजरें उस पर पड़ ही जाती हैं।’

‘मान लीजिए किसी ने नोटिस बोर्ड पर देख लिया कि हिंदू-मुस्लिम के बीच शादी हो रही है। वो किसी धार्मिक संगठन से जुड़ा हुआ है, तो संगठनों तक खबर पहुंच जाती है। संगठन के लोग शादी रुकवाने में लग जाते हैं।’

‘इंटर रिलीजन मैरिज की जानकारी लीक होने का दूसरा बड़ा कारण पुलिस है। कोर्ट ऐसी शादियों के बारे में पुलिस की लोकल इंटेलिजेंस यूनिट को जानकारी देती है। पुलिस लड़के-लड़की के घर जाकर पता करती है कि शादी वैध तरीके से हो रही है या नहीं। कई बार पुलिस ऐसी कॉन्फिडेंशियल डिटेल लीक कर देती है, जो माता-पिता को भी पता नहीं रहती। इस वजह से कपल्स को विरोध झेलना पड़ता है।’

शादी की खबर लगते ही एक्टिव हो जाते हैं हिंदूवादी संगठन अलग धर्म के लड़के-लड़की की शादी की खबर लगते ही हिंदूवादी संगठन कोर्ट या उनके घर पहुंच जाते हैं। हंगामा करते हैं। मारपीट करते हैं। आखिर उन्हें कैसे पता चलता है कि कोई कपल कोर्ट में शादी करने आ रहा है। इस पर हमने हिंदू युवा वाहिनी और सुदर्शन वाहिनी के पदाधिकारियों से बात की।

हिंदू युवा वाहिनी: वकील और जजों का स्टाफ खबर देता है हिंदू युवा वाहिनी के महामंत्री माधव त्रिपाठी दैनिक NEWS4SOCIALको बताते हैं, ‘गांवों से लेकर शहर तक हमारे संपर्क सूत्र है। वे लगातार एक्टिव रहते हैं। कोर्ट में वकीलों से लेकर जजों के लिए काम करने वाले पैरोकार हमसे जुड़े रहते हैं। अगर किसी गैर धर्म वाली शादी का मामला आता है, तो तुरंत हमें फोन करके बताते हैं।’

अगर लड़की सहमति से शादी कर रही हो, परिवार भी राजी हो, क्या तब भी शादी रुकवाते हैं? माधव जवाब देते हैं, ‘हमारी कोशिश रहती है कि शादी न हो। हम नहीं चाहते कि हमारी बहनें किसी बहकावे या फिर झूठ में फंसकर दूसरे धर्म वाले व्यक्ति से शादी कर लें।’

‘लव जिहाद के मामले में सभी हिंदूवादी संगठन मिलकर काम कर रहे हैं। किसी के पास ऐसे मामले या शादी की जानकारी आती है, तो वो सबसे पहले सभी संगठनों के महामंत्री को फोन पर बताता है। फिर ये जानकारी वॉट्सएप और इंस्टाग्राम के ग्रुप्स पर भेजी जाती है। ग्रुप कॉल करके लोगों को इकट्ठा किया जाता है। फिर हम लोग एक साथ धावा बोल देते हैं।’

सुदर्शन वाहिनी: वॉट्सएप-फेसबुक पर नेटवर्क, यहीं खबर मिलती है यूपी, हरियाणा और दिल्ली में एक्टिव संगठन सुदर्शन वाहिनी 2017 से काम कर रहा है। आजाद विनोद इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वे बताते हैं, ‘हमारा वॉट्सएप और फेसबुक ग्रुप है। हमें कोई केस मिलता है, तो कार्यकर्ताओं को खबर देते हैं। उन्हें लड़के-लड़की का पता बताते हैं।’

‘हम नेटवर्किंग के जरिए काम करते हैं। कार्यकर्ता लड़की के घर जाते हैं। परिवार के सामने उनसे बात करते हैं। उन्हें समझाते हैं कि जब धोखा मिलेगा, तो उन्हें वापस आना ही पड़ेगा।’

दैनिक NEWS4SOCIALने धनक फॉर ह्यूमैनिटी के संस्थापक आसिफ इकबाल से भी बात की। उन्होंने 25 साल पहले अंतरधार्मिक विवाह किया था। तभी से वे ऐसे कपल का केस लड़ते हैं, जो स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी करना चाहते हैं।

आसिफ कहते हैं, ‘जो भी कपल सिविल मैरिज करना चाहते हैं, उनके लिए चीजें और मुश्किल हो गई हैं। इसकी प्रोसेस और आसान बनानी चाहिए। हमारे समय में स्पेशल मैरिज एक्ट में शादी के दौरान लोग गवाह बनने के लिए खुद से वॉलंटियर करते थे। आज गवाह ढूंढना मुश्किल हो गया है।’

‘सरकार 30 दिन के नोटिस पीरियड पर रोक लगाए। आप अपना आधार दिखाकर कहीं भी शादी कर सकते हैं। एक दिन में शादी हो। अगर किसी ने गलत जानकारी दी है, तो स्पेशल मैरिज एक्ट में सजा का प्रावधान है।’

कोर्ट में मारपीट, लेकिन आरोपियों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती राजस्थान हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस पानाचंद जैन कहते हैं, ‘कुछ समय से ऐसे मामले देखने को मिल रहे हैं, जिसमें इंटर रिलीजन शादियों में किसी संगठन से जुड़े लोग हंगामा करके रुकावट पैदा करते हैं। ऐसे मामलों में वक्त रहते पीड़ित पक्ष को बिना घबराए पुलिस से शिकायत करनी चाहिए।’

‘भारतीय कानून में कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर में दो तरह के मामले बताए गए हैं। पहला कॉग्निजेबल और दूसरा इनकॉग्निजेबल। कॉग्निजेबल मामलों में कोर्ट खुद केस की सुनवाई शुरू करता है। इनकॉग्निजेबल केस पुलिस जांच से होकर कोर्ट तक पहुंचते हैं।’

‘कोर्ट परिसर में हंगामा या मारपीट जैसे मामले इनकॉग्निजेबल कैटेगरी में आते हैं। इसमें पहले पुलिस से शिकायत करनी जरूरी होती है। कोर्ट कभी ऐसे मारपीट या हंगामे वाले मामलों में खुद से कार्यवाही नहीं करती है।’

वहीं यूपी के रिटायर्ड IPS ऑफिसर एसआर दारापुरी कहते हैं, ‘अलग धर्म के कपल का शादी करना अपराध नहीं है। ऐसी शादियों में हंगामा करना सांप्रदायिक एजेंडा बन गया है। पुलिस ऐसे संगठनों पर कार्रवाई करने से बचती है क्योंकि कई बार इनसे जुड़े लोगों का संपर्क पॉलिटिकल पार्टियों से होता है।’

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