मधुसूदनगढ़ नगर परिषद अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: 13 पार्षदों ने किया समर्थन, कलेक्टर से कहा- झूठे केस में फंसाने की धमकी देते हैं – Guna News h3>
अविश्वास प्रस्ताव की सूचना देने कलेक्ट्रेट पहुंचे पार्षद।
गुना जिले की नगर परिषद मधुसूदनगढ़ में अध्यक्ष श्यामलाल अहिरवार के खिलाफ पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। मंगलवार को पार्षदों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर यह प्रस्ताव सौंपा। तीन साल का कार्यकाल पूरा होते ही यह कदम उठाया गया है, जिससे नगर परिष
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2022 में हुए थे पहले चुनाव
मधुसूदनगढ़ को वर्ष 2017 में गजट नोटिफिकेशन के जरिए नगर परिषद का दर्जा मिला था। यहां 15 वार्ड बनाए गए और वर्ष 2022 में पहली बार पार्षदों के चुनाव हुए। चुनाव में 87 प्रतिशत मतदान हुआ था।
इसमें सबसे ज्यादा निर्दलीय उम्मीदवार जीते थे। 15 में से 6 वार्डों पर निर्दलीयों ने, 5 पर भाजपा और 4 पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। कुछ निर्दलीय पार्षद बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे, जिससे परिषद में भाजपा को बहुमत मिल गया था।
12 पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए।
अध्यक्ष पर मनमानी और विकास कार्य नहीं कराने के आरोप
पार्षदों ने श्यामलाल अहिरवार को नगर परिषद का अध्यक्ष चुना था। लेकिन कुछ ही महीनों में उनके और पार्षदों के बीच मतभेद शुरू हो गए। पार्षदों का आरोप है कि अध्यक्ष मनमानी करते हैं और वार्डों में कोई विकास कार्य नहीं कराया गया।
इससे पहले भी पार्षदों ने 2023 में अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश की थी, लेकिन तब सरकार ने यह सीमा दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी थी, जिससे प्रस्ताव रोक दिया गया था। अब तीन साल पूरे होते ही एक बार फिर अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है।
मंगलवार को पार्षद कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल से मिलने पहुंचे और उन्हें अविश्वास प्रस्ताव की सूचना दी। पार्षदों ने पहले जनसुनवाई कक्ष में आवेदन दिया, जिसके बाद कलेक्टर ने उन्हें अपने कक्ष में बुलाया।
पार्षदों ने शपथ पत्र भी प्रस्तुत किए।
अध्यक्ष पर धमकी देने और घोटाले के आरोप
कलेक्टर को सौंपे गए प्रस्ताव में 13 पार्षदों ने हस्ताक्षर किए हैं। पार्षदों ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष श्यामलाल अहिरवार न केवल जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों को नजरअंदाज कर रहे हैं, बल्कि उन्हें एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी भी दे रहे हैं। इससे परिषद के कर्मचारियों में डर का माहौल है।
पार्षदों ने यह भी आरोप लगाया कि बिना कोई काम कराए ही अध्यक्ष और उनके साथियों ने परिषद से राशि निकाल ली है। उन्होंने शपथ पत्रों के साथ यह प्रस्ताव सौंपा और कलेक्टर से आवश्यक कार्रवाई की मांग की।



