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भूमि सर्वेक्षण के लिए कागजात जुटाने में करनी पड़ रही मशक्कत

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भूमि सर्वेक्षण के लिए कागजात जुटाने में करनी पड़ रही मशक्कत

भूमि सर्वेक्षण के लिए कागजात जुटाने में करनी पड़ रही मशक्कत

बिरौल में विशेष भूमि सर्वेक्षण किसानों के लिए समस्या बन गया है। कागजात जुटाने में कठिनाई और समय की कमी के कारण किसान परेशान हैं। सरकारी आदेश के बावजूद, भूमि के रिकॉर्ड में सुधार नहीं हो पा रहा है,…

Newswrap हिन्दुस्तान, दरभंगाMon, 14 Oct 2024 07:48 PM
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बिरौल। विशेष भूमि सर्वेक्षण किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। अपनी जमीन के कागजात जुटाने के लिए किसानों को नाको चने चबाने पड़ रहे हैं। समय से जमीन के कागजात दुरुस्त नहीं हो पा रहे हैं। इससे किसानों की नींद हराम हो गयी है। भूमि का लगान निर्धारण, दाखिल खारिज, जमाबंदी में खाता- खेसरा का सुधार, पुराने केवाला का सत्यापन, पुराने केवाला पर दर्ज पुराना खाता-खेसरा को नया-खाता खेसरा चिन्हित कराने, अंचल कार्यालय में चालू खतियान व नए खतियान के अनुकूल पंजी टू उपलब्ध नहीं रहने से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे किसानों की बैचेनी बढ़ गयी है। राजस्व कर्मचारी कार्यालय से लेकर अंचल कार्यालय व अनुमंडल में भूमि सुधार उप समाहर्ता से लेकर जिला अभिलेखागार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। बावजूद इसके सफलता नहीं मिल रही है।

सरकार की ओर से रिविजनल सर्वे में जारी किए गए खतियान को भूमि का स्वामित्व प्रमाण का मान्यता देकर भूमि संबंधित कार्य में आरएस खतियान का उपयोग करने का आदेश दे दिया गया है, लेकिन जारी आरएस खतियान का अंचल कार्यालय में चालू खतियान नही बनाया गया। आरएस खतियान के आधार पर पंजी टू का भी संधारण नहीं किया गया। इस कारण पंजी टू में भूमि का खाता-खेसरा अंकित नहीं किया गया। इससे पूर्व 1898 में शुरू हुए केडस्टल सर्वे के दौरान 1902 में खतियान जारी किया गया था। उसी के आधार पर बनी पंजी टू से लगान वसूली का काम किया जा रहा है। इस बीच बढ़ते भूमि विवाद को कम करने के लिए सरकार की ओर से 2017 में आरएस खतियान एव पंजी टू को आनन-फानन में ऑनलाइन किया गया। लेकिन इसमें कई त्रुटियां रह गई।

कई में रैयतों का नाम गलत कर दिया गया तो कई में गलत रकवा अंकित कर दिया गया। 75 फीसदी से अधिक जमाबंदी में खाता-खेसरा व रकवा अंकित नही है। इस कारण परिमार्जन कराने के नाम पर दोहन किया जाता है। साथ ही जमाबंदी से दाखिल खारिज नहीं किया जाता है। शुरू में सरकार की ओर से परिमार्जन के माध्यम से छूटे हुए जमाबंदी को सीओ जांच के बाद ऑनलाइन सुधार कर देते थे। इस बीच सरकार के नए फरमान से उसे भी बन्द कर दिया गया। साथ ही सीओ की ओर से किये गए परिमार्जन को लॉक कर भूमि सुधार उप समाहर्ता को जांच करने की जिम्मवारी दे दी गई। समय से जांच नहीं होने के कारण वर्षो से किसानों को राजस्व रसीद नहीं कट रही है। किसान वर्षों से कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।

इसी प्रकार अधिकतर केवाला में पुराना खेसरा दर्ज है और हालिया जारी नियम के अनुसार दाखिल खारिज पोर्टल पर आवेदन करने के लिए आवेदक को विक्रेता का जमाबंदी व उस जमाबंदी में खाता-खेसरा रहने पर ही ऑनलाइन माध्यम से आवेदन स्वीकार किया जाएगा। इसमें कमी रहने पर आवेदन नहीं लेने की व्यवस्था सरकार कि ओर से कर दी गई है। अधिकतर केवाला में पुराना खाता-खेसरा दर्ज है जबकि नए नियमों के अनुसार पुराना खाता-खेसरा के साथ नया खाता-खेसरा दर्ज रहने पर दाखिल खारिज करने के साथ विक्रेता का जमाबंदी कायम रहना अनिवार्य है। इधर, विशेष भूमि सर्वेक्षण के नियमानुसार सभी कागजात के साथ प्रपत्र टू के माध्यम से रैयत की ओर से समर्पित घोषणा पत्र की जांच चालू खतियान, खेसरा पंजी, सीएस व आरएस खतियान व दखल कब्जा को सत्यापित कर सत्यापन प्रमाणपत्र अंचल को देने का प्रावधान है जबकि किसी अंचल में खेसरा पंजी तथा चालू खतियान का संधारण नहीं किया गया है। इससे किसानों को सर्वे कार्य की सहजता एव शुचिता पर संदेह उत्पन्न हो रहा है।

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प्रपत्र टू के साथ संलग्न कागजात सत्यापन किश्तवार के समय किया जाएगा। उस समय भू स्वामी को अपनी भूमि पर सभी कागजात के साथ रहना अनिवार्य है।

-सुनील कुमार मिश्रा, विशेष भूमि सर्वेक्षण शिविर प्रभारी

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