बृजभूषण के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर सात जुलाई को आएगा फैसला, दिल्ली पुलिस की क्या है दलील h3>
आरोपपत्र में डब्ल्यूएफआई के निलंबित सहायक सचिव विनोद तोमर को भी आईपीसी की धारा 109 (किसी अपराध के लिए उकसाना, उकसावे के परिणामस्वरूप कोई कृत्य होना और ऐसे कृत्य के लिए दंड का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं होना), 354, 354ए और 506 के तहत अपराध के लिए नामित किया गया था।
वर्तमान मामले के अलावा, एक नाबालिग पहलवान द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर बृजभूषण के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत एक और प्राथमिकी दर्ज की गई थी। नाबालिग पहलवान उन सात महिला पहलवानों में शामिल थी, जिन्होंने बृजभूषण पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।
दोनों प्राथमिकी में एक दशक के दौरान अलग-अलग समय और स्थानों पर बृजभूषण द्वारा महिला पहलवानों को अनुचित तरीके से छूने, पीछा करने और डराने-धमकाने जैसे आरोपों का जिक्र किया गया है। पॉक्सो अदालत संभवतः चार जुलाई को बृजभूषण के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने के अनुरोध वाली रिपोर्ट पर विचार करेगी।
हालांकि, आश्चर्यजनक रूप से नाबालिग पहलवान के पिता ने बताया था कि उसने और उसकी बेटी ने बृजभूषण के खिलाफ यौन उत्पीड़न की झूठी शिकायत दर्ज कराई थी, क्योंकि दोनों लड़की के खिलाफ कथित अन्याय को लेकर उनसे (बृजभूषण से) बदला लेना चाहते थे। पुलिस बृजभूषण से अब तक दो बार पूछताछ कर चुकी है और दोनों बार उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से इनकार किया है। बृजभूषण ने दावा किया है कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है।
महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न का मुद्दा ओलंपिक पदक विजेता बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगट जैसे प्रतिष्ठित पहलवानों ने उठाया था। बृजभूषण के खिलाफ पहलवानों के प्रदर्शन को कई विपक्षी दलों और किसान संगठनों का समर्थन मिला।





